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जूरी को कच्ची शराब से मुक्ति का संकल्प लिया
sant kabir nagar
Updated Sun, 11 Dec 2016 11:28 PM IST
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जूरी गांव पहुंची पुलिस टीम ने लोगांे के साथ बैठक की।
- फोटो : अमर उजाला
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जूरी गांव में कच्ची शराब के निर्माण पर रोक लगाने की मुहिम का असर दिखने लगा है। पहले पुलिस ने कच्ची शराब के धंधेबाजोें के अड्डों पर छापेमार कर सख्ती की थी और फिर लोगों को जागरूक करने की। इसी क्रम में रविवार को पुलिस ने गांव वालों के साथ बैठक की। लोगों ने गांव में कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री न होने देने का संकल्प लिया।
दरअसल, जूरी गांव डेढ़ दशक से कच्ची शराब के लिए क्षेत्र के लिए चर्चित है।
पुलिस और आबकारी विभाग की कोशिशें जब काम न आई तो गांव के युवाओं ने पहल की। इस दौरान धंधेबाजों का विरोध भी सहना पड़ा। एक सप्ताह में पुलिस ने ताबड़तोड़ दबिश दीं। अवैध शराब की भट्टियां तोड़ी, लहन और उपकरण को नष्ट किया गया। कुछ लोगों के खिलाफ यूरिया का इस्तेमाल करके जहरीली शराब बनाने और बेचने की धाराओं में केस तक दर्ज किया। उसके बाद पुलिस ने जागरूकता अभियान भी चलाया। एसआई प्रदीप सिंह ,कांस्टेबल रामेश्वर यादव, राम प्रताप सिंह रविवार को जूरी गांव में पहुंचे, जहां गांव वालों के साथ शराब बंदी पर बैठक कर विचार-विमर्श किया। लोगों ने बताया कि यहां 55 से अधिक घरों में कच्ची शराब बनाए और बेचे जाने का धंधा होता था। कच्ची शराब पीने वाले 40 से अधिक लोगों की अब तक मौत हो चुकी है।
लोग गांव से शादी संबंध बनाने से बचने लगे हैं। अब गांव में कच्ची शराब बनाने वाले अधिकांश लोग अवैध धंधा छोड़ चुके हैं। ऐसे चार लोग और बचे हैं जो कच्ची के धंधे में अभी भी लिप्त हैं। एसआई प्रदीप सिंह ने कहा कि ऐसे लोगों को जीवन गुजारने के लिए शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने की पहल करेंगे।
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पात्रों को बीपीएल, अंत्योदय और पात्र गृहस्थी का राशन कार्ड बनाए जाने, इंदिरा आवास मुहैया कराने और मनरेगा में काम के लिए जॉबकार्ड बनाने के लिए डीएम से मिल कर वार्ता करेंगे। जो लोग कच्ची शराब का धंधा नहीं छोड़ेंगे, उनके खिलाफ गुंडा और गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई कराएंगे। गांव के महेंद्र, रमेश, रामकेश, बेचू, चंद्रजीत, ज्ञानमती ,आशा, राधिका सहित 200 से अधिक लोगों ने कच्ची शराब न बनने और बिकने देने का संकल्प लिया है। गांव को बदनामी के दाग से मुक्त करने की कोशिश में लगे हैं।
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दरअसल, जूरी गांव डेढ़ दशक से कच्ची शराब के लिए क्षेत्र के लिए चर्चित है।
पुलिस और आबकारी विभाग की कोशिशें जब काम न आई तो गांव के युवाओं ने पहल की। इस दौरान धंधेबाजों का विरोध भी सहना पड़ा। एक सप्ताह में पुलिस ने ताबड़तोड़ दबिश दीं। अवैध शराब की भट्टियां तोड़ी, लहन और उपकरण को नष्ट किया गया। कुछ लोगों के खिलाफ यूरिया का इस्तेमाल करके जहरीली शराब बनाने और बेचने की धाराओं में केस तक दर्ज किया। उसके बाद पुलिस ने जागरूकता अभियान भी चलाया। एसआई प्रदीप सिंह ,कांस्टेबल रामेश्वर यादव, राम प्रताप सिंह रविवार को जूरी गांव में पहुंचे, जहां गांव वालों के साथ शराब बंदी पर बैठक कर विचार-विमर्श किया। लोगों ने बताया कि यहां 55 से अधिक घरों में कच्ची शराब बनाए और बेचे जाने का धंधा होता था। कच्ची शराब पीने वाले 40 से अधिक लोगों की अब तक मौत हो चुकी है।
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लोग गांव से शादी संबंध बनाने से बचने लगे हैं। अब गांव में कच्ची शराब बनाने वाले अधिकांश लोग अवैध धंधा छोड़ चुके हैं। ऐसे चार लोग और बचे हैं जो कच्ची के धंधे में अभी भी लिप्त हैं। एसआई प्रदीप सिंह ने कहा कि ऐसे लोगों को जीवन गुजारने के लिए शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने की पहल करेंगे।
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पात्रों को बीपीएल, अंत्योदय और पात्र गृहस्थी का राशन कार्ड बनाए जाने, इंदिरा आवास मुहैया कराने और मनरेगा में काम के लिए जॉबकार्ड बनाने के लिए डीएम से मिल कर वार्ता करेंगे। जो लोग कच्ची शराब का धंधा नहीं छोड़ेंगे, उनके खिलाफ गुंडा और गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई कराएंगे। गांव के महेंद्र, रमेश, रामकेश, बेचू, चंद्रजीत, ज्ञानमती ,आशा, राधिका सहित 200 से अधिक लोगों ने कच्ची शराब न बनने और बिकने देने का संकल्प लिया है। गांव को बदनामी के दाग से मुक्त करने की कोशिश में लगे हैं।