फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sant Kabir Nagar News ›   Social media and mobile phone addiction are causing sleep deprivation.

Sant Kabir Nagar News: सोशल मीडिया और मोबाइल की लत उड़ा रही नींद

Thu, 01 Jan 2026 02:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Thu, 01 Jan 2026 02:06 AM IST
विज्ञापन
Social media and mobile phone addiction are causing sleep deprivation.
जिला अस्पताल में दवा के लिए लगी लाइन-संवाद - फोटो : credit
संतकबीरनगर। आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और मोबाइल फोन का अत्यधिक इस्तेमाल लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। विशेषकर बच्चों और युवाओं में इसकी लत तेजी से बढ़ रही है। इसके कारण नींद की कमी, आंखों में सूखापन, जलन और सर्वाइकल की समस्याएं आम हो गई हैं।
विज्ञापन

जिला अस्पताल की नेत्र ओपीडी में रोजाना 70 से 80 मरीज आ रहे हैं। इनमें 20 से 25 मरीज इसी तरह की शिकायतें बता रहे हैं। इनमें बच्चों की संख्या अधिक है। इस तरह के मरीज सीएचसी में भी आ रहे हैं। डॉक्टर केपी सिंह का कहना है कि देर रात तक मोबाइल चलाने की आदत ने लोगों की नींद उड़ा दी है। नीली रोशनी (ब्लू लाइट) के कारण मेलाटोनिन हार्मोन प्रभावित होता है, जिससे अनिद्रा की समस्या बढ़ती है। इसका सीधा असर आंखों पर पड़ता है। ड्राई आई सिंड्रोम, जलन, धुंधलापन और आंखों के नीचे ड्रेनेज जैसी शिकायतें आम हैं। साथ ही गर्दन झुकाकर फोन देखने से सर्वाइकल दर्द (टेक्स्ट नेक) की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है।
विज्ञापन

0
विशेषज्ञों के सुझाव

- मोबाइल और कंप्यूटर देखने समय पलकें झपकाएं
- रात में सोने से एक घंटा पहले मोबाइल बंद कर दें।
- मोबाइल को आंखों के स्तर पर रखें, गर्दन न झुकाएं।
- बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम सीमित करें।
- दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से दूर रखें।
- रोजाना आउटडोर खेलकूद और व्यायाम को प्राथमिकता दें।
- आंखों में जलन या दर्द हो तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
0
आंखों को थका रही मोबाइल की नीली रोशनी
सीएचसी खलीलाबाद के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर केपी सिंह ने बताया कि मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों की थकान बढ़ाती है और लंबे समय तक इस्तेमाल से मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। मोबाइल देखने से बच्चों में चश्मे का नंबर तेजी से बढ़ रहा है। बच्चों में यह लत पढ़ाई, खेल-कूद और सामाजिक व्यवहार पर भी बुरा असर डाल रही है। आंखों की सुरक्षा के लिए जरूरी टियरफिम कम होने से जलन होती है। कई मामलों में चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और वजन बढ़ना जैसी समस्याएं भी देखी जा रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed