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Sant Kabir Nagar News: बारिश न होने से खैरा रोग की चपेट में धान की फसल
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संतकबीरनगर। बारिश न होने और तेज धूप के चलते धान की फसलों में खैरा रोग तेजी से फैल रहा है। परेशान किसान पंपसेट से खेतों में पानी चला रहे हैं। साथ ही खैरा रोग की रोकथाम के लिए किसान खेतों में दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं।
किसान हनुमान पटेल, अशोक कुमार, रघुपति यादव ने बताया कि बारिश न होने से खेतों में खैरा रोग का प्रकोप बढ़ा है। खेत में नमी न होने और तेज धूप के कारण खेतों में यह बीमारी फैल रही है। उन्होंने बताया कि खैरा बीमारी से धान की फसल का विकास रुक जा रहा है और पत्तियां लाल रंग की होकर पौधे के तने तक नुकसान पहुंचा रही हैं। इससे पैदावार काफी कम होने की संभावना है। एक सप्ताह से अधिक का समय बीत गया, लेकिन बारिश नहीं हुई। तेज धूप होने के नाते धान के खेत की नमी भी सूख गई। अब फसलों में खैरा रोग तेजी से फैलने लगा। किसानों का कहना है कि पंपसेट से पानी चलाना काफी महंगा पड़ रहा है। डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। कर्ज लेकर खेत में खाद और बीज की व्यवस्था की, अब खेत में पानी चलाना काफी मुश्किल हो रहा है।
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खेत में जिंक सल्फेट की कमी और मौसम में अचानक बदलाव व तेज धूप के कारण धान की फसलों में खैरा रोग का प्रकोप बढ़ा है। किसान खेत में नमी बनाए रखें और जिंक सल्फेट का छिड़काव करें।
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-डॉ. एके सिंह, कृषि वैज्ञानिक
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किसान हनुमान पटेल, अशोक कुमार, रघुपति यादव ने बताया कि बारिश न होने से खेतों में खैरा रोग का प्रकोप बढ़ा है। खेत में नमी न होने और तेज धूप के कारण खेतों में यह बीमारी फैल रही है। उन्होंने बताया कि खैरा बीमारी से धान की फसल का विकास रुक जा रहा है और पत्तियां लाल रंग की होकर पौधे के तने तक नुकसान पहुंचा रही हैं। इससे पैदावार काफी कम होने की संभावना है। एक सप्ताह से अधिक का समय बीत गया, लेकिन बारिश नहीं हुई। तेज धूप होने के नाते धान के खेत की नमी भी सूख गई। अब फसलों में खैरा रोग तेजी से फैलने लगा। किसानों का कहना है कि पंपसेट से पानी चलाना काफी महंगा पड़ रहा है। डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। कर्ज लेकर खेत में खाद और बीज की व्यवस्था की, अब खेत में पानी चलाना काफी मुश्किल हो रहा है।
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खेत में जिंक सल्फेट की कमी और मौसम में अचानक बदलाव व तेज धूप के कारण धान की फसलों में खैरा रोग का प्रकोप बढ़ा है। किसान खेत में नमी बनाए रखें और जिंक सल्फेट का छिड़काव करें।
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-डॉ. एके सिंह, कृषि वैज्ञानिक