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Sant Kabir Nagar News: किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन की दी जानकारी
Sat, 01 Jun 2024 10:34 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 01 Jun 2024 10:34 PM IST
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धनघटा। कृषि विज्ञान केंद्र बगही में शनिवार को आयोजित किसानों के रोजगारपरक प्रशिक्षण में कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने संबंधी जानकारी दी गई। ड्रम सीडर मशीन से धान की सीधी बुआई की तकनीक अपनाने से लागत कम लगने को बताया गया।
केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डाॅ. अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि ड्रम सीडर तकनीक से धान की बुआई के समय खेत में कीचड़ जैसी भूमि होनी चाहिए। अधिक जलस्तर नहीं होना चाहिए। इतना जल हो, जिससे ड्रम सीडर आसानी से खेत में चल सके। लेव लगाने के 5-6 घंटे के अंदर ही ड्रम सीडर द्वारा धान की सीधी बुआई कर देनी चाहिए। किसान परंपरागत तरीके से धान की रोपाई करने में श्रमिकों की समस्या बनती जा रही है। इसके साथ ही श्रमिकों की बढ़ती मजदूरी से धान की खेती की लागत बढ़ जाती है।
प्रगतिशील कृषक जगदीश नारायण ने बताया कि धान की बीपीटी-5204 या एनडीआर- 2064 प्रजाति की एक बीघा बुआई ड्रम सीडर से किया था। ड्रम सीडर तकनीक से धान के एक हेक्टेयर खेत की बुआई एक श्रमिक मात्र दो दिनों में कर लेता है। इस हिसाब से धान की एक हेक्टेयर की बुवाई दो श्रमिकों की मजदूरी की लागत में हो जाती है। वहीं, परंपरागत विधि से धान के एक हेक्टेयर खेत की रोपाई में लगभग पचास श्रमिकों की मजदूरी की लागत आती है। डा. देवेश कुमार ने ड्रम सीडर मशीन की जानकारी दी। वैज्ञानिक डॉ. राघवेन्द्र सिंह, डॉ. तरुन कुमार, डॉ. संदीप सिंह कश्यप, डाॅ. रत्नाकर पाण्डेय ने किसानों को जानकारी दी। इस दौरान प्रशिक्षण में आए किसानों को धान के बीज का वितरण भी किया गया।
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केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डाॅ. अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि ड्रम सीडर तकनीक से धान की बुआई के समय खेत में कीचड़ जैसी भूमि होनी चाहिए। अधिक जलस्तर नहीं होना चाहिए। इतना जल हो, जिससे ड्रम सीडर आसानी से खेत में चल सके। लेव लगाने के 5-6 घंटे के अंदर ही ड्रम सीडर द्वारा धान की सीधी बुआई कर देनी चाहिए। किसान परंपरागत तरीके से धान की रोपाई करने में श्रमिकों की समस्या बनती जा रही है। इसके साथ ही श्रमिकों की बढ़ती मजदूरी से धान की खेती की लागत बढ़ जाती है।
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प्रगतिशील कृषक जगदीश नारायण ने बताया कि धान की बीपीटी-5204 या एनडीआर- 2064 प्रजाति की एक बीघा बुआई ड्रम सीडर से किया था। ड्रम सीडर तकनीक से धान के एक हेक्टेयर खेत की बुआई एक श्रमिक मात्र दो दिनों में कर लेता है। इस हिसाब से धान की एक हेक्टेयर की बुवाई दो श्रमिकों की मजदूरी की लागत में हो जाती है। वहीं, परंपरागत विधि से धान के एक हेक्टेयर खेत की रोपाई में लगभग पचास श्रमिकों की मजदूरी की लागत आती है। डा. देवेश कुमार ने ड्रम सीडर मशीन की जानकारी दी। वैज्ञानिक डॉ. राघवेन्द्र सिंह, डॉ. तरुन कुमार, डॉ. संदीप सिंह कश्यप, डाॅ. रत्नाकर पाण्डेय ने किसानों को जानकारी दी। इस दौरान प्रशिक्षण में आए किसानों को धान के बीज का वितरण भी किया गया।
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