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Sant Kabir Nagar News: कबीर चौरा परिसर में खिचड़ी के मेले की तैयारियां शुरू
Fri, 02 Jan 2026 12:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 02 Jan 2026 12:21 AM IST
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मगहर में सजे खजले की दुकान-संवाद
मगहर। सद्गुरु कबीर की निर्वाण स्थली मगहर स्थित कबीर चौरा परिसर में मकर संक्रांति यानी खिचड़ी के पर्व के आगमन पर लगने वाले मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें सजने लगीं हैं। तरह- तरह के झूले, खजले, बिसाते आदि की दुकानों के सजने का क्रम लगातार जारी है।कबीर की समाधि व मजार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला भी धीरे धीरे अभी से शुरू हो गया है।
सनातन धर्म के अनुसार जब सूर्य मकर रेखा पर पहुंचते हैं। तभी मकर संक्रांति पर्व या खिचड़ी का पर्व मनाया जाता है। इसके बाद से ही सभी प्रकार के धार्मिक तथा वैवाहिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हो जाता है। मान्यता के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति (खिचड़ी) का पर्व मनाया जाता है। श्रद्धालु कबीर की समाधि व मजार पर आस्था की खिचड़ी चढ़ाते हैं।
इस मौके पर कबीर चौरा परिसर में लगने वाले परंपरागत मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। खजले, बिसाते की दुकानों के साथ ही विभिन्न प्रकार के झूले भी लगने लगे हैं। हालांकि, इसी मौके पर वर्ष 1987 से हर साल 12 से 18 जनवरी तक मगहर महोत्सव का आयोजन होता था। परंतु किन्हीं कारणों से पिछले तीन वर्ष से इसका आयोजन समय से न होने से स्थानीय लोगों के साथ ही दूरदराज से आ रहे दुकानदारों में मायूसी जरूर दिखती है। लेकिन उनके उत्साह में खिचड़ी के मेले को लेकर कोई कमी नहीं दिख रही है।
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-महीने के अंत में मगहर महोत्सव होने से दुकानदार मायूस
झूले की दुकान लगाने वाले बहराइच निवासी अख्तर, इलाहाबाद निवासी अकबाल अहमद उर्फ बाले, बुलंद शहर से आए खजले की दुकान लगाने वाले महिपाल सिंह, बहराइच से खजले की दुकान लगाने आए सिपाही वर्मा, यासीन खान कानपुर, लाला चप्पल वाला सीतापुर, जादू दिखाने वाले सगीर सीतापुर, बहराइच निवासी इस्माइल, सुभानल्लाह, राकेश चौरसिया आदि का कहना है कि वे लोग पिछले 35 साल से मगहर महोत्सव में इस उम्मीद से आते हैं कि सूफी संत कबीर के दर्शन के साथ ही रोजी-रोटी भी कमा लेंगे। यहां आने पर जानकारी मिली है कि इस बार भी मगहर महोत्सव का आयोजन महीने के अंत में होने वाला है। इससे मायूसी तो हुई है, लेकिन वे निराश नहीं हैं। उन्हें कबीर चौरा परिसर में लगने वाले परंपरागत खिचड़ी मेले से रोजी-रोटी का जुगाड़ हो जाता है। उनके बच्चों के लिए रोटी का कुछ इंतजाम कबीर साहेब की कृपा से होता रहा है और होता रहेगा।
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सनातन धर्म के अनुसार जब सूर्य मकर रेखा पर पहुंचते हैं। तभी मकर संक्रांति पर्व या खिचड़ी का पर्व मनाया जाता है। इसके बाद से ही सभी प्रकार के धार्मिक तथा वैवाहिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हो जाता है। मान्यता के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति (खिचड़ी) का पर्व मनाया जाता है। श्रद्धालु कबीर की समाधि व मजार पर आस्था की खिचड़ी चढ़ाते हैं।
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इस मौके पर कबीर चौरा परिसर में लगने वाले परंपरागत मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। खजले, बिसाते की दुकानों के साथ ही विभिन्न प्रकार के झूले भी लगने लगे हैं। हालांकि, इसी मौके पर वर्ष 1987 से हर साल 12 से 18 जनवरी तक मगहर महोत्सव का आयोजन होता था। परंतु किन्हीं कारणों से पिछले तीन वर्ष से इसका आयोजन समय से न होने से स्थानीय लोगों के साथ ही दूरदराज से आ रहे दुकानदारों में मायूसी जरूर दिखती है। लेकिन उनके उत्साह में खिचड़ी के मेले को लेकर कोई कमी नहीं दिख रही है।
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-महीने के अंत में मगहर महोत्सव होने से दुकानदार मायूस
झूले की दुकान लगाने वाले बहराइच निवासी अख्तर, इलाहाबाद निवासी अकबाल अहमद उर्फ बाले, बुलंद शहर से आए खजले की दुकान लगाने वाले महिपाल सिंह, बहराइच से खजले की दुकान लगाने आए सिपाही वर्मा, यासीन खान कानपुर, लाला चप्पल वाला सीतापुर, जादू दिखाने वाले सगीर सीतापुर, बहराइच निवासी इस्माइल, सुभानल्लाह, राकेश चौरसिया आदि का कहना है कि वे लोग पिछले 35 साल से मगहर महोत्सव में इस उम्मीद से आते हैं कि सूफी संत कबीर के दर्शन के साथ ही रोजी-रोटी भी कमा लेंगे। यहां आने पर जानकारी मिली है कि इस बार भी मगहर महोत्सव का आयोजन महीने के अंत में होने वाला है। इससे मायूसी तो हुई है, लेकिन वे निराश नहीं हैं। उन्हें कबीर चौरा परिसर में लगने वाले परंपरागत खिचड़ी मेले से रोजी-रोटी का जुगाड़ हो जाता है। उनके बच्चों के लिए रोटी का कुछ इंतजाम कबीर साहेब की कृपा से होता रहा है और होता रहेगा।