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Sant Kabir Nagar News: अनियमितता में सचिव व प्रधान पर केस दर्ज कराने का निर्देश
Sat, 13 Apr 2024 12:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 13 Apr 2024 12:41 AM IST
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- सेमरियावां ब्लॉक के बिगरा अव्वल का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। ब्लाॅक के ग्राम पंचायत बिगरा अव्वल में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी योगेन्द्र कुमार गौड़ को वित्तीय अनियमितता के आरोप में आठ अप्रैल को डीपीआरओ ने निलंबित कर दिया गया था। इस मामले में डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत को सचिव व प्रधान पर केस दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
डीपीआरओ व बीडीओ सेमरियावां ने चार अप्रैल 2024 को पूर्व प्रधान मोहनलाल आनंद की ओर से कराए गए विकास कार्यों के अवशेष भुगतान के लिए सत्यापन किया था। इसके अलावा निर्माणाधीन आरआरसी का भी निरीक्षण किया गया। जिसका मूल्यांकन जिला सलाहकार स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण अखिलेश सिंह एवं परामर्शी अभियंता अरूण कुमार गुप्ता से कराया गया। संबंधित ने आरसीसी के निरीक्षण के साथ मूल्यांकन आख्या भी उपलब्ध कराई गई। जिसमें ग्राम पंचायत में एसएलडब्ल्यूएम ओडीएफ प्लस के अंतर्गत शासन स्तर से 6,28,968 लाख की धनराशि मिली थी, जबकि निरीक्षण के समय आरआरसी निर्माण व ई-रिक्शा के लिए माह नवंबर में 6,05,000 रुपये की धनराशि आहरित की जा चुकी थी।
जांच के दौरान आहरित धनराशि के सापेक्ष मात्र 1,36, 685 लाख का मौके पर कार्य पाया गया व 4,68,315 का कार्य न कराकर सरकारी धन के गबन की पुष्टि हुई थी। आरआरसी निर्माण आधा अधूरा व ई-रिक्शा नहीं खरीदा गया। जिसके लिए ग्राम प्रधान व सचिव प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया था। इस मामले में डीपीआरओ ने सचिव को निलंबित कर दिया था। डीपीआरओ अविनाश कुमार ने बताया कि सचिव और प्रधान पर केस दर्ज कराने का निर्देश एडीओ पंचायत को दिया है।
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सेमरियावां। ब्लाॅक के ग्राम पंचायत बिगरा अव्वल में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी योगेन्द्र कुमार गौड़ को वित्तीय अनियमितता के आरोप में आठ अप्रैल को डीपीआरओ ने निलंबित कर दिया गया था। इस मामले में डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत को सचिव व प्रधान पर केस दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
डीपीआरओ व बीडीओ सेमरियावां ने चार अप्रैल 2024 को पूर्व प्रधान मोहनलाल आनंद की ओर से कराए गए विकास कार्यों के अवशेष भुगतान के लिए सत्यापन किया था। इसके अलावा निर्माणाधीन आरआरसी का भी निरीक्षण किया गया। जिसका मूल्यांकन जिला सलाहकार स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण अखिलेश सिंह एवं परामर्शी अभियंता अरूण कुमार गुप्ता से कराया गया। संबंधित ने आरसीसी के निरीक्षण के साथ मूल्यांकन आख्या भी उपलब्ध कराई गई। जिसमें ग्राम पंचायत में एसएलडब्ल्यूएम ओडीएफ प्लस के अंतर्गत शासन स्तर से 6,28,968 लाख की धनराशि मिली थी, जबकि निरीक्षण के समय आरआरसी निर्माण व ई-रिक्शा के लिए माह नवंबर में 6,05,000 रुपये की धनराशि आहरित की जा चुकी थी।
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जांच के दौरान आहरित धनराशि के सापेक्ष मात्र 1,36, 685 लाख का मौके पर कार्य पाया गया व 4,68,315 का कार्य न कराकर सरकारी धन के गबन की पुष्टि हुई थी। आरआरसी निर्माण आधा अधूरा व ई-रिक्शा नहीं खरीदा गया। जिसके लिए ग्राम प्रधान व सचिव प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया था। इस मामले में डीपीआरओ ने सचिव को निलंबित कर दिया था। डीपीआरओ अविनाश कुमार ने बताया कि सचिव और प्रधान पर केस दर्ज कराने का निर्देश एडीओ पंचायत को दिया है।
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