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Sant Kabir Nagar News: एससी/एसटी एक्ट के केस में न्यायालय ने किया बरी
Thu, 31 Jul 2025 11:19 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 31 Jul 2025 11:19 PM IST
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संतकबीरनगर। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी अधिनियम की अदालत ने बृहस्पतिवार को एक अहम फैसले में शशिकपूर राय एवं विपुल राय को वर्षों से लंबित एससी/एसटी एक्ट के मुकदमे से साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। यही नहीं केस के आधार पर मिलने वाली सरकारी सहायता को वापस लेने का निर्देश दिया है।
तुलसीराम द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोप था कि अभियुक्तों ने हरिजन आबादी की भूमि पर जबरन कब्जा कर दीवार गिराई और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी दी। किंतु न्यायालय ने गवाहों के बयान, प्रस्तुत साक्ष्य और दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि दीवार गिराने की कार्यवाही प्रशासनिक आदेश पर हुई थी।
सुनवाई के दौरान वादिनी की पत्नी ने यह बयान दिया कि यदि अभियुक्त मकान दे दें तो वह मुकदमा वापस लेने को तैयार हैं। अदालत ने इस बयान को महत्वपूर्ण मानते हुए इसे मुकदमे के पीछे निजी स्वार्थ और व्यक्तिगत उद्देश्य से प्रेरित मानने की संभावना जताई। न्यायाधीश भूपेन्द्र राय ने अपने फैसले में कहा कि किसी प्रशासनिक आदेश पर की गई कार्रवाई को जातीय उत्पीड़न के रूप में प्रस्तुत करना न्याय की दृष्टि से उचित नहीं है। अभियुक्तों के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं पाए गए जिससे अपराध संदेह से परे सिद्ध हो सके। संवाद
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तुलसीराम द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोप था कि अभियुक्तों ने हरिजन आबादी की भूमि पर जबरन कब्जा कर दीवार गिराई और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी दी। किंतु न्यायालय ने गवाहों के बयान, प्रस्तुत साक्ष्य और दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि दीवार गिराने की कार्यवाही प्रशासनिक आदेश पर हुई थी।
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सुनवाई के दौरान वादिनी की पत्नी ने यह बयान दिया कि यदि अभियुक्त मकान दे दें तो वह मुकदमा वापस लेने को तैयार हैं। अदालत ने इस बयान को महत्वपूर्ण मानते हुए इसे मुकदमे के पीछे निजी स्वार्थ और व्यक्तिगत उद्देश्य से प्रेरित मानने की संभावना जताई। न्यायाधीश भूपेन्द्र राय ने अपने फैसले में कहा कि किसी प्रशासनिक आदेश पर की गई कार्रवाई को जातीय उत्पीड़न के रूप में प्रस्तुत करना न्याय की दृष्टि से उचित नहीं है। अभियुक्तों के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं पाए गए जिससे अपराध संदेह से परे सिद्ध हो सके। संवाद
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