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Sant Kabir Nagar News: मोबाइल की लत छुड़ाएगी किताबों की दोस्ती
Fri, 29 May 2026 12:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 29 May 2026 12:33 AM IST
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मेंहदावल। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को मोबाइल की लत से मुक्त करने के लिए किताबों से जोड़ने की पहल शुरू की जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग से बच्चों की किताब संग बचपन अभियान चलाने के लिए विद्यालयों में रोचक, ग्रामीण परिवेश से जुड़ी किताबें पहुंचा दी गई हैं।
अभियान का उद्देश्य न केवल शैक्षिक सुधार है, बल्कि उन अभिभावकों की बढ़ती चिंता को भी कम करना है जो बच्चों की मोबाइल की लत से परेशान हैं। यह पहल विद्यार्थियों में एकाग्रता, अभिव्यक्ति और पठन संस्कृति को पुनर्जीवित करने के साथ उन्हें डिजिटल आकर्षण से बाहर निकालकर विचार, ज्ञान और संवेदना की वास्तविक दुनिया से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
बीईओ महेंद्रनाथ त्रिपाठी ने बताया कि अभियान को अमल में लाने के लिए माध्यमिक /बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी बेसिक शिक्षाधिकारियों को पत्र जारी कर दिशा निर्देश दिए हैं। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को पुस्तकों की ओर आकर्षित करना, मोबाइल और अन्य स्क्रीन पर निर्भरता कम करना है।
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विभाग ने शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे शिक्षण के साथ समाचार पत्रों, पुस्तकों और रचनात्मक गतिविधियों का नियमित उपयोग करें। समाचार पत्रों के माध्यम से सामान्य ज्ञान, करेंट अफेयर्स, शब्दावली और पाठ्यवस्तु की समझ विकसित कराई जाएगी। इसके अलावा समूह चर्चा, सुडोकू, क्रॉसवर्ड व अन्य बौद्धिक खेलों को भी पढ़ाई का हिस्सा बनाया जाएगा। आकस्मिक सीख (एक्सीडेंटल लर्निंग) को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विभाग