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Sant Kabir Nagar News: फसल अवशेष प्रबंधन के लिए लोगों को किया जागरूक
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पांच दिवसीय व्यवसाय प्रशिक्षण का हुआ शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। कृषि विज्ञान केंद्र बगही के कृषि अभियंत्रण विभाग की ओर से आयोजित पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण का शुभारंभ सोमवार को केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने किया। इस दौरान फसल अवशेष प्रबंधन तकनीक का प्रयोग एवं कृषि मशीनरी का खेती में उपयोग विषय में प्रशिक्षण दिया गया और लोगों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूक किया गया।
संयोजक डॉ. देवेश कुमार ने प्रशिक्षणार्थियों को बताया कि धान की फसल के बाद गेहूं की बुआई हैप्पी सीडर, सुपर सीडर यंत्रों से करें। किसान यदि सुपर सीडर से बुआई करते हैं तो फसल अवशेष को बिना जलाए ही समय से बुआई कर सकते हैं। किसान नवीनतम तकनीक के जरिए खेती कर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन में काम आने वाले कृषि यंत्रों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हैप्पी सीडर, रोटरी सीडड्रिल, जीरो टिलेज मशीन, मल्चर आदि के प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि एक टन फसल अवशेष जलाने से 5.5 किलो नत्रजन, 2.3 किलो फॉस्फोरस, 2.5 किलो पोटाश और 1.2 किलो गंधक का नुकसान होता है। इसलिए किसानों को किसी भी सूरत में फसल अवशेष को जलाना नहीं चाहिए। फसल अवशेष को यंत्रों की सहायता से मृदा में मिला देना चाहिए। डॉ. संदीप सिंह कश्यप ने बताया कि फसल अवशेष को ट्रैक्टर चलित चारा काटने वाली मशीन से काटकर एकत्र कर लें और उसे पशुओं के चारा के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। डॉ. राघवेंद्र सिंह विक्रम ने किसानों को छुट्टा पशुओं के लिए अपने गांव में ही गोशाला बनाने और फसल अवशेष को चारा के रूप में उन्हें खिलाने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान डॉ. तरुन कुमार, चंद्रकांत मणि, लालजी चौधरी, राम रतन भास्कर, चंद्र प्रकाश शुक्ल और विनोद यादव आदि मौजूद थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। कृषि विज्ञान केंद्र बगही के कृषि अभियंत्रण विभाग की ओर से आयोजित पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण का शुभारंभ सोमवार को केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने किया। इस दौरान फसल अवशेष प्रबंधन तकनीक का प्रयोग एवं कृषि मशीनरी का खेती में उपयोग विषय में प्रशिक्षण दिया गया और लोगों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूक किया गया।
संयोजक डॉ. देवेश कुमार ने प्रशिक्षणार्थियों को बताया कि धान की फसल के बाद गेहूं की बुआई हैप्पी सीडर, सुपर सीडर यंत्रों से करें। किसान यदि सुपर सीडर से बुआई करते हैं तो फसल अवशेष को बिना जलाए ही समय से बुआई कर सकते हैं। किसान नवीनतम तकनीक के जरिए खेती कर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन में काम आने वाले कृषि यंत्रों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हैप्पी सीडर, रोटरी सीडड्रिल, जीरो टिलेज मशीन, मल्चर आदि के प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि एक टन फसल अवशेष जलाने से 5.5 किलो नत्रजन, 2.3 किलो फॉस्फोरस, 2.5 किलो पोटाश और 1.2 किलो गंधक का नुकसान होता है। इसलिए किसानों को किसी भी सूरत में फसल अवशेष को जलाना नहीं चाहिए। फसल अवशेष को यंत्रों की सहायता से मृदा में मिला देना चाहिए। डॉ. संदीप सिंह कश्यप ने बताया कि फसल अवशेष को ट्रैक्टर चलित चारा काटने वाली मशीन से काटकर एकत्र कर लें और उसे पशुओं के चारा के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। डॉ. राघवेंद्र सिंह विक्रम ने किसानों को छुट्टा पशुओं के लिए अपने गांव में ही गोशाला बनाने और फसल अवशेष को चारा के रूप में उन्हें खिलाने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान डॉ. तरुन कुमार, चंद्रकांत मणि, लालजी चौधरी, राम रतन भास्कर, चंद्र प्रकाश शुक्ल और विनोद यादव आदि मौजूद थे।
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