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Sant Kabir Nagar News: पूनम यादव ने भी पति वीरेंद्र यादव की लंबी आयु के लिए व्रत रखा था
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महुली। करवाचौथ का दिन हर सुहागिन के लिए पति की लंबी उम्र की कामना का पर्व है। पूनम यादव ने भी पति वीरेंद्र यादव की लंबी आयु के लिए व्रत रखा था। उसे इंतजार था कि पति घर लौटेंगे और अपने हाथों से पानी पिलाकर व्रत तुड़वाएंगे लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। रात करीब दस बजे पति की मौत की खबर सुनते ही पूनम की दुनिया उजड़ गई। जिस घर में करवाचौथ की खुशियां मनाने की तैयारी चल रही थी, वहां चीख-पुकार मच गई।
हरिहरपुर निवासी वीरेंद्र यादव पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाले वीरेंद्र की असमय मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सबसे ज्यादा दुखद स्थिति उसकी पत्नी पूनम की है, जिसने पति की लंबी उम्र के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखा। उसे क्या पता था कि जिस पति के लौटने का इंतजार कर रही है, वह अब कभी घर नहीं आएगा।
वीरेंद्र अपने पीछे तीन और एक वर्ष के दो बच्चों को छोड़ गए हैं। अभी दोनों बच्चों को पिता के स्नेह और संरक्षण की जरूरत थी लेकिन हादसे ने उनके सिर से पिता का साया छीन लिया। मासूम बच्चों को अभी यह भी एहसास नहीं है कि उनके जीवन में कितना बड़ा खालीपन आ गया है। वहीं पूनम के सामने अब दो छोटे बच्चों की परवरिश और परिवार की जिम्मेदारियों का कठिन सवाल खड़ा हो गया है।
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वीरेंद्र की मौत की खबर मिलते ही हरिहरपुर नगर पंचायत में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन और परिचितों के अनुसार वह हंसमुख और मिलनसार स्वभाव का था। उसकी असमय मौत से हर कोई स्तब्ध है। करवाचौथ के दिन जिस घर में पति की सलामती की दुआ मांगी जा रही थीं, वहां अब पत्नी का विलाप और दो मासूम बच्चों का भविष्य हर किसी की आंखें नम कर रहा है।
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हरिहरपुर निवासी वीरेंद्र यादव पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाले वीरेंद्र की असमय मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सबसे ज्यादा दुखद स्थिति उसकी पत्नी पूनम की है, जिसने पति की लंबी उम्र के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखा। उसे क्या पता था कि जिस पति के लौटने का इंतजार कर रही है, वह अब कभी घर नहीं आएगा।
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वीरेंद्र अपने पीछे तीन और एक वर्ष के दो बच्चों को छोड़ गए हैं। अभी दोनों बच्चों को पिता के स्नेह और संरक्षण की जरूरत थी लेकिन हादसे ने उनके सिर से पिता का साया छीन लिया। मासूम बच्चों को अभी यह भी एहसास नहीं है कि उनके जीवन में कितना बड़ा खालीपन आ गया है। वहीं पूनम के सामने अब दो छोटे बच्चों की परवरिश और परिवार की जिम्मेदारियों का कठिन सवाल खड़ा हो गया है।
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वीरेंद्र की मौत की खबर मिलते ही हरिहरपुर नगर पंचायत में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन और परिचितों के अनुसार वह हंसमुख और मिलनसार स्वभाव का था। उसकी असमय मौत से हर कोई स्तब्ध है। करवाचौथ के दिन जिस घर में पति की सलामती की दुआ मांगी जा रही थीं, वहां अब पत्नी का विलाप और दो मासूम बच्चों का भविष्य हर किसी की आंखें नम कर रहा है।