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सिपाही सुबह भूख हड़ताल बैठा, शाम को माना
Sant Kabir Nagar
Updated Thu, 15 Dec 2016 11:34 PM IST
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एसपी के खिलाफ सीओ खलीलाबाद कार्यालय में तैनात निलंबित सिपाही ओमप्रकाश सिंह बेटे नवीन सिंह के साथ बृहस्पतिवार सुबह डीएम कार्यालय के सामने भूख हड़ताल पर बैठ गए।
- फोटो : अमर उजाला
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एसपी के खिलाफ सीओ खलीलाबाद कार्यालय में तैनात निलंबित सिपाही ओमप्रकाश सिंह बेटे नवीन सिंह के साथ बृहस्पतिवार सुबह डीएम कार्यालय के सामने भूख हड़ताल पर बैठ गए। आरोप है कि ज्यादती की केंद्रीय जांच एजेंसी जांच कराए जाने की मांग को लेकर उन्होंने यह निर्णय लिया।
हालांकि देर शाम प्रभारी डीएम एसएन शुक्ल ने सिपाही से वार्ता कर कहा कि डीएम के 19 दिसंबर को दोपहर में जिले में आएंगे। साथ ही लिखित आश्वासन दिया कि आने पर वह सिपाही से मिलकर संबंधित लोगों को जांच के लिए पत्र भी लिखेंगे। इसके बाद सिपाही ने भूख हड़ताल खत्म कर दी और दिल्ली जाने का इरादा भी त्याग दिया।
देवरिया जिले के लार थाना क्षेत्र के रावतपार अमेठिया गांव निवासी सिपाही का आरोप है कि उसकी भूमि पर विपक्षियों कब्जा कर लिया है। भूमि विवाद में ही उसके खिलाफ लार थाने में केस दर्ज है। जबकि घटना के समय वह तैनाती स्थल महराजगंज जिले के सीओ नौतनवां कार्यालय में था। वर्तमान एसपी संतकबीरनगर पूर्व में एएसपी देवरिया के पद पर तैनात थे तो उन्होंने उसके मामले की निष्पक्षता से जांच नहीं की। आठ नवंबर को उसने एसपी समेत अन्य जांचकर्ताओं के खिलाफ आईजी गोरखपुर को आवेदन पत्र दिया था और मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की थी।
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इस शिकायत खफा एसपी ने उसे 13 दिसंबर को निलंबित कर दिया, जबकि जमीन संबंधी विवाद शुरू होने के बाद से अब तक किसी भी एसपी ने उसे निलंबित नहीं किया। उसकी मांग है कि निलंबन की कार्रवाई के साथ उसके पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराई जाए। शुक्रवार सुबह दस बजे तक यदि उसकी बात नहीं सुनी गई तो वह दिल्ली रवाना हो जाएगा। यहां पीएम और गृह मंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखेगा।
वहीं एसपी विक्रमादित्य सचान ने बताया कि सिपाही ओमप्रकाश सिंह ने उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर अपने मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराए जाने की मांग की थी। साथ ही 15 दिसंबर को भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी थी। जिसकी जांच सीओ सिटी से कराई गई। रिपोर्ट में यह बात सामने आयी कि सिपाही का प्रकरण देवरिया जिले से जुड़ा है।
सिपाही के खिलाफ लार थाने में दो मुकदमे दर्ज हैं। इसकी चार्जशीट कोर्ट में जा चुकी है। सीओ ने भी सिपाही को समझाया ,लेकिन वह नहीं माना। भूख हड़ताल की चेतावनी देना अनुशासनहीनता है। उसी वजह से सिपाही को निलंबित किया गया। उनके ऊपर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। सिपाही के जरिए अनुशासन तोड़ कर भूख हड़ताल करने के मामले की जांच एएसपी को सौंपी गई है।
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हालांकि देर शाम प्रभारी डीएम एसएन शुक्ल ने सिपाही से वार्ता कर कहा कि डीएम के 19 दिसंबर को दोपहर में जिले में आएंगे। साथ ही लिखित आश्वासन दिया कि आने पर वह सिपाही से मिलकर संबंधित लोगों को जांच के लिए पत्र भी लिखेंगे। इसके बाद सिपाही ने भूख हड़ताल खत्म कर दी और दिल्ली जाने का इरादा भी त्याग दिया।
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देवरिया जिले के लार थाना क्षेत्र के रावतपार अमेठिया गांव निवासी सिपाही का आरोप है कि उसकी भूमि पर विपक्षियों कब्जा कर लिया है। भूमि विवाद में ही उसके खिलाफ लार थाने में केस दर्ज है। जबकि घटना के समय वह तैनाती स्थल महराजगंज जिले के सीओ नौतनवां कार्यालय में था। वर्तमान एसपी संतकबीरनगर पूर्व में एएसपी देवरिया के पद पर तैनात थे तो उन्होंने उसके मामले की निष्पक्षता से जांच नहीं की। आठ नवंबर को उसने एसपी समेत अन्य जांचकर्ताओं के खिलाफ आईजी गोरखपुर को आवेदन पत्र दिया था और मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की थी।
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इस शिकायत खफा एसपी ने उसे 13 दिसंबर को निलंबित कर दिया, जबकि जमीन संबंधी विवाद शुरू होने के बाद से अब तक किसी भी एसपी ने उसे निलंबित नहीं किया। उसकी मांग है कि निलंबन की कार्रवाई के साथ उसके पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराई जाए। शुक्रवार सुबह दस बजे तक यदि उसकी बात नहीं सुनी गई तो वह दिल्ली रवाना हो जाएगा। यहां पीएम और गृह मंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखेगा।
वहीं एसपी विक्रमादित्य सचान ने बताया कि सिपाही ओमप्रकाश सिंह ने उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर अपने मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराए जाने की मांग की थी। साथ ही 15 दिसंबर को भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी थी। जिसकी जांच सीओ सिटी से कराई गई। रिपोर्ट में यह बात सामने आयी कि सिपाही का प्रकरण देवरिया जिले से जुड़ा है।
सिपाही के खिलाफ लार थाने में दो मुकदमे दर्ज हैं। इसकी चार्जशीट कोर्ट में जा चुकी है। सीओ ने भी सिपाही को समझाया ,लेकिन वह नहीं माना। भूख हड़ताल की चेतावनी देना अनुशासनहीनता है। उसी वजह से सिपाही को निलंबित किया गया। उनके ऊपर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। सिपाही के जरिए अनुशासन तोड़ कर भूख हड़ताल करने के मामले की जांच एएसपी को सौंपी गई है।