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सनातन धर्म की रक्षा करना प्राणी मात्र का कर्तव्य : गोविन्द शुक्ल
Thu, 02 Oct 2025 12:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 02 Oct 2025 12:00 AM IST
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बखिरा के बरईपार में कथा कहते हुए पं गोविन्द शुक्ल । संवाद
तिघरा। विकास खंड बघौली क्षेत्र के नगर पंचायत बखिरा के बरईपार वार्ड में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन अयोध्या धाम से पधारे कथावाचक पं गोविन्द शुक्ल ने कहा कि जब जीव धर्म की रक्षा करता है तभी धर्म भी जीव की रक्षा करता है। जो मानव धर्म की रक्षा नहीं करता, धर्म उसे जीने नहीं देता है।
इसके बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि उपनिषदों में वर्णन है धर्म एवं हतो हंति धर्मों रक्षति रक्षित:। इसलिए अपने सनातन धर्म की रक्षा करना समस्त प्राणी मात्र का यह कर्तव्य और दायित्व है। जब परीक्षित को श्राप मिला कि वह सात दिवस में मरने वाले हैं, उस समय परीक्षित जी का केवल एक उद्देश्य था। वह उद्देश्य यह था कि जीव मात्र का कल्याण करना।
परीक्षित ने समाज को एक सुंदर उपदेश देते हुए लोगों को बताया कि जब तक जीते रहिए तब तक समाज सेवा करते रहिए। यही नहीं मरते मरते कुछ ऐसा कर जाए ताकि देश-देशांतर के साथ ही समय समयांतर आपको याद करते रहे। सनातन धर्म को लेकर चलने में ही कल्याण है। वैसे तो हर जीव को सात दिन में ही मरना है किसी के लिए आठवां दिन नहीं बना है।
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इस दौरान यजमान वेद प्रकाश सिंह, आशुतोष विक्रम सिंह बघेल, परशुराम सिंह, राम सिंहासन सिंह, बुधिराम यादव, श्याम बहादुर सिंह ,अरुण कुमार सिंह, केशर सिंह, इन्द्रसेन चौधरी, मनोज सिंह समेत तमाम लोग उपस्थित थे ।
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इसके बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि उपनिषदों में वर्णन है धर्म एवं हतो हंति धर्मों रक्षति रक्षित:। इसलिए अपने सनातन धर्म की रक्षा करना समस्त प्राणी मात्र का यह कर्तव्य और दायित्व है। जब परीक्षित को श्राप मिला कि वह सात दिवस में मरने वाले हैं, उस समय परीक्षित जी का केवल एक उद्देश्य था। वह उद्देश्य यह था कि जीव मात्र का कल्याण करना।
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परीक्षित ने समाज को एक सुंदर उपदेश देते हुए लोगों को बताया कि जब तक जीते रहिए तब तक समाज सेवा करते रहिए। यही नहीं मरते मरते कुछ ऐसा कर जाए ताकि देश-देशांतर के साथ ही समय समयांतर आपको याद करते रहे। सनातन धर्म को लेकर चलने में ही कल्याण है। वैसे तो हर जीव को सात दिन में ही मरना है किसी के लिए आठवां दिन नहीं बना है।
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इस दौरान यजमान वेद प्रकाश सिंह, आशुतोष विक्रम सिंह बघेल, परशुराम सिंह, राम सिंहासन सिंह, बुधिराम यादव, श्याम बहादुर सिंह ,अरुण कुमार सिंह, केशर सिंह, इन्द्रसेन चौधरी, मनोज सिंह समेत तमाम लोग उपस्थित थे ।