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उमस और गर्मी का असर : उल्टी-दस्त, वायरल बुखार के मरीज बढ़े
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संतकबीरनगर। मानसून के बीच उमस भरी गर्मी और तेज धूप का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को मरीजों की जबरदस्त भीड़ रही। सोमवार को 1,886 मरीजों ने पंजीकरण कराया, जिनमें त्वचा रोग, उल्टी-दस्त, वायरल बुखार और संक्रमण से पीड़ित मरीजों की संख्या अधिक रही। अस्पताल में सुबह से ही पर्चा काउंटर और चिकित्सकों के कक्ष के बाहर कतारें देखने को मिलीं।
चिकित्सकों के अनुसार तेज धूप, अत्यधिक पसीना और वातावरण में बढ़ी नमी के कारण इन्फ्रारेड बर्न, घमौरियां, फंगल संक्रमण, त्वचा एलर्जी, खुजली जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। वहीं दूषित पानी और मौसम में बदलाव के कारण उल्टी-दस्त, पेट के संक्रमण और वायरल बुखार के मरीज भी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एसबी गौतम ने बताया कि लगातार पसीना शरीर पर जमा रहने और त्वचा के लंबे समय तक नम रहने से फंगल संक्रमण तेजी से फैलता है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन लगभग 20 से 25 मरीज इन्फ्रारेड बर्न, 15 से 20 मरीज धूप से त्वचा झुलसने, 10 से 15 मरीज घमौरियों तथा 20 से 25 मरीज फंगल संक्रमण की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्होंने लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी प्रकार की क्रीम या दवा का प्रयोग न करने की सलाह दी।
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वरिष्ठ होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. उमेश चंद्रा ने बताया कि मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण उल्टी-दस्त और वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। उनका कहना है कि पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, हल्का भोजन करना और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
वहीं वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सिद्धार्थ कुमार ने बताया कि कभी तेज धूप तो कभी बारिश होने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, जिससे वायरल संक्रमण, बुखार और अन्य मौसमी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी।
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चिकित्सकों के अनुसार तेज धूप, अत्यधिक पसीना और वातावरण में बढ़ी नमी के कारण इन्फ्रारेड बर्न, घमौरियां, फंगल संक्रमण, त्वचा एलर्जी, खुजली जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। वहीं दूषित पानी और मौसम में बदलाव के कारण उल्टी-दस्त, पेट के संक्रमण और वायरल बुखार के मरीज भी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं।
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जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एसबी गौतम ने बताया कि लगातार पसीना शरीर पर जमा रहने और त्वचा के लंबे समय तक नम रहने से फंगल संक्रमण तेजी से फैलता है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन लगभग 20 से 25 मरीज इन्फ्रारेड बर्न, 15 से 20 मरीज धूप से त्वचा झुलसने, 10 से 15 मरीज घमौरियों तथा 20 से 25 मरीज फंगल संक्रमण की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्होंने लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी प्रकार की क्रीम या दवा का प्रयोग न करने की सलाह दी।
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वरिष्ठ होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. उमेश चंद्रा ने बताया कि मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण उल्टी-दस्त और वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। उनका कहना है कि पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, हल्का भोजन करना और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
वहीं वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सिद्धार्थ कुमार ने बताया कि कभी तेज धूप तो कभी बारिश होने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, जिससे वायरल संक्रमण, बुखार और अन्य मौसमी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी।