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Sant Kabir Nagar News: बारिश के बाद बढ़ी उमस, मौसमी बीमारियों के बढ़े मरीज
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जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे रोगी व तीमारदार। संवाद
संतकबीरनगर। बारिश के बाद बढ़ी उमस और गर्मी ने लोगों की सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया है। बदलते मौसम के बीच जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। मंगलवार को अस्पताल में 2023 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। इनमें बुखार, पेट दर्द, उल्टी-दस्त, संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीजों की संख्या अधिक रही। चिकित्सकों के अनुसार बारिश के बाद दूषित पानी, संक्रमित भोजन, उमस और जलभराव के कारण जलजनित, त्वचा एवं मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
वरिष्ठ फिजीशियन कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि बारिश के मौसम में दूषित पानी और संक्रमित खाद्य पदार्थों के सेवन से डायरिया, उल्टी-दस्त, पेट में संक्रमण और पीलिया जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लगातार उल्टी-दस्त होने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जबकि पीलिया में लीवर प्रभावित होने की आशंका रहती है।
उन्होंने लोगों को साफ अथवा उबला हुआ पानी पीने, ताजा भोजन करने और खुले में रखे खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि पेट दर्द, उल्टी-दस्त, तेज बुखार या कमजोरी जैसे लक्षणों को सामान्य समझकर स्वयं दवा लेना उचित नहीं है। लक्षण बने रहने पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
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वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एसबी गौतम ने बताया कि बारिश के बाद वातावरण में नमी और उमस बढ़ने से त्वचा संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। खुजली, लाल चकत्ते और फंगल संक्रमण की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। चर्म रोग ओपीडी में प्रतिदिन 200 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पसीने और लगातार नमी के कारण त्वचा पर फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। लगातार खुजली या चकत्ते होने पर चिकित्सक की सलाह से ही दवा का इस्तेमाल करना चाहिए।
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बारिश में साफ पानी और स्वच्छता को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें। बारिश के दौरान स्वच्छता को प्राथमिकता दें और बुखार, लगातार उल्टी-दस्त, पीलिया के लक्षण या त्वचा पर संक्रमण जैसी समस्या होने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लें।
-डॉ. रमाशंकर सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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वरिष्ठ फिजीशियन कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि बारिश के मौसम में दूषित पानी और संक्रमित खाद्य पदार्थों के सेवन से डायरिया, उल्टी-दस्त, पेट में संक्रमण और पीलिया जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लगातार उल्टी-दस्त होने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जबकि पीलिया में लीवर प्रभावित होने की आशंका रहती है।
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उन्होंने लोगों को साफ अथवा उबला हुआ पानी पीने, ताजा भोजन करने और खुले में रखे खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि पेट दर्द, उल्टी-दस्त, तेज बुखार या कमजोरी जैसे लक्षणों को सामान्य समझकर स्वयं दवा लेना उचित नहीं है। लक्षण बने रहने पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
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वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एसबी गौतम ने बताया कि बारिश के बाद वातावरण में नमी और उमस बढ़ने से त्वचा संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। खुजली, लाल चकत्ते और फंगल संक्रमण की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। चर्म रोग ओपीडी में प्रतिदिन 200 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पसीने और लगातार नमी के कारण त्वचा पर फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। लगातार खुजली या चकत्ते होने पर चिकित्सक की सलाह से ही दवा का इस्तेमाल करना चाहिए।
बारिश में साफ पानी और स्वच्छता को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें। बारिश के दौरान स्वच्छता को प्राथमिकता दें और बुखार, लगातार उल्टी-दस्त, पीलिया के लक्षण या त्वचा पर संक्रमण जैसी समस्या होने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लें।
-डॉ. रमाशंकर सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक