{"_id":"66ce3873871b1bfc9d04c8e4","slug":"no-relief-from-saryu-floodpeople-worried-about-erosion-khalilabad-news-c-209-1-sgkp1039-119840-2024-08-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: सरयू की बाढ़ से राहत नहीं... कटान से लोग चिंतित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: सरयू की बाढ़ से राहत नहीं... कटान से लोग चिंतित
Wed, 28 Aug 2024 02:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 28 Aug 2024 02:04 AM IST
विज्ञापन
-धनघटा तहसील में बाढ़ से घिरे मांझा क्षेत्र के 14 गांवों को अभी राहत नही
- पौली ब्लाक क्षेत्र में कटान से नदी में विलीन हो रही उपजाऊ जमीनें
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। तहसील क्षेत्र में पिछले दो दिन से सरयू नदी का जलस्तर स्थिर है। इसके बावजूद बाढ़ से घिरे मांझा क्षेत्र 14 गांवों की राहत नहीं मिली है। बाहर निकलने के लिए ग्रामीण नाव का सहारा ले रहे हैं। पीड़ित परिवारों में सहायता अब तक नही पहुंच सकी है। वहीं दूसरी तरफ पौली ब्लाॅक के छपरा मगर्वी व मदरहा में नदी की कटान ने उपजाऊ जमीनें नदी में समा रही है। पिछले एक सप्ताह से जारी कटान में अब तक सौ बीघे उपजाऊ जमीन नदी की धारा में विलीन हो चुकी है।
नदी का जलस्तर मंगलवार की शाम 79.00 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान से 40 सेमी नीचे है। मांझा क्षेत्र बाढ़ की तबाही झेल रहा है। एक दर्जन गांवों में नाॅवे लगाई जा चुकी है। बाढ़ से घिरे गांव में ग्रामीण अपने आने घरों पर ही निवास कर रहे है। हैंसर क्षेत्र के गायघाट दक्षिणी, ढोलबजा, सियर कला, कंचनपुर, कटहा, भवुआपार, चकदहा, सियाराम अधीन, सुअरहा, गुनवतिया आदि गांव बाढ़ से चौतरफा घिरे हुए हैं। संपर्क मार्ग पानी में डूबे हैं। गायघाट निवासी अशोक, संजय, विनोद, मनोज, बृंदावन, किशन, लालमती देवी, अमृता, फूलबदन आदि ने बताया कि सबसे अधिक समस्या ईंधन को लेकर है। ईंधन न होने से भोजन बनाने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। गांव में चिकित्सा टीम भी नही पहुंची।
नदी की कटान हुई विकराल
मांझा क्षेत्र के 14 गांव जहां बाढ़ विभीषिका का सामना कर रहे है तो वही पौली क्षेत्र के छपरा मगर्वी व मदरहा गांव के सिवान नदी की कटान उपजाऊ जमीनों पर कहर बरपा रही है। दोनों गांवों में हो रही कटान अब तक सौ बीघे से अधिक कृषि योग्य जमीनें नदी में विलीन हो चुकी है। मदरहा निवासी केशव, चंद्रिका, हेमंत कुमार, रजनीश, रामधारी, अशोक कुमार ने बताया कि नदी की कटान से खेती का रकबा लगातार घटता जा रहा है। जमीन नही बचेगी तो किसान खेती का कार्य नही कर सकेंगे।
विज्ञापन
तटबंध पर बने रेन कट व होल बाढ़ सुरक्षा के लिए चुनौती
धनघटा तहसील क्षेत्र में सरयू का जलस्तर बढ़ने से जहां एक दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में है वही नदी का दबाव झेल रहे जर्जर तटबंध भी बाढ़ सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं। बाढ़ के सीजन में 32 किलोमीटर लंबे एमबीडी तटबंध अनेक स्थानों पर रेन कट व होल से कमजोर बने हुए हैं। ऐसे में तटबंध टूटने की संभावना को लेकर निकटवर्ती ग्रामीण सहमे हुए है।
