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Sant Kabir Nagar News: एमबीडी बांध को बचाएगी जियो ट्यूब, पांच करोड़ रुपये हो रहे खर्च
Fri, 07 Jun 2024 11:04 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 07 Jun 2024 11:04 PM IST
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- एमबीडी बांध को सुरक्षित करने की कवायद में जुटा ड्रेनेज खंड
फोटो है
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। घाघरा नदी के एमबीडी बांध को बचाने के लिए जियो ट्यूब (रबड़ का बैग) लगाई जा रही है, ताकि बाढ़ आने पर तटबंध सुरक्षित रहे और पानी का दबाव न बने। इस पर कुल पांच करोड़ रुपये खर्च होंगे। इधर, पिछले साल सात करोड़ खर्च कर नदी की धारा मोड़ने का काम हुआ, लेकिन वह नहीं मुड़ी थी। वहीं दूसरी तरफ बांध पर हुए रेन कट को भरने की कवायद भी नहीं शुरू हो सका। बांध की हालत देखकर गांव के लोगों को बाढ़ का भय सताने लगा है।
वर्ष 2013 में घाघरा नदी राह बदलकर उत्तर की दिशा में बढ़ी तो फिर पीछे मुड़ने का नाम नहीं ली। 2013 में तुर्क वालिया नायक और भिखारीपुर गांव के 200 से अधिक लोगों के मकान को अपनी धारा में समाहित करके एमबीडी बांध को तोड़ दिया था। इसके बाद से आज तक एमबीडी बांध के बचाव का उपाय प्रति वर्ष किए जाते रहे।
बिडहर घाट पर पुल के पास से जगदीशपुर गांव तक करीब चार किलोमीटर की लंबाई में नदी की धारा उत्तर की दिशा में मुड़ी हुई है। धारा को दक्षिण की तरफ करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 और वर्ष 2023 में नदी की खुदाई की गई। सात करोड़ रुपये खर्च होने की बात सिंचाई विभाग के लोग बताते हैं। लेकिन नदी की धारा उसी तरह बनी हुई है। इसका नतीजा है कि वर्ष 2023 के अगस्त महीने में नदी तुरकौलिया नायक गांव के पास एमबीडी बांध पर इस कदर दबाव बनाया कि बांध टूटने के कगार पर पहुंच गया था। सिंचाई विभाग के अधिकारी मेहनत के बाद बांध को बचाने में कामयाब हो सके थे।
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नदी के पानी का दबाव बांध पर न बने इसके लिए जियो ट्यूब लगाए जाने का प्रस्ताव सिंचाई विभाग की इंजीनियर ने शासन को भेजा था। शासन ने पांच करोड़ रुपये की लागत से जियो ट्यूब लगाए जाने के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए धन भी अवमुक्त कर दिया। मार्च महीने से जियो ट्यूब लगाए जाने का काम चल रहा है। जो अभी तक जारी है।
दूसरी तरफ 32 किलोमीटर लंबे बांध पर जगह-जगह होल और रेनकट बने पड़े हुए हैं। इसमें मिट्टी डालने का काम सिंचाई विभाग अभी तक शुरू नहीं कर सका है। ग्रामीण रामाशीष, राधेश्याम निषाद, जयकरण निषाद, वीरेंद्र कुमार, सीताराम, तूफानी आदि का कहना है कि केवल तुरकौलिया नायक गांव के पास बांध को मजबूत करने से काम नहीं चलेगा। अन्य जगहों पर बने रेनकट और होल को भरा जाना जरूरी है। इसके साथ ही गायघाट दक्षिणी के पास जो नदी कटान करके गायघाट के लोगों को प्रतिवर्ष उजाड़ती चली जा रही है। उस पर भी रोक लगाना जरूरी है।
तुरकौलिया नायक के पास एमबीडी बांध के बचाव के लिए लगाए जाने वाला जियो ट्यूब का कार्य लगभग पूर्ण होने के कगार पर है। रेनकट और होल को भरे जाने का काम किया जा रहा है। एमबीडी बांध पूरी तरह से सुरक्षित है और सुरक्षित रहेगा।
