फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sant Kabir Nagar News ›   Making amendments in Khatauni without convenience fee is a difficult task... farmers are wandering.

Sant Kabir Nagar News: बिना सुविधा शुल्क खतौनी में संशोधन कराना टेढ़ी खीर.. भटक रहे किसान

Sat, 18 Jan 2025 12:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Sat, 18 Jan 2025 12:02 AM IST
विज्ञापन
Making amendments in Khatauni without convenience fee is a difficult task... farmers are wandering.
संतकबीरनगर। धनघटा तहसील में खतौनी में संशोधन के लिए किसानों को तहसील का चक्कर काटना पड़ रहा है। तहसील में जहां खतौनी का संशोधन होता है, वहां पर एक रिटायर लेखपाल बैठता है। उक्त लेखपाल की स्थिति यह है कि वह तहसील में स्वयंभू कर्मचारी के रूप में बैठा रहता है। खतौनी में संशोधन से लेकर खतौनी निकालने तक की सारी डीलिंग वहीं करता है।
विज्ञापन

तहसील सृजन के बाद इक्का-दुक्का पटल पर सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति हुई, जो कर्मचारी नियुक्त हैं वह भी अपना काम अपने निजी और चहेते मुंशी से ही करवा रहे हैं। जिसका नतीजा है कि किसी का काम समय पर नहीं हो पा रहा है और हो भी रहा है तो सुविधा शुल्क देने के बाद ही। इतना ही नहीं कंप्यूटर पर खतौनी निकालने नाम संशोधन करने का काम भी कई वर्ष पूर्व रिटायर्ड हुए लेखपाल के जिम्मे है। गुमानारी गांव के निवासी सुशील बताते हैं कि वह लगातार खतौनी संशोधन के लिए कई महीने से तहसील के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन खतौनी में सशोधन नहीं किया गया। क्षेत्र के भगवानपुर गांव के निवासी रुदल पुत्र बनवारी बताते हैं कि खतौनी में संशोधन के लिए वह पिछले एक साल से तहसील का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी खतौनी संशोधित नहीं की गई।
विज्ञापन

जोगाराजा गांव के निवासी शैलेश यादव बताते हैं कि उनके यहां भी खतौनी न सुधार होने से किसानों को बहुत दिक्क्त हो रही है। वहीं माझा खड़कपुर के रहने वाले राम पलट, गायघाट निवासी राधेश्याम, रामपुर निवासी मुनेश्वर आदि का कहना है कि मानवीय भूल के चलते उनकी खतौनी में त्रुटि हो गई थी। इसे संशोधित करके सही नाम दर्ज करने के लिए आदेश भी हो चुका है। लेकिन कंप्यूटर पर बैठे रिटायर्ड लेखपाल बगैर सुविधा शुल्क के काम करने वाले नहीं है। इसी काम के लिए तहसील पर बार-बार दौड़कर जाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


15 रुपये की खतौनी के लेते हैं 20 रुपये
इलेक्ट्रानिक खतौनी का सरकारी मूल्य प्रति खतौनी 15 रुपये हैं। जबकि केंद्र पर खतौनी का मूल्य किसानों से 20 रुपये लिया जाता है। प्रतिदिन 300 से अधिक खतौनी निकाली जाती है। कारण यह है कि खतौनी का उपयोग जमानत के साथ ही साथ रजिस्ट्री में भी होता है।


नाम में गलती पर नहीं हो रही फार्मर रजिस्ट्री
वर्तमान समय में फार्मर रजिस्ट्री चल रही है। इस दौरान अगर किसी की खतौनी में नाम में एक अक्षर भी गलत है तो उसकी फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। नाम को संशोधित कराने के लिए ही कितने किसान घूम रहे हैं। बिना किसी जुगाड़ के नाम में संशोधन ही नहीं किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed