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‘ज्ञान की धारा से बना है कबीर पंथ’
Sant Kabir Nagar
Updated Thu, 06 Apr 2017 11:48 PM IST
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सद् गुरु कबीर सद्भावना पद यात्रा बृहस्पतिवार को मगहर पहुंची।
- फोटो : अमर उजाला
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वंश और त्यागी परंपरा के आचार्य महंत हजूर अर्धनाम साहेब के नेतृत्व में लहरतारा वाराणसी से 29 मार्च को चली सद्गुरु कबीर सद्भावना पद यात्रा बृहस्पतिवार को मगहर पहुंची। यहां पर कबीर चौरा के महंत विचार दास के नेतृत्व में साधु संतों, बुद्धजीवियों के यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। यात्रा में आए लोगों ने पहले संत कबीर की समाधि और मजार पर मत्था टेका।
इस अवसर पर आचार्य महंत हजूर अर्धनाम साहेब ने कहा कि संत कबीर दुनिया के सबसे अलग संतों में गिने जाते हैं। जाति न पूछो साधु की, पूछो खाली ज्ञान। कबीर पंथ जाति की धारा से नहीं, बल्कि ज्ञान की धारा से बना है। मानव का जातियों में विभाजन कबीर पंथ का मार्ग नहीं है। यात्रा में शामिल वेस्टइंडीज के त्रिनिदाद, टुबैगो से आए महंत जयचंद साहेब ने कहा कि कबीर कि इस पावन धरती पर कदम पड़ते ही मैं धन्य हो गया। कबीर ने सत्य अहिंसा, प्रेम की सीख दी है।
इसी क्रम में वेस्टइंडीज से आए देव रामलाल साहेब ने कहा कि मगहर की धरती पर पहुंच कर बड़ी खुशी की अनुभूति हो रही है। महाराष्ट्र से आए मानिक साहेब ने भी लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर गुजरात से आए महंत गुरु चरण साहेब, चेतन दास, राजस्थान के जीवन दास, जोधपुर से भगवंत सिंह साहेब, राजस्थान के कालूराम, रायपुर के हनुमान प्रसाद, बनारस के सुरेश जी के साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उड़ीसा, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र आदि प्रांतों से आए लगभग 500 श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन बनारस के संत श्याम साहेब ने किया।
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समाज के कल्याण हेतु कार्य करें : पद यात्रा के साथ कबीर चौरा पहुंची साध्वी मनोरमा और अजमेर(राजस्थान) कलेक्ट्रेट में प्रधान लिपिक ने कहा कि संत कबीर का मिशन था कि लोग सत्य, अहिंसा, प्रेम के मार्ग पर चलें और मानव मात्र की सेवा करें। इसमें सुख की अनुभूति होती है। पद यात्रा में शामिल होकर उन्होंने भी संत कबीर की बानी को लोगों तक पहुंचाने का एक छोटा सा प्रयास किया है। लोगों को जाति धर्म से उठकर समाज के कल्याण हेतु कार्य करना चाहिए, जिससे समाज और देश आगे बढ़ सके। वैसे तो वह कई बार यहां आईं हैं, लेकिन पद यात्रा में पहली बार शामिल हुई हैं।
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इस अवसर पर आचार्य महंत हजूर अर्धनाम साहेब ने कहा कि संत कबीर दुनिया के सबसे अलग संतों में गिने जाते हैं। जाति न पूछो साधु की, पूछो खाली ज्ञान। कबीर पंथ जाति की धारा से नहीं, बल्कि ज्ञान की धारा से बना है। मानव का जातियों में विभाजन कबीर पंथ का मार्ग नहीं है। यात्रा में शामिल वेस्टइंडीज के त्रिनिदाद, टुबैगो से आए महंत जयचंद साहेब ने कहा कि कबीर कि इस पावन धरती पर कदम पड़ते ही मैं धन्य हो गया। कबीर ने सत्य अहिंसा, प्रेम की सीख दी है।
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इसी क्रम में वेस्टइंडीज से आए देव रामलाल साहेब ने कहा कि मगहर की धरती पर पहुंच कर बड़ी खुशी की अनुभूति हो रही है। महाराष्ट्र से आए मानिक साहेब ने भी लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर गुजरात से आए महंत गुरु चरण साहेब, चेतन दास, राजस्थान के जीवन दास, जोधपुर से भगवंत सिंह साहेब, राजस्थान के कालूराम, रायपुर के हनुमान प्रसाद, बनारस के सुरेश जी के साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उड़ीसा, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र आदि प्रांतों से आए लगभग 500 श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन बनारस के संत श्याम साहेब ने किया।
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समाज के कल्याण हेतु कार्य करें : पद यात्रा के साथ कबीर चौरा पहुंची साध्वी मनोरमा और अजमेर(राजस्थान) कलेक्ट्रेट में प्रधान लिपिक ने कहा कि संत कबीर का मिशन था कि लोग सत्य, अहिंसा, प्रेम के मार्ग पर चलें और मानव मात्र की सेवा करें। इसमें सुख की अनुभूति होती है। पद यात्रा में शामिल होकर उन्होंने भी संत कबीर की बानी को लोगों तक पहुंचाने का एक छोटा सा प्रयास किया है। लोगों को जाति धर्म से उठकर समाज के कल्याण हेतु कार्य करना चाहिए, जिससे समाज और देश आगे बढ़ सके। वैसे तो वह कई बार यहां आईं हैं, लेकिन पद यात्रा में पहली बार शामिल हुई हैं।