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बुलाओ छुट्टियों में हे प्रिये इस बार होली में...
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खलीलाबाद पब्लिक स्कूल में आयोजित काव्य गोष्ठी में काव्य पाठ करते कवि।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
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- खलीलाबाद पब्लिक स्कूल में कवि गोष्ठी का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच की ओर से रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल के सभागार में मासिक कवि गोष्ठी आयोजित की गई।
मुख्य अतिथि एहसास मगहरी ने अपनी रचना बुलाओ छुट्टियों में हे प्रिये इस बार होली में..., अटक पलकों पर सजाया देर तक, गम से दिल को जगमगाया देर तक सुनाया। वरिष्ठ रचनाकार अवधेश पांडेय ने अश्रु में कलम डूब के चली, छोड़ मंदिर मस्जिद की गली... सुनाकर वाहवाही लूटी। मंच के कोषाध्यक्ष राधेश्याम मिश्र श्याम ने पढ़ना भी श्याम इबादत है, वो पढ़ता है तो पढ़ने दो। सुनाकर पढ़ने वालों को संरक्षण देने की अपील किया। राजेंद्र बहादुर सिंह हंस ने मुस्कराता यह सारा चमन चाहिए, पीता खाता हमारा वतन चाहिए सुनाया। संचालन कर रहे हामिद खलीलाबादी ने देखते हुए तेरे कत्लेआम होता है, जुल्म ये तुम्हारा है या पासवानी है सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई पर पहुुंचाया। अध्यक्षता कर रहे नरसिंह नारायण कमल ने नकल के बल पर बढ़े हो यारों, तुम्हीं राज को बता रहे हो सुनाकर नकल की अच्छाईयों व बुराईयों पर प्रकाश डाला। सरदार हरिभजन सिंह ने मंदिर में दाना चुन चिड़िया मस्जिद में पानी पीती है, सुना है राधा की चुनरी को सलमा बीबी सीती है। सुनाकर सामाजिक एकता पर जोर दिया। युवा कवि अजीत इलाहाबादी ने मां ने जब से आंगन में दाना बनाना छोड़ दिया, चिड़ियों ने आंगन में आना छोड़ दिया। सुनाकर मां की महिमा को बताया। कवि गोष्ठी में शिवा पांडेय, रामरूप, दीपचंद्र आदि ने अपनी रचनाएं पढ़ी।
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- खलीलाबाद पब्लिक स्कूल में कवि गोष्ठी का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच की ओर से रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल के सभागार में मासिक कवि गोष्ठी आयोजित की गई।
मुख्य अतिथि एहसास मगहरी ने अपनी रचना बुलाओ छुट्टियों में हे प्रिये इस बार होली में..., अटक पलकों पर सजाया देर तक, गम से दिल को जगमगाया देर तक सुनाया। वरिष्ठ रचनाकार अवधेश पांडेय ने अश्रु में कलम डूब के चली, छोड़ मंदिर मस्जिद की गली... सुनाकर वाहवाही लूटी। मंच के कोषाध्यक्ष राधेश्याम मिश्र श्याम ने पढ़ना भी श्याम इबादत है, वो पढ़ता है तो पढ़ने दो। सुनाकर पढ़ने वालों को संरक्षण देने की अपील किया। राजेंद्र बहादुर सिंह हंस ने मुस्कराता यह सारा चमन चाहिए, पीता खाता हमारा वतन चाहिए सुनाया। संचालन कर रहे हामिद खलीलाबादी ने देखते हुए तेरे कत्लेआम होता है, जुल्म ये तुम्हारा है या पासवानी है सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई पर पहुुंचाया। अध्यक्षता कर रहे नरसिंह नारायण कमल ने नकल के बल पर बढ़े हो यारों, तुम्हीं राज को बता रहे हो सुनाकर नकल की अच्छाईयों व बुराईयों पर प्रकाश डाला। सरदार हरिभजन सिंह ने मंदिर में दाना चुन चिड़िया मस्जिद में पानी पीती है, सुना है राधा की चुनरी को सलमा बीबी सीती है। सुनाकर सामाजिक एकता पर जोर दिया। युवा कवि अजीत इलाहाबादी ने मां ने जब से आंगन में दाना बनाना छोड़ दिया, चिड़ियों ने आंगन में आना छोड़ दिया। सुनाकर मां की महिमा को बताया। कवि गोष्ठी में शिवा पांडेय, रामरूप, दीपचंद्र आदि ने अपनी रचनाएं पढ़ी।