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साधन सहकारी समितियां बदहाल, रबी अभियान में बढ़ेगी किसानों की मुसीबत
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साधन सहकारी समिति बाघनगर का जर्जर भवन।
- फोटो : KHALILABAD
साधन सहकारी समितियां बदहाल, रबी अभियान में बढ़ेगी किसानों की मुसीबत
-16 समितियां हैं निष्क्रिय, कई जगह उग आए हैं झांड़ झंखाड़
- कई सचिवों पर दो से तीन समितियों की जिम्मेदारी
संतकबीरनगर। रबी अभियान की शुरुआत हो गई है। किसानों को खाद-बीज की जरूरत है, लेकिन जिले में साधन समितियां बदहाल हैं। स्थिति यह है कि 16 समितियां निष्क्रिय पड़ी हुई हैं। साथ ही कहीं भवन जर्जर हैं तो कहीं झांड- झंखाड़ उग आए हैं। ऐसे में रबी अभियान को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
बाढ़ व अतिवृष्टि के चलते पहले ही किसान परेशान हैं। किसानों की धान की फसल बर्बाद हो गई, लेकिन अब भी किसानों की मुसीबत कम नहीं हुई है। किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए जिले में 76 साधन सहकारी समितियां स्थापित हैं। विभाग का दावा है कि इन समितियों के जरिए किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन समितियों में से मात्र 50 ही सक्रिय हैं। वर्तमान में कई साधन सहकारी समितियां बदहाल हैं तो कई समितियों पर ताला लटका हुआ है। बानगी के तौर पर खलीलाबाद ब्लॉक का चकदही साधन सहकारी समिति बंद पड़ा है। यहां भवन के इर्द-गिर्द झांड झंखाड़ उग गए हैं, जिससे यहां जाने से लोग कतराते हैं। इसी तरह की स्थिति बघौली ब्लॉक के बकहा सहित अन्य कई स्थानों पर भी है। यही नहीं साधन सहकारी समितियों पर सचिवों की भी कमी बनी हुई है। सचिवों की कमी के कारण एक-एक सचिव पर दो से तीन समितियों की जिम्मेदारी है। जिससे सचिव एक साधन सहकारी समिति पर आते हैं तो दूसरी समिति पर ताला लटका रहता है और किसानों को भटकना पड़ता है।
किसान दशरथ यादव, रामपाल आदि ने कहा कि वर्तमान में गेहूं की बुआई का समय है और खाद-बीज की जरूरत है, लेकिन समितियों पर ताला लगे होने से दिक्कत हो रही है। ऐसे में मजबूरी में मार्केट से खाद खरीदनी पड़ेगी। जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा ने कहा कि किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए हर स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। जो समितियां सक्रिय हैं, वहां खाद- बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी। सचिवों की कमी के कारण कुछ दिक्कत है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
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-16 समितियां हैं निष्क्रिय, कई जगह उग आए हैं झांड़ झंखाड़
- कई सचिवों पर दो से तीन समितियों की जिम्मेदारी
संतकबीरनगर। रबी अभियान की शुरुआत हो गई है। किसानों को खाद-बीज की जरूरत है, लेकिन जिले में साधन समितियां बदहाल हैं। स्थिति यह है कि 16 समितियां निष्क्रिय पड़ी हुई हैं। साथ ही कहीं भवन जर्जर हैं तो कहीं झांड- झंखाड़ उग आए हैं। ऐसे में रबी अभियान को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
बाढ़ व अतिवृष्टि के चलते पहले ही किसान परेशान हैं। किसानों की धान की फसल बर्बाद हो गई, लेकिन अब भी किसानों की मुसीबत कम नहीं हुई है। किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए जिले में 76 साधन सहकारी समितियां स्थापित हैं। विभाग का दावा है कि इन समितियों के जरिए किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन समितियों में से मात्र 50 ही सक्रिय हैं। वर्तमान में कई साधन सहकारी समितियां बदहाल हैं तो कई समितियों पर ताला लटका हुआ है। बानगी के तौर पर खलीलाबाद ब्लॉक का चकदही साधन सहकारी समिति बंद पड़ा है। यहां भवन के इर्द-गिर्द झांड झंखाड़ उग गए हैं, जिससे यहां जाने से लोग कतराते हैं। इसी तरह की स्थिति बघौली ब्लॉक के बकहा सहित अन्य कई स्थानों पर भी है। यही नहीं साधन सहकारी समितियों पर सचिवों की भी कमी बनी हुई है। सचिवों की कमी के कारण एक-एक सचिव पर दो से तीन समितियों की जिम्मेदारी है। जिससे सचिव एक साधन सहकारी समिति पर आते हैं तो दूसरी समिति पर ताला लटका रहता है और किसानों को भटकना पड़ता है।
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किसान दशरथ यादव, रामपाल आदि ने कहा कि वर्तमान में गेहूं की बुआई का समय है और खाद-बीज की जरूरत है, लेकिन समितियों पर ताला लगे होने से दिक्कत हो रही है। ऐसे में मजबूरी में मार्केट से खाद खरीदनी पड़ेगी। जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा ने कहा कि किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए हर स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। जो समितियां सक्रिय हैं, वहां खाद- बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी। सचिवों की कमी के कारण कुछ दिक्कत है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
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