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Sant Kabir Nagar News: आयुर्वेद पर मरीजों का बढ़ रहा भरोसा... अस्पताल बदहाल
Thu, 28 Sep 2023 12:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 28 Sep 2023 12:40 AM IST
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धनघटा। असाध्य रोगों को जड़ से समाप्त कर देने की क्षमता आयुर्वेदिक दवाओं में बताई जाती है। इसी बात पर भरोसा करके राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय धनघटा में इलाज के लिए प्रतिदिन 60 से 70 मरीज पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल में मरीजों को पीने के लिए न तो पानी न ही बैठने के लिए बेंच है। आवश्यक दवाएं भी नहीं हैं।
धनघटा में स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल का संचालन पहले क्षेत्र के गौवापार गांव में किराए के मकान में होता था। 90 के दशक में शासन ने भवन बनाने के लिए धन आवंटित किया तो गौवापार में जमीन नहीं मिली। उसके बाद अस्पताल भवन का निर्माण धनघटा में किया गया। भवन निर्माण के दौरान ठेकेदार फाटक लगाना तक भूल गए। इसके अलावा बाउंड्रीवाल का भी निर्माण नहीं कराया गया। मरीजों को बैठने के लिए हाल ही में ग्राम पंचायत ने अस्पताल के बाहर बेंच तो रखवा दिया, जिस पर गांव के लोगों का ही कब्जा रहता है। मरीज को प्यास लगने पर उसे दुकान का सहारा लेना पड़ता है।
बुधवार को इलाज के लिए आयुर्वेदिक अस्पताल धनघटा पहुंचे संजय कुमार, कौशल्या देवी, रामजतन, पार्वती, दिनेश कुमार आदि का कहना था अंग्रेजी दवाइयों की अपेक्षा आयुर्वेदिक दवाई अच्छी होती है। इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं पड़ता है। रोग को समाप्त होने में भले विलंब लगाता है, लेकिन वह जड़ से समाप्त हो जाता है। आयुर्वेदिक अस्पताल धनघटा पर डॉक्टर तो हैं, लेकिन जरूरी दवाएं और पीने तक के पानी का इंतजाम नहीं है। सरकार जिस तरह अन्य अस्पतालों में सुविधाएं मुहैया करा रही है, उस तरह की सुविधाएं आयुर्वेदिक अस्पतालों में मिले तो मरीजों को काफी सहूलियत मिलेगी।
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राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय धनघटा में प्रतिदिन 60 से 70 लोग इलाज के लिए आते हैं। लोगों को दवाओं से लाभ मिल रहा है। इससे दिन-प्रतिदिन मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है, जो अच्छी बात है। इस समय अस्पताल में कुछ दवाएं नहीं हैं, जिसके लिए डिमांड भेजी गई है। अस्पताल पर संसाधनों का अभाव जरूर है। सबसे जरूरी यहां लोगों को पीने के लिए शुद्ध पानी का इंतजाम और बाउंड्रीवॉल का निर्माण है। आरओ प्लांट और बाउंड्रीवॉल के निर्माण समेत अस्पताल भवन की मरम्मत के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र तो भेजा ही गया है, साथ ही साथ नगर पंचायत से भी अनुरोध किया गया है। -डॉ ज्योति कौशल, चिकित्साधिकारी, राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय धनघटा
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धनघटा में स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल का संचालन पहले क्षेत्र के गौवापार गांव में किराए के मकान में होता था। 90 के दशक में शासन ने भवन बनाने के लिए धन आवंटित किया तो गौवापार में जमीन नहीं मिली। उसके बाद अस्पताल भवन का निर्माण धनघटा में किया गया। भवन निर्माण के दौरान ठेकेदार फाटक लगाना तक भूल गए। इसके अलावा बाउंड्रीवाल का भी निर्माण नहीं कराया गया। मरीजों को बैठने के लिए हाल ही में ग्राम पंचायत ने अस्पताल के बाहर बेंच तो रखवा दिया, जिस पर गांव के लोगों का ही कब्जा रहता है। मरीज को प्यास लगने पर उसे दुकान का सहारा लेना पड़ता है।
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बुधवार को इलाज के लिए आयुर्वेदिक अस्पताल धनघटा पहुंचे संजय कुमार, कौशल्या देवी, रामजतन, पार्वती, दिनेश कुमार आदि का कहना था अंग्रेजी दवाइयों की अपेक्षा आयुर्वेदिक दवाई अच्छी होती है। इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं पड़ता है। रोग को समाप्त होने में भले विलंब लगाता है, लेकिन वह जड़ से समाप्त हो जाता है। आयुर्वेदिक अस्पताल धनघटा पर डॉक्टर तो हैं, लेकिन जरूरी दवाएं और पीने तक के पानी का इंतजाम नहीं है। सरकार जिस तरह अन्य अस्पतालों में सुविधाएं मुहैया करा रही है, उस तरह की सुविधाएं आयुर्वेदिक अस्पतालों में मिले तो मरीजों को काफी सहूलियत मिलेगी।
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राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय धनघटा में प्रतिदिन 60 से 70 लोग इलाज के लिए आते हैं। लोगों को दवाओं से लाभ मिल रहा है। इससे दिन-प्रतिदिन मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है, जो अच्छी बात है। इस समय अस्पताल में कुछ दवाएं नहीं हैं, जिसके लिए डिमांड भेजी गई है। अस्पताल पर संसाधनों का अभाव जरूर है। सबसे जरूरी यहां लोगों को पीने के लिए शुद्ध पानी का इंतजाम और बाउंड्रीवॉल का निर्माण है। आरओ प्लांट और बाउंड्रीवॉल के निर्माण समेत अस्पताल भवन की मरम्मत के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र तो भेजा ही गया है, साथ ही साथ नगर पंचायत से भी अनुरोध किया गया है। -डॉ ज्योति कौशल, चिकित्साधिकारी, राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय धनघटा