- सतीश चंद, सहायक अभियंता ड्रेनेज खंड
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फोटो है
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। घाघरा नदी के एमबीडी बांध को बचाने के लिए जियो ट्यूब (रबड़ का बैग) लगाई जा रही है, ताकि बाढ़ आने पर तटबंध सुरक्षित रहे और पानी का दबाव न बने। इस पर कुल पांच करोड़ रुपये खर्च होंगे। इधर, पिछले साल सात करोड़ खर्च कर नदी की धारा मोड़ने का काम हुआ, लेकिन वह नहीं मुड़ी थी। वहीं दूसरी तरफ बांध पर हुए रेन कट को भरने की कवायद भी नहीं शुरू हो सका। बांध की हालत देखकर गांव के लोगों को बाढ़ का भय सताने लगा है।
वर्ष 2013 में घाघरा नदी राह बदलकर उत्तर की दिशा में बढ़ी तो फिर पीछे मुड़ने का नाम नहीं ली। 2013 में तुर्क वालिया नायक और भिखारीपुर गांव के 200 से अधिक लोगों के मकान को अपनी धारा में समाहित करके एमबीडी बांध को तोड़ दिया था। इसके बाद से आज तक एमबीडी बांध के बचाव का उपाय प्रति वर्ष किए जाते रहे।
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बिडहर घाट पर पुल के पास से जगदीशपुर गांव तक करीब चार किलोमीटर की लंबाई में नदी की धारा उत्तर की दिशा में मुड़ी हुई है। धारा को दक्षिण की तरफ करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 और वर्ष 2023 में नदी की खुदाई की गई। सात करोड़ रुपये खर्च होने की बात सिंचाई विभाग के लोग बताते हैं। लेकिन नदी की धारा उसी तरह बनी हुई है। इसका नतीजा है कि वर्ष 2023 के अगस्त महीने में नदी तुरकौलिया नायक गांव के पास एमबीडी बांध पर इस कदर दबाव बनाया कि बांध टूटने के कगार पर पहुंच गया था। सिंचाई विभाग के अधिकारी मेहनत के बाद बांध को बचाने में कामयाब हो सके थे।
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नदी के पानी का दबाव बांध पर न बने इसके लिए जियो ट्यूब लगाए जाने का प्रस्ताव सिंचाई विभाग की इंजीनियर ने शासन को भेजा था। शासन ने पांच करोड़ रुपये की लागत से जियो ट्यूब लगाए जाने के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए धन भी अवमुक्त कर दिया। मार्च महीने से जियो ट्यूब लगाए जाने का काम चल रहा है। जो अभी तक जारी है।
दूसरी तरफ 32 किलोमीटर लंबे बांध पर जगह-जगह होल और रेनकट बने पड़े हुए हैं। इसमें मिट्टी डालने का काम सिंचाई विभाग अभी तक शुरू नहीं कर सका है। ग्रामीण रामाशीष, राधेश्याम निषाद, जयकरण निषाद, वीरेंद्र कुमार, सीताराम, तूफानी आदि का कहना है कि केवल तुरकौलिया नायक गांव के पास बांध को मजबूत करने से काम नहीं चलेगा। अन्य जगहों पर बने रेनकट और होल को भरा जाना जरूरी है। इसके साथ ही गायघाट दक्षिणी के पास जो नदी कटान करके गायघाट के लोगों को प्रतिवर्ष उजाड़ती चली जा रही है। उस पर भी रोक लगाना जरूरी है।
तुरकौलिया नायक के पास एमबीडी बांध के बचाव के लिए लगाए जाने वाला जियो ट्यूब का कार्य लगभग पूर्ण होने के कगार पर है। रेनकट और होल को भरे जाने का काम किया जा रहा है। एमबीडी बांध पूरी तरह से सुरक्षित है और सुरक्षित रहेगा।
- सतीश चंद, सहायक अभियंता ड्रेनेज खंड