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Sant Kabir Nagar News: माह-ए-शाबान शुरू, शब-ए-बरात तीन फरवरी को
Fri, 23 Jan 2026 01:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 23 Jan 2026 01:56 AM IST
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मौलाना फुजैल नदवी, शब-ए-बरात वाली खबर में
सेमरियावां। इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक माह-ए-शाबान बुधवार से शुरू हो गया है। शब-ए-बरात तीन फरवरी को अकीदत व एहतराम के साथ मनाया जाएगा। शाबान की 15 तारीख की रात को शब-ए-बरात के नाम से जाना जाता है। इस मौके पर तमाम मस्जिदों, दरगाहों, कब्रिस्तानों की साफ-सफाई व सजावट होगी।
आल इंडिया उलेमा बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना शोएब नदवी ने बताया कि माह-ए-शाबान बहुत मुबारक महीना है। यह दीन-ए-इस्लाम का 8वां महीना है। इसके बाद माह-ए-रमजान आएगा। उन्होंने बताया कि शब-ए-बरात का अर्थ है गुनाहों से तौबा करने और अल्लाह की इबादत करने की रात है। इस्लाम में इस रात को महत्वपूर्ण माना जाता है। हदीस शरीफ में बताया गया है कि इस रात में साल भर के होने वाले तमाम काम बांटे जाते हैं। जैसे किसकी पैदाइश होगी, किसका इंतकाल होगा, किसे कितनी रोजी मिलेगी आदि। इसके साथ हर इंसान के गुनाहों और अच्छाइयों का लेखा-जोखा भी इसी रात को होता है।
इस दिन शहर की छोटी से बड़ी मस्जिदों, घरों में लोग इबादत करते हैं। अल्लाह से दुआ मांगते हैं। कब्रिस्तानों में जाकर पूर्वजों की कब्रों पर फातेहा पढ़कर उनकी बख्शिश (मगफिरत) की दुआ करते हैं।
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आल इंडिया उलेमा बोर्ड के प्रदेश महासचिव मौलाना फुजैल नदवी ने बताया कि मुसलमानों को शब-ए-बरात की रात खुदा के जिक्र, कुरान पाक की तिलावत और नमाज पढ़ने में गुजारनी चाहिए। इस रात तहज्जुद, नफिल नमाज और अगले दिन का रोजा खुदा को बहुत पसंद है। हाफिज एजाज मुनीर नदवी ने कहा कि मुसलमानों को शब-ए-बरात में अपने वालिदैन की मगफिरत मांगनी चाहिए। शब-ए-बरात सादगी मनाएं और शोरशराबे से बचें।
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आल इंडिया उलेमा बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना शोएब नदवी ने बताया कि माह-ए-शाबान बहुत मुबारक महीना है। यह दीन-ए-इस्लाम का 8वां महीना है। इसके बाद माह-ए-रमजान आएगा। उन्होंने बताया कि शब-ए-बरात का अर्थ है गुनाहों से तौबा करने और अल्लाह की इबादत करने की रात है। इस्लाम में इस रात को महत्वपूर्ण माना जाता है। हदीस शरीफ में बताया गया है कि इस रात में साल भर के होने वाले तमाम काम बांटे जाते हैं। जैसे किसकी पैदाइश होगी, किसका इंतकाल होगा, किसे कितनी रोजी मिलेगी आदि। इसके साथ हर इंसान के गुनाहों और अच्छाइयों का लेखा-जोखा भी इसी रात को होता है।
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इस दिन शहर की छोटी से बड़ी मस्जिदों, घरों में लोग इबादत करते हैं। अल्लाह से दुआ मांगते हैं। कब्रिस्तानों में जाकर पूर्वजों की कब्रों पर फातेहा पढ़कर उनकी बख्शिश (मगफिरत) की दुआ करते हैं।
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आल इंडिया उलेमा बोर्ड के प्रदेश महासचिव मौलाना फुजैल नदवी ने बताया कि मुसलमानों को शब-ए-बरात की रात खुदा के जिक्र, कुरान पाक की तिलावत और नमाज पढ़ने में गुजारनी चाहिए। इस रात तहज्जुद, नफिल नमाज और अगले दिन का रोजा खुदा को बहुत पसंद है। हाफिज एजाज मुनीर नदवी ने कहा कि मुसलमानों को शब-ए-बरात में अपने वालिदैन की मगफिरत मांगनी चाहिए। शब-ए-बरात सादगी मनाएं और शोरशराबे से बचें।

मौलाना फुजैल नदवी, शब-ए-बरात वाली खबर में

मौलाना फुजैल नदवी, शब-ए-बरात वाली खबर में