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गो संरक्षण केंद्र में दलदल, फंस रहे पशु

Sun, 03 Oct 2021 11:21 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 03 Oct 2021 11:21 PM IST
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mud in go sarankshan center
मेंहदावल विकास खंड के पशु आश्रय खैरहवा में बाहर बैठे पशु।संवाद - फोटो : KHALILABAD
गो संरक्षण केंद्र में दलदल, फंस रहे पशु
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जगह 200 पशुओं की और संरक्षित किए गए 290
पर्याप्त चारे और भूसे की व्यवस्था न हो पा रही समुचित देखभाल
संवाद न्यूज एजेंसी
मेंहदावल। तहसील क्षेत्र मेंहदावल के बढ़या ठाठर के खैरहवा में बना वृहद गोसरंक्षण केंद्र अव्यवस्था का शिकार हो गया है। यहां 200 पशुओं को रखने का मानक है, जबकि वर्तमान में 290 पशु संरक्षित किए गए हैं। यहां चारा, भूसा और पानी की भी समस्या बनी हुई है। गो संरक्षण केंद्र परिसर में जमीन कीचड़युक्त होने से पशु दलदल में फंस जा रहे हैं। इस ओर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं जा रहा है।
क्षेत्र की ग्राम पंचायत बढ़या ठाठर के टोला खैरहवा में वर्ष 2019-20 में विधायक निधि से करीब 16 बीघे में गो आश्रय केंद्र का निर्माण कराया गया था। गोशाला के निर्माण में करीब 70 लाख रुपये निधि से आवंटित हुए थे। गो आश्रय केंद्र के चारों तरफ चहारदीवारी बनाई गई है। इसके साथ ही पशुओं को रहने के लिए पशु शेड बना है। इसकी क्षमता 200 पशुओं को संरक्षित करने की बताई गई। जबकि वर्तमान में यहां कुल 290 पशु संरक्षित किए गए हैं। गो आश्रय परिसर में जमीन दलदल होने के कारण कई पशु अक्सर इसमें फंस जाते हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पूर्वी क्षेत्र में स्थापित इस गोशाला में क्षेत्र के छुट्टा पशुओं की जगह अन्य क्षेत्रों व शहरी इलाके के छुट्टा पशु रखे जाने से दिक्कत बढ़ गई हैं। अब भी पूर्वी क्षेत्र में छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात नहीं मिल पाई है। किसान बैजनाथ यादव, जगदंबा तिवारी, मकसूदन तिवारी, अवनीन्द्रनाथ त्रिपाठी, छोटू चौधरी ने बताया कि गोशाला स्थापित होने के बाद भी छुट्टा पशुओं की समस्या लगातार बढ़ रही है। धान की फसल जलमग्न होकर खराब हो गई है। अब गेहूं की बुआई का समय आ रहा है। ऐसे में छुट्टा पशुओं से फसलों को बचाना किसान के लिए भारी साबित हो रहा है। जबकि गोशाला में बाहरी क्षेत्रों के पशु रखे जाने से यह समस्या विकराल रूप ले रही है। ग्राम पंचायत अधिकारी गिरजेश कुमार यादव का कहना हैं कि खैरहवा में स्थापित गोशाला में इस समय 290 पशु रखे गए हैं। जिनके स्वास्थ्य परीक्षण से लेकर चारा-पानी की व्यवस्था कराई गई है। जो पशु बीमार हैं, उनका इलाज भी कराया जा रहा हैं। नगर पंचायत के सीमा विस्तार में 16 ग्राम पंचायतों के शामिल होने के बाद छुट्टा पशुओं की समस्या चरम पर पहुंच गई है। बाराखाल व बसडीला में स्थापित पशु आश्रय केंद्र बंद हो गए। जबकि नगर में स्थापित कान्हा हाउस की क्षमता 30 से 35 पशु रखने की है। ऐसे में खैरहवा में स्थापित गोशाला पर दबाव काफी बढ़ गया है। जिसका नतीजा है कि किसान छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात नहीं पा रहे हैं।
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290 जानवर रखे गए हैं : पशु चिकित्साधिकारी
बढ़या ठाठर पशु अस्पताल के पशु चिकित्सक डॉक्टर विमलेश भट्ट ने बताया कि उक्त गोशाला में केवल 200 पशुओं को रखने का मानक है, लेकिन वर्तमान समय में यहां 290 पशु रखे गए हैं। बीमार पशुओं के इलाज के साथ ही उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाता हैं। यहां लाए जाने वाले छुट्टा पशु क्षेत्र के हैं या बाहरी, यह नहीं पता।
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