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Sant Kabir Nagar News: गायघाट दक्षिणी और दौलतपुर में सरयू की कटान तेज...ग्रामीणों में दहशत

Sun, 18 Aug 2024 12:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Sun, 18 Aug 2024 12:05 AM IST
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Saryu cutting intensifies in Gaighat South and Daulatpur...panic among villagers
- धनघटा क्षेत्र में तीन दिन से नदी कर रही कटान
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- 24 घंटे में जलस्तर में 10 सेमी की कमी

संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। क्षेत्र के गायघाट दक्षिणी में पिछले तीन दिनों से चल रही नदी की कटान से ग्रामीण भयभीत नजर आ रहे हैं। पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 10 सेमी कमी दर्ज की गई। बिड़हरघाट पर शनिवार को नदी का जलस्तर 78.600 दर्ज किया गया। जलस्तर घटने के बाद नदी की कटान जोर पकड़ रही है। दौलतपुर और गायघाट के सिवान में कटान होने से उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो रही है। चार वर्ष पूर्व नदी की कटान से हुई तबाही से गायघाट दक्षिणी के 38 मकान विलीन हो गए थे।


उपजाऊ जमीन विलीन होने से किसान चिंतित

कटान से सहमे किसानों को राहत व बचाव की कोई उम्मीद नजर नही आ रही है। कटान का वेग बढ़ने से दोनों गांव में दहशत का माहौल बना है। खेती से परिवार की जीविका चलाने वाले किसानों के सामने अब रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो रही है।
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हैंसर क्षेत्र के गायघाट दक्षिणी, दौलतपुर, चपरा पूर्वी, जगदीशपुर आदि एक दर्जन गांवों के सीवान में चल रही नदी की कटान में अब तक तीन सौ बीघे से अधिक उपजाऊ जमीन नदी की धारा में विलीन हो चुकी है। निकटवर्ती गांवों के अनेक किसान भूमिहीन होने के करीब पहुंच चुके है। कटान से मांझा में किसान खरीफ व रवि फसलों से परिवार की जीविका चलाते हैं। बड़े पैमाने पर खेती योग्य भूमि नदी में कटने से किसान चिंतित है।
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गायघाट दक्षिणी गांव निवासी राजमन, कंसु, भग्गल, राजेंद्र, राम नरेश, सतई, रामकवल, भोला, चंद्रिका, रामवृक्ष, चंद्रजीत, नागेंद्र, बालेंद्र, इसदेव, जोखन, मिठाई, बुधराम, सुंदर, सुरेंद्र, पलटन आदि ने बताया कि उपजाऊ जमीन से हाथ धोना पड़ रहा है। सतई ने बताया कि प्रति वर्ष बाढ़ आपदा में लोग आर्थिक रूप से टूट चुके है। खेत नदी में समाहित होने से रोजी रोटी पर संकट खड़ा हो रहा है। रामकवल ने बताया कि जिन किसानों की जमीनें नदी में विलीन ही रही है उनके लिए परिवार का जीवन-यापन करना मुश्किल हो गया है।

कटान से हो रहे नुकसान की जानकारी की जाएगी। हल्का लेखपालों को रिपोर्ट देने को कहा गया है।
- रमेश चंद, एसडीएम धनघटा
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