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मिड-डे-मील : जांच न निगरानी, हर माह 60 लाख रुपये खर्च
Tue, 08 Jul 2025 12:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 08 Jul 2025 12:02 AM IST
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परिषदीय स्कूलों मे ंमिड डे मील खाते बच्चे
संतकबीरनगर। जिले के सरकारी स्कूलों में प्रतिदिन बच्चों को मिड-डे-मील (एमडीएम) के तहत भोजन दिए जाने का प्राविधान है। इस पर 60 लाख रुपये हर माह खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद बच्चे बिना भोजन के लौट जा रहे हैं।
यह डीआईओएस की जांच में सामने आया है जिस पर डीआईओएस ने इन विद्यालयों के शिक्षकों का वेतन रोक दिया है। एमडीएम की निगरानी के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स भी कभी इनकी जांच नहीं करता है, न ही खाद्य विभाग की टीम भोजन की गुणवत्ता जांचती है।
बता दें कि जिले में 1247 परिषदीय विद्यालय हैं, इसके साथ ही 34 एडेड और एक राजकीय माध्यमिक विद्यालय तथा 15 मदरसा संचालित हैं। जहां पर कक्षा एक से आठ तक 1.07 लाख बच्चे पंजीकृत हैं।
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वर्तमान में दैनिक अनुश्रवण प्रणाली के अनुसार मानें तो सिर्फ 62 हजार बच्चे ही मध्याह्न भोजन कर रहे हैं जबकि 45 हजार बच्चे भोजन नहीं कर रहे हैं। इसकी जानकारी विभाग के पास भी नहीं है। इसकी निगरानी के लिए जनपद स्तरीय टास्क फोर्स भी है लेकिन वह कभी जांच के लिए नहीं निकलती है। डीआईओएस ने दो जुलाई को राजकीय उमाविद्यालय बभनौली, आदर्श इंटर कॉलेज उमरिया बाजार, रामकृष्ण परमहंस इंटर कॉलेज मुखलिसपुर, राजकीय उमावि रमजंगला समेत अन्य विद्यालयों का निरीक्षण किया था। जहां पर बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन नहीं बना था।
हालांकि डीआईओएस ने इन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों का वेतन बाधित कर स्पष्टीकरण तलब किया था और माध्यमिक विद्यालयों में भोजन की निगरानी के लिए नोडल नियुक्त कर दिया है।
अब सवाल यह उठता है कि जब हर माह मध्याह्न भोजन पर 60 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं तो इसकी निगरानी क्यों नहीं हो रही है। जिला समन्वयक मिड-डे-मील धीरेंद्र प्रताप चंद का कहना है कि विद्यालयों का निरीक्षण किया जाता है। जहां भी लापरवाही मिलती है तो उसकी कार्रवाई की जाती है।
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यह डीआईओएस की जांच में सामने आया है जिस पर डीआईओएस ने इन विद्यालयों के शिक्षकों का वेतन रोक दिया है। एमडीएम की निगरानी के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स भी कभी इनकी जांच नहीं करता है, न ही खाद्य विभाग की टीम भोजन की गुणवत्ता जांचती है।
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बता दें कि जिले में 1247 परिषदीय विद्यालय हैं, इसके साथ ही 34 एडेड और एक राजकीय माध्यमिक विद्यालय तथा 15 मदरसा संचालित हैं। जहां पर कक्षा एक से आठ तक 1.07 लाख बच्चे पंजीकृत हैं।
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वर्तमान में दैनिक अनुश्रवण प्रणाली के अनुसार मानें तो सिर्फ 62 हजार बच्चे ही मध्याह्न भोजन कर रहे हैं जबकि 45 हजार बच्चे भोजन नहीं कर रहे हैं। इसकी जानकारी विभाग के पास भी नहीं है। इसकी निगरानी के लिए जनपद स्तरीय टास्क फोर्स भी है लेकिन वह कभी जांच के लिए नहीं निकलती है। डीआईओएस ने दो जुलाई को राजकीय उमाविद्यालय बभनौली, आदर्श इंटर कॉलेज उमरिया बाजार, रामकृष्ण परमहंस इंटर कॉलेज मुखलिसपुर, राजकीय उमावि रमजंगला समेत अन्य विद्यालयों का निरीक्षण किया था। जहां पर बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन नहीं बना था।
हालांकि डीआईओएस ने इन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों का वेतन बाधित कर स्पष्टीकरण तलब किया था और माध्यमिक विद्यालयों में भोजन की निगरानी के लिए नोडल नियुक्त कर दिया है।
अब सवाल यह उठता है कि जब हर माह मध्याह्न भोजन पर 60 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं तो इसकी निगरानी क्यों नहीं हो रही है। जिला समन्वयक मिड-डे-मील धीरेंद्र प्रताप चंद का कहना है कि विद्यालयों का निरीक्षण किया जाता है। जहां भी लापरवाही मिलती है तो उसकी कार्रवाई की जाती है।