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178 गांवों के पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक
वीरेंद्र यादव/sant kabir nagar
Updated Wed, 14 Sep 2016 11:42 PM IST
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इंसेफेलाइटिस का दंश झेल रहे पूर्वांचल में एक ओर मौतों का सिलसिला नहीं थम रहा है, दूसरी ओर इंसेफेलाइटिस प्रभावित संतकबीरनगर जिले के 178 गांवों के पानी में निर्धारित मात्रा से अधिक आर्सेनिक पाए जाने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। कारण कि उबला पानी पीने से भी इस समस्या से निजात नहीं मिलेगी।
जनपद के लोगों को शु्द्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए जल निगम ने 26768 इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए हैं। इसमें से अधिकांश को सौ फुट तक ही बोर किया गया है। जबकि लोगों के घरों में छोटे हैंडपंप भी लगे हैं, जिसका पानी लोग पी रहे हैं। जल निगम के जिम्मेदार लोगों का मानना है कि छोटे हैंडपंपों का पानी पूरी तरह से प्रदूषित है। ऐसे में विभिन्न क्षेत्रों में छोटे हैंडपंपों के पानी को पीने योग्य न बताते हुए क्रॉस के निशान बनाए जा रहे हैं, जबकि जहां पर इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं, वहां भी इन हैंडपंपों से दूषित पानी निकल रहा है। हाल यह है कि जिले के विभिन्न ब्लाकों के 178 गांवों का पानी जहरीला हो गया है।
सबसे खराब स्थिति खलीलाबाद ब्लाक क्षेत्र की है, यहां के 60 गांवों का पानी जहरीला हो गया है। इसके बाद भी लोग इन्हीं हैंडपंपों का पानी पीने को मजबूर हैं। विभाग के मुताबिक एक लीटर पानी में आर्सेनिक की मात्रा 0.01 से 0.05 मिलीग्राम मिल रही है। जबकि पीने योग्य पानी में आर्सेनिक की मात्रा प्रति लीटर 0.01 मिलीग्राम से कम होनी चाहिए। ऐसे जल को ही पीने लायक माना जाता है।
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अधिशाषी अभियंता जल निगम डीके गुप्ता ने बताया कि जिन गांवों के पानी में आर्सेनिक मिल रहा है, वहां ओवरहैड टैंक के माध्यम से पानी की आपूर्ति का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव तैयार कर शासन को जल्द ही भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही इन गांवों में काम शुरू करा दिया जाएगा। नए प्रस्ताव की स्वीकृति मिलने के बाद भी परियोजना को पूर्ण कराने में ढाई से तीन साल का वक्त लगता है। वैसे आर्सेनिक प्रभावित कई गांवों में पहले से ही काम चल रहा है। पूर्व में 44 परियोजनाओं की स्वीकृति मिली थी, जिसमें से अधिकतर पूर्ण हो गए हैं। फिर भी जो गांव प्रभावित हैं, उनमें अधिकतर गांवों में सेकेंड स्टेटा का इंडिया मार्का हैंडपंप लगवाएं गए हैं। सिर्फ इन्हीं हैंडपंपों का ही पानी पीएं।
वहीं सीएचसी खलीलाबाद के अधीक्षक डॉ. रतनलाल ने बताया कि जिले में जल जनित बीमारियां पांव पसार रही हैं। ऐसे में लोगों को स्वच्छ पानी का प्रयोग करना चाहिए। प्रदूषित पानी पीने से त्वचा रोग के साथ ही डायरिया, इंसेफेलाइटिस आदि का खतरा बना रहता है। इसके लिए जरूरी है कि लोग अपने हैंडपंपों को तत्काल ठीक कराएं। आर्सेनिक प्रभावित पानी उबालकर पीने से भी कोई फायदा नहीं होता, क्योंकि पानी उबालने से सिर्फ बैक्टीरिया मरता है।
डीएम डॉ. सरोज कुमार ने बताया कि वैसे तो आर्सेनिक का प्रभाव धीरे-धीरे होता है। इसमें सालों लग जाते हैं। लेकिन जिले में पानी में आर्सेनिक की मात्रा मानक से अधिक मिलना चिंता की बात है। पूर्व एक्सईएन जल निगम ने उन्हें सूची दी थी। इसमें आर्सेनिक प्रभावित गांवों की संख्या कुछ ज्यादा लगी। ऐसे में चेक करवाकर वाटर सप्लाई के लिए शासन को प्रस्ताव भिजवाएंगे। आर्सेनिक प्रभावित गांवों में वाटर सप्लाई ही एक मात्र विकल्प है। इसके लिए चरणबद्ध रूप से प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने पर नुकसान : पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने से शरीर पर लाल दाने और चकत्ता बन जाता हैं जो धीरे-धीरे बढ़ता रहता है। इसके साथ त्वचा कैंसर, डायरिया, पेट संबंधी बीमारियाें की समस्या तेजी से बढ़ती है।