बाढ़ से प्रभावित गांवों पर नजर रखी जा रही है। कहा कि दवाओं आदि का छिड़काव कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया जा रहा है। साथ ही बंधे की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। नॉवें लगा दी गई है।
- रमेश चंद्र, एसडीएम धनघटा
विज्ञापन
- पौली ब्लाक क्षेत्र में कटान से नदी में विलीन हो रही उपजाऊ जमीनें
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। तहसील क्षेत्र में पिछले दो दिन से सरयू नदी का जलस्तर स्थिर है। इसके बावजूद बाढ़ से घिरे मांझा क्षेत्र 14 गांवों की राहत नहीं मिली है। बाहर निकलने के लिए ग्रामीण नाव का सहारा ले रहे हैं। पीड़ित परिवारों में सहायता अब तक नही पहुंच सकी है। वहीं दूसरी तरफ पौली ब्लाॅक के छपरा मगर्वी व मदरहा में नदी की कटान ने उपजाऊ जमीनें नदी में समा रही है। पिछले एक सप्ताह से जारी कटान में अब तक सौ बीघे उपजाऊ जमीन नदी की धारा में विलीन हो चुकी है।
नदी का जलस्तर मंगलवार की शाम 79.00 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान से 40 सेमी नीचे है। मांझा क्षेत्र बाढ़ की तबाही झेल रहा है। एक दर्जन गांवों में नाॅवे लगाई जा चुकी है। बाढ़ से घिरे गांव में ग्रामीण अपने आने घरों पर ही निवास कर रहे है। हैंसर क्षेत्र के गायघाट दक्षिणी, ढोलबजा, सियर कला, कंचनपुर, कटहा, भवुआपार, चकदहा, सियाराम अधीन, सुअरहा, गुनवतिया आदि गांव बाढ़ से चौतरफा घिरे हुए हैं। संपर्क मार्ग पानी में डूबे हैं। गायघाट निवासी अशोक, संजय, विनोद, मनोज, बृंदावन, किशन, लालमती देवी, अमृता, फूलबदन आदि ने बताया कि सबसे अधिक समस्या ईंधन को लेकर है। ईंधन न होने से भोजन बनाने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। गांव में चिकित्सा टीम भी नही पहुंची।
विज्ञापन
नदी की कटान हुई विकराल
मांझा क्षेत्र के 14 गांव जहां बाढ़ विभीषिका का सामना कर रहे है तो वही पौली क्षेत्र के छपरा मगर्वी व मदरहा गांव के सिवान नदी की कटान उपजाऊ जमीनों पर कहर बरपा रही है। दोनों गांवों में हो रही कटान अब तक सौ बीघे से अधिक कृषि योग्य जमीनें नदी में विलीन हो चुकी है। मदरहा निवासी केशव, चंद्रिका, हेमंत कुमार, रजनीश, रामधारी, अशोक कुमार ने बताया कि नदी की कटान से खेती का रकबा लगातार घटता जा रहा है। जमीन नही बचेगी तो किसान खेती का कार्य नही कर सकेंगे।
विज्ञापन
तटबंध पर बने रेन कट व होल बाढ़ सुरक्षा के लिए चुनौती
धनघटा तहसील क्षेत्र में सरयू का जलस्तर बढ़ने से जहां एक दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में है वही नदी का दबाव झेल रहे जर्जर तटबंध भी बाढ़ सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं। बाढ़ के सीजन में 32 किलोमीटर लंबे एमबीडी तटबंध अनेक स्थानों पर रेन कट व होल से कमजोर बने हुए हैं। ऐसे में तटबंध टूटने की संभावना को लेकर निकटवर्ती ग्रामीण सहमे हुए है।
बाढ़ से प्रभावित गांवों पर नजर रखी जा रही है। कहा कि दवाओं आदि का छिड़काव कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया जा रहा है। साथ ही बंधे की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। नॉवें लगा दी गई है।
- रमेश चंद्र, एसडीएम धनघटा