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निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सांसद को दिया ज्ञापन
संतकबीरनगर
Updated Fri, 16 Nov 2018 11:38 PM IST
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निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सांसद को दिया ज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को सांसद को दो सूत्री मांग पत्र सौंपा। इसमें कार्यकर्ताओं ने निषाद समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा देने तथा प्रमाण पत्र निर्गत करने की मांग की है।
निषाद पार्टी के महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष जनक नंदनी निषाद के नेतृत्व में कार्यकर्ता दोपहर में इंडस्ट्रियल एरिया स्थित सांसद शरद त्रिपाठी के कैंप कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री को संबोधित मांग पत्र सौंपा। जिलाध्यक्ष ने कहा कि केवट, मल्लाह, कहार, कश्यप, निषाद, रैकवार, बाथम, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, धीमर, भर, राजभर आदि जाति को पिछड़ी जाति की सूची से हटाकर इन्हें अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए और इन्हें प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि सात जून-2015 में कसरवल में रेल रोको आंदोलन हुआ था। इसके बाद तीन जुलाई को मंडलायुक्त कार्यालय गोरखपुर में हुए धरना में तत्कालीन सांसद एवं वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मांग का समर्थन किया था। अब उनकी सरकार है तो हमारी मांगों को पूरा किया जाए।
इस दौरान अरविंद निषाद, हरिराम निषाद, महाबल निषाद, मेवाती निषाद, अनारपाती निषाद, कुसुम निषाद, रमेश निषाद, मंजू निषाद, कमलेशआदि मौजूद रहे।
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निषाद पार्टी के महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष जनक नंदनी निषाद के नेतृत्व में कार्यकर्ता दोपहर में इंडस्ट्रियल एरिया स्थित सांसद शरद त्रिपाठी के कैंप कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री को संबोधित मांग पत्र सौंपा। जिलाध्यक्ष ने कहा कि केवट, मल्लाह, कहार, कश्यप, निषाद, रैकवार, बाथम, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, धीमर, भर, राजभर आदि जाति को पिछड़ी जाति की सूची से हटाकर इन्हें अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए और इन्हें प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि सात जून-2015 में कसरवल में रेल रोको आंदोलन हुआ था। इसके बाद तीन जुलाई को मंडलायुक्त कार्यालय गोरखपुर में हुए धरना में तत्कालीन सांसद एवं वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मांग का समर्थन किया था। अब उनकी सरकार है तो हमारी मांगों को पूरा किया जाए।
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इस दौरान अरविंद निषाद, हरिराम निषाद, महाबल निषाद, मेवाती निषाद, अनारपाती निषाद, कुसुम निषाद, रमेश निषाद, मंजू निषाद, कमलेशआदि मौजूद रहे।