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जनपद के लोगों को शु्द्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए जल निगम ने 26768 इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए हैं। इसमें से अधिकांश को सौ फुट तक ही बोर किया गया है। जबकि लोगों के घरों में छोटे हैंडपंप भी लगे हैं, जिसका पानी लोग पी रहे हैं। जल निगम के जिम्मेदार लोगों का मानना है कि छोटे हैंडपंपों का पानी पूरी तरह से प्रदूषित है। ऐसे में विभिन्न क्षेत्रों में छोटे हैंडपंपों के पानी को पीने योग्य न बताते हुए क्रॉस के निशान बनाए जा रहे हैं, जबकि जहां पर इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं, वहां भी इन हैंडपंपों से दूषित पानी निकल रहा है। हाल यह है कि जिले के विभिन्न ब्लाकों के 178 गांवों का पानी जहरीला हो गया है।
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सबसे खराब स्थिति खलीलाबाद ब्लाक क्षेत्र की है, यहां के 60 गांवों का पानी जहरीला हो गया है। इसके बाद भी लोग इन्हीं हैंडपंपों का पानी पीने को मजबूर हैं। विभाग के मुताबिक एक लीटर पानी में आर्सेनिक की मात्रा 0.01 से 0.05 मिलीग्राम मिल रही है। जबकि पीने योग्य पानी में आर्सेनिक की मात्रा प्रति लीटर 0.01 मिलीग्राम से कम होनी चाहिए। ऐसे जल को ही पीने लायक माना जाता है।
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अधिशाषी अभियंता जल निगम डीके गुप्ता ने बताया कि जिन गांवों के पानी में आर्सेनिक मिल रहा है, वहां ओवरहैड टैंक के माध्यम से पानी की आपूर्ति का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव तैयार कर शासन को जल्द ही भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही इन गांवों में काम शुरू करा दिया जाएगा। नए प्रस्ताव की स्वीकृति मिलने के बाद भी परियोजना को पूर्ण कराने में ढाई से तीन साल का वक्त लगता है। वैसे आर्सेनिक प्रभावित कई गांवों में पहले से ही काम चल रहा है। पूर्व में 44 परियोजनाओं की स्वीकृति मिली थी, जिसमें से अधिकतर पूर्ण हो गए हैं। फिर भी जो गांव प्रभावित हैं, उनमें अधिकतर गांवों में सेकेंड स्टेटा का इंडिया मार्का हैंडपंप लगवाएं गए हैं। सिर्फ इन्हीं हैंडपंपों का ही पानी पीएं।
वहीं सीएचसी खलीलाबाद के अधीक्षक डॉ. रतनलाल ने बताया कि जिले में जल जनित बीमारियां पांव पसार रही हैं। ऐसे में लोगों को स्वच्छ पानी का प्रयोग करना चाहिए। प्रदूषित पानी पीने से त्वचा रोग के साथ ही डायरिया, इंसेफेलाइटिस आदि का खतरा बना रहता है। इसके लिए जरूरी है कि लोग अपने हैंडपंपों को तत्काल ठीक कराएं। आर्सेनिक प्रभावित पानी उबालकर पीने से भी कोई फायदा नहीं होता, क्योंकि पानी उबालने से सिर्फ बैक्टीरिया मरता है।
डीएम डॉ. सरोज कुमार ने बताया कि वैसे तो आर्सेनिक का प्रभाव धीरे-धीरे होता है। इसमें सालों लग जाते हैं। लेकिन जिले में पानी में आर्सेनिक की मात्रा मानक से अधिक मिलना चिंता की बात है। पूर्व एक्सईएन जल निगम ने उन्हें सूची दी थी। इसमें आर्सेनिक प्रभावित गांवों की संख्या कुछ ज्यादा लगी। ऐसे में चेक करवाकर वाटर सप्लाई के लिए शासन को प्रस्ताव भिजवाएंगे। आर्सेनिक प्रभावित गांवों में वाटर सप्लाई ही एक मात्र विकल्प है। इसके लिए चरणबद्ध रूप से प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने पर नुकसान : पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने से शरीर पर लाल दाने और चकत्ता बन जाता हैं जो धीरे-धीरे बढ़ता रहता है। इसके साथ त्वचा कैंसर, डायरिया, पेट संबंधी बीमारियाें की समस्या तेजी से बढ़ती है।