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Sant Kabir Nagar News: कंडवा रोग से प्रभावित हुई धान की फसल

Fri, 30 Oct 2026 12:36 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 30 Oct 2026 12:36 AM IST
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Paddy crop affected by false smut disease
धान की फसल में लगा कड़़वा रोग-संवाद
हरिहरपुर। क्षेत्र में धान की फसल कंडवा रोग से प्रभावित है। इससे किसान चिंतित हैं। करीब हर साल देर से पक कर तैयार होने वाली कुछ धान की किस्मों में यह रोग अब आम हो गया है। किसानों का कहना है कि कंडवा रोग से धान की गुणवत्ता के साथ उपज भी प्रभावित होती है।
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नाथनगर, हरिहरपुर और महुली क्षेत्र में धान की फसल में कंडवा रोग का प्रकोप है। फसल में कंडवा रोग लगने से किसान पैदावार को लेकर चिंतित हैं। किसान अंगद चौधरी, अशोक चौधरी, विनोद कुमार ने बताया कि धान की फसलें हर साल कंडवा रोग की चपेट में आ जाती हैं।
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धान में कंडवा रोग लगने से पैदावार कम होने के साथ ही कटाई और मड़ाई भी मुश्किल हो जाती है। कंडवा रोग की चपेट में आई फसलों की कटाई के समय उससे काले और पीले रंग का पाउडर जैसा अपशिष्ट निकलता है जो हवा के साथ कटाई और मड़ाई कर रहे मजदूरों के श्वसन तंत्र के जरिये शरीर के अंदर जाकर संक्रमण का कारण भी बनता है।
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क्या है कंडवा रोग

हरिहरपुर। धान की बालियों में लगने वाला कंडवा (हल्दी रोग) रोग एक विशेष प्रकार के आस्टिलागिनोइडी विरेंस नामक फंगस से होता है। यह फंगस बालियां निकलने और फूल लगने के समय काफी सक्रिय होता है। फंगस के प्रकोप से धान की बालियों के ऊपर काले और पीले रंग का गोल-गोल आवरण चढ़ जाता है जिसे तोड़कर मसलने से पीले रंग का पाउडर की तरह अपशिष्ट निकलता है। मिट्टी में पहले से मौजूद यह फंगस पानी और हवा के जरिये बालियों तक पहुंचता है। कंडवा रोग से धान की बालियां काली पड़ जाती हैं जिससे उपज के साथ ही गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। संवाद

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बचाव के लिए क्या करें
हरिहरपुर। इजराइली संस्था से प्रशिक्षण प्राप्त किसान हनुमान पटेल ने बताया कि प्रायः देर से पककर तैयार होने वाली कुछ धान की किस्में ही कंडवा रोग की चपेट में आती हैं। खेत में जिंक की कमी भी कंडवा रोग फैलने का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि सांभा, मंसूरी, मोती जैसी धान की किस्में इस रोग से अधिक प्रभावित होती हैं। बताया कि धान की बालियां निकलने के बाद खेत की सिंचाई न करें और यदि खेत में पानी भरा हो तो उसे निकाल दें। बालियों में फूल आने के दौरान खेत में जरूरत से ज्यादा नमी होने पर फसल आसानी से रोग की चपेट में आ जाती है। उन्होंने बताया कि बालियां निकलते समय धान की फसल में कीटनाशक के साथ ही फंगीसाइड जैसे कार्बेन्डाजिम, प्रोपिकोनाजोल, कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करने से भी रोग पर नियंत्रण मिल सकता है। संवाद
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