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नायब तहसीलदार की रिपोर्ट झूठी निकली 

Sun, 15 Jan 2017 11:29 PM IST
Sant Kabir Nagar
Sant Kabir Nagar Updated Sun, 15 Jan 2017 11:29 PM IST
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 The report turned out to be false Naib
जांच - फोटो : demopic
डीएम के निर्देश पर सीडीओ और पीडी की संयुक्त जांच में नायब तहसीलदार की रिपोर्ट झूठी निकली। पात्र होने का दावा करके लोहिया आवास मांगने वाली दोनों महिलाएं अपात्र मिलीं। जबकि पूर्व में बीडीओ द्वारा की जांच रिपोर्ट सही पाई गई। दोनों अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट डीएम को प्रेषित कर दी है। 
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पीडी अनिल कुमार पांडेय ने बताया कि पौली विकास खंड के समग्र गांव मकदूमपुर की रहने वाली लखपत्ती देवी पत्नी रामबचन और सुभागी पत्नी रामचेत ने पात्र बताते हुए लोहिया आवास दिए जाने की मांग की थी। दोनों के पात्रता की जांच पहले धनघटा के पूर्व नायब तहसीलदार ने की। नायब तहसीलदार ने दोनों की वार्षिक आय 36,000 रुपये से कम दर्शाते हुए दोनों के पास छप्पर होना रिपोर्ट में अंकित किया था।
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बाद में दोनों के पात्रता की जांच पूर्व बीडीओ राजाराम यादव ने की तो दोनों के पास पक्का मकान होने का रिपोर्ट में जिक्र करते हुए उन्हें अपात्र दर्शाया था। बाद में दोनों महिला पात्र होने का दावा करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच र्गइं। हाईकोर्ट के आदेश पर डीएम सुरेश कुमार ने फिर से दोनों महिलाओं की पात्रता की जांच करने और उनके आवास की फोटोग्राफी करके रिपोर्ट प्रेषित करने के लिए सीडीओ और पीडी को जिम्मेदारी दी। 11 जनवरी को सीडीओ और पीडी ने मकदूमपुर पहुंच कर मामले की जांच की। जांच में पाया गया कि लखपत्ती पत्नी रामबचन के पास दो कमरा, बरामदा सहित पक्का मकान है। जबकि सुभागी पत्नी रामचेत के पास दो कमरा ,गैलरी व बरामदा सहित पक्का मकान है। 
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इसके अलावा खेत के पास बाग में झोपड़ी डाल कर पशुपालन व खेत की रखवाली करते है। जबकि इन लोगों का रहना और भोजन बनाने का काम गांव के मकान से होता है। सुभागी के दो बेटे ज्ञानचंद और जयचंद है।  ज्ञानचंद वर्तमान में सफाईकर्मी हैं। अभिलेखों के परीक्षण के दौरान यह भी पता चला कि सुभागी पत्नी रामचेत को वर्ष 2003-04 में इंदिरा आवास तथा इनके बेटे ज्ञानचंद्र को वर्ष 2008-09 में महामाया आवास का लाभ मिल चुका है। जांच में लखपत्ती और सुभागी लोहिया आवास के लिए पात्र नहीं पाई गई। 
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