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Sant Kabir Nagar News: शहर की हवा में जहर घोल रहे एक लाख वाहन
Sun, 07 Jul 2024 12:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 07 Jul 2024 12:32 AM IST
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- वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र की अवधि खत्म
- वाहनों से निकलने वाले धुएं से प्रदूषण की समस्या बनी
- जनपद में दो लाख 70 हजार वाहनों पंजीकृत
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। जिले की सड़कों पर एक लाख से अधिक ऐसे वाहन चल रहे हैं, जिनकी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) की अवधि खत्म हो चुकी है। यह वाहन कबीर नगरी की हवा को जहरीला बना रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस और परिवहन विभाग सख्ती नहीं कर रहा है।
परिवहन विभाग कार्यालय के मुताबिक जिले में दो लाख 70 हजार वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से एक लाख पांच हजार वाहनों का पीयूसी समाप्त हो चुका है। यह वाहन बिना पीयूसी के बेखाैफ दौड़ रहे हैं। इन वाहनों के पीयूसी की अवधि समाप्त हो चुकी है, जबकि बिना प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के वाहनों को चलाने की अनुमति नहीं है।
परिवहन विभाग की ओर से माह में कभी-कभी बिना पीयूसी के वाहनों के चालान किए जाते हैं। पिछले तीन माह के भीतर परिवहन और पुलिस विभाग ने करीब 350 वाहनों का चालान प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र न होने पर किया है।
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ऐसे होती है प्रदूषण की जांच
प्रदूषण जांच केंद्र पर कंप्यूटर से जुड़ा एक गैर एनालाइजर होता है। वाहन स्टार्ट करने के बाद गैस एनालाइजर को साइलेंसर में लगाया जाता है। वाहन से निकलने वाली गैस के आंकड़े कंप्यूटर में दर्ज हो जाते हैं। एक बार आंकड़े दर्ज होने के बाद अगर तय दायरे में वाहन से प्रदूषण हो रहा है, तो पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। वहीं पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के वाहनों के लिए प्रदूषण का दायरा अलग होता है। पीयूसी एक साल के लिए मान्य होता है।
55 से 105 रुपये तक है पीयूसी की फीस
परिवहन विभाग के मुताबिक दो पहिया वाहनों के प्रदूषण की जांच कराने के लिए 55 रुपये, तीन और चार पहिया वाहनों के लिए 75 रुपये फीस है। वहीं व्यवसायिक वाहनों के लिए 105 रुपये है।
पीयूसी नहीं तो 10 हजार जुर्माना
परिवहन विभाग के मुताबिक किसी भी वाहन को चलाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) रखना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यदि आपके पास पीयूसी नहीं है तो 10 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा।
वाहनों के धुएं से निकलने वाली गैस
वाहनों के धुएं से कार्बन डाईऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी घातक गैस निकलती हैं। यह गैस कंडम वाहनों से अधिक मात्रा में निकलती है। जिले के 40 हजार वाहन 15 वर्ष से अधिक आयु पूरी कर चुके हैं।
प्रदूषण से बीमारियों का खतरा
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एपी मिश्र ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण कई प्रकार की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। सांस, ह्दय व त्वचा संबंधी रोगों से लेकर कैंसर तक के जोखिम शामिल हैं। प्रदूषण के कारण बच्चों में निमोनिया तो बड़ों में क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीस (सीओपीडी) के कई मामले सामने आते हैं। इससे बचना चाहिए।
ध्वनि और वायु प्रदूषण पर अक्सर चालान किया जाता है। विभाग की ओर से समय-समय पर वाहनों की चेकिंग होती है और प्रदूषण की जांच की जाती है। अब अभियान भी चलाया जाएगा और वाहनों पर जुर्माना भी लगेगा।
- प्रियंबदा सिंह, एआरटीओ
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- वाहनों से निकलने वाले धुएं से प्रदूषण की समस्या बनी
- जनपद में दो लाख 70 हजार वाहनों पंजीकृत
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। जिले की सड़कों पर एक लाख से अधिक ऐसे वाहन चल रहे हैं, जिनकी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) की अवधि खत्म हो चुकी है। यह वाहन कबीर नगरी की हवा को जहरीला बना रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस और परिवहन विभाग सख्ती नहीं कर रहा है।
परिवहन विभाग कार्यालय के मुताबिक जिले में दो लाख 70 हजार वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से एक लाख पांच हजार वाहनों का पीयूसी समाप्त हो चुका है। यह वाहन बिना पीयूसी के बेखाैफ दौड़ रहे हैं। इन वाहनों के पीयूसी की अवधि समाप्त हो चुकी है, जबकि बिना प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के वाहनों को चलाने की अनुमति नहीं है।
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परिवहन विभाग की ओर से माह में कभी-कभी बिना पीयूसी के वाहनों के चालान किए जाते हैं। पिछले तीन माह के भीतर परिवहन और पुलिस विभाग ने करीब 350 वाहनों का चालान प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र न होने पर किया है।
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ऐसे होती है प्रदूषण की जांच
प्रदूषण जांच केंद्र पर कंप्यूटर से जुड़ा एक गैर एनालाइजर होता है। वाहन स्टार्ट करने के बाद गैस एनालाइजर को साइलेंसर में लगाया जाता है। वाहन से निकलने वाली गैस के आंकड़े कंप्यूटर में दर्ज हो जाते हैं। एक बार आंकड़े दर्ज होने के बाद अगर तय दायरे में वाहन से प्रदूषण हो रहा है, तो पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। वहीं पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के वाहनों के लिए प्रदूषण का दायरा अलग होता है। पीयूसी एक साल के लिए मान्य होता है।
55 से 105 रुपये तक है पीयूसी की फीस
परिवहन विभाग के मुताबिक दो पहिया वाहनों के प्रदूषण की जांच कराने के लिए 55 रुपये, तीन और चार पहिया वाहनों के लिए 75 रुपये फीस है। वहीं व्यवसायिक वाहनों के लिए 105 रुपये है।
पीयूसी नहीं तो 10 हजार जुर्माना
परिवहन विभाग के मुताबिक किसी भी वाहन को चलाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) रखना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यदि आपके पास पीयूसी नहीं है तो 10 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा।
वाहनों के धुएं से निकलने वाली गैस
वाहनों के धुएं से कार्बन डाईऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी घातक गैस निकलती हैं। यह गैस कंडम वाहनों से अधिक मात्रा में निकलती है। जिले के 40 हजार वाहन 15 वर्ष से अधिक आयु पूरी कर चुके हैं।
प्रदूषण से बीमारियों का खतरा
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एपी मिश्र ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण कई प्रकार की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। सांस, ह्दय व त्वचा संबंधी रोगों से लेकर कैंसर तक के जोखिम शामिल हैं। प्रदूषण के कारण बच्चों में निमोनिया तो बड़ों में क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीस (सीओपीडी) के कई मामले सामने आते हैं। इससे बचना चाहिए।
ध्वनि और वायु प्रदूषण पर अक्सर चालान किया जाता है। विभाग की ओर से समय-समय पर वाहनों की चेकिंग होती है और प्रदूषण की जांच की जाती है। अब अभियान भी चलाया जाएगा और वाहनों पर जुर्माना भी लगेगा।
- प्रियंबदा सिंह, एआरटीओ