स्थानीय विकास खंड में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना का बुरा हाल हैं। हालात यह है आज तब बिजली की सुविधा से महरूम गांवों में पोल तो खड़े कर दिए। इससे बिजली की आस जगी थी पर विभागीय उदासीनता ने ग्रामीणों के अरमान पर पानी फेर गया। पोल खड़े हुए पर तार खींचने की कवायद दो वर्षों में नही पूरा हो पाया। जनप्रतिनिधि भी इस समस्या से अवगत हैं पर अधूरे विद्युतीकरण पर वह भी चुप्पी साधे हुए हैं। इसको लेकर लोगों में रोष व्याप्त हैं। मेंहदावल विकास खंड में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत बिजली से वंचित गांव और टोलों को जोड़ने की योजना जमीनी हकीकत में मात्र कागजी खानापूर्ति साबित हो रही हैं। ग्राम पंचायत ढोढ के नहुनी गुरची होते बेलौली के यादव पुरवा तक सैकड़ों परिवारों के बिजली की आस आज तक नही पूरे हो पाई। जबकि ढोढ से लेकर नहुनी गांव तक सड़क के किनारे राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत पोल दो वर्ष से अधिक समय से खड़े हैं। पर अब तक इन पोलों पर तार बिछाने का कार्य नही हो पाया हैं। इसी तरह ग्राम पंचायत बीमापार में आठ माह से विद्युत पोल विभागीय ठेकेदार द्वारा खडे़ कर दिए गए हैं लेकिन अब तक इन पोलों पर तार दौड़ाने की कवायद नही शुरू हो पायी। क्षेत्रीय ग्रामीण रामप्रकाश मिश्र, मुहम्मद अली, पल्टू, दीपचन्द्र, लोरिक, सिकंदर, बैजनाथ, रामसुभग, नरेश, साबिर अली, जुम्मन, बेचन आदि लोगों का कहना हैं कि जब पोल खड़े हो रहे थें तब लोगों में यह आस जगी थी कि जल्दी ही लालटेन युग से मुक्ति मिलेगी और बिजली से घर रोशन होंगे पर खड़े पोल ग्रामीणों की आस पर जहां पानी फेर रहें हैं वही विधानसभा चुनाव के दौरान इन पोलों को देखने वाले नेता भी चुनाव बीतने के बाद इस दिशा में कोई पहल नहीं कर रहे, जिसके कारण आज तक यह पोल बिना तार के क्षेत्रीय लोगों के लिए हाथी के दांत साबित हो रहें हैं। इस संबंध में अधिशाषी अभियंता संजय कुमार सिंह ने कहा कि जल्द ही तार लगा दिए जाएंगे और इन गांवों में बिजली की रोशनी पहुंचा दी जाएगी।