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Sant Kabir Nagar News: जिलाधिकारी के आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट में दायर याचिका खारिज

Sun, 05 Jul 2026 12:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jul 2026 12:21 AM IST
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Petition filed in High Court against District Magistrate's order dismissed.
मगहर। कस्बा निवासी अभिमन्यु प्रसाद और उनके परिवार के अनुसूचित जाति के प्रमाणपत्र को जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा 11 फरवरी को निरस्त कर दिया गया। इस आदेश के खिलाफ रामेश्वर प्रसाद, अभिमन्यु प्रसाद हाईकोर्ट पहुंचे थे। याचिकाकर्ताओं की याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की पीठ ने सुनवाई करते हुए खारिज कर दी।
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इससे फर्जी दलित उत्पीड़न मामले में फंसे लोगों को बड़ी राहत मिली है। गौरतलब हो कि नगर पंचायत मगहर के रानी बाजार, तकिया बाजार निवासी अभिमन्यु प्रसाद पुत्र रामेश्वर प्रसाद ने तथ्यों को छिपाकर तुरैहा एससी जाति का प्रमाणपत्र बनवाया था। इसके बाद भाजपा नेत्री व नगर पंचायत मगहर की पूर्व चेयरमैन संगीता वर्मा, ठेकेदार शैलेश श्रीवास्तव और उमेश चंद्र श्रीवास्तव के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई। वहीं एक इंटर काॅलेज के प्रधानाचार्य, एक अधिवक्ता कुलदीप मिश्र व एक जांचकर्ता हेड कांस्टेबल के खिलाफ भी एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई।
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इसके खिलाफ मगहर निवासी अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंगल प्रसाद वर्मा, ठेकेदार उमेश चंद्र श्रीवास्तव और अधिवक्ता कुलदीप मिश्र ने साक्ष्यों के साथ जिलाधिकारी से शिकायत की। डीएम की उच्च स्तरीय समिति जिसमें तत्कालीन एडीएम जय प्रकाश, एसडीएम खलीलाबाद और जिला समाज कल्याण अधिकारी शामिल थे। समिति ने जांच में पाया कि राजस्व रिकॉर्ड, स्कूल की टीसी और अनुसूचित जाति एवं जनजाति शोध प्रशिक्षण संस्थान, लखनऊ की रिपोर्ट के मुताबिक यह परिवार सामान्य श्रेणी की तुरहा जाति का है।
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इस खुलासे और प्रमाणपत्र निरस्तीकरण के डीएम के आदेश को रामेश्वर प्रसाद, उनके पुत्र अभिमन्यु प्रसाद ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसे उच्च न्यायालय ने वैकल्पिक वैधानिक उपचार मंडल स्तरीय स्क्रूटनी समिति के समक्ष अपील के आधार पर खारिज कर दिया है। संवाद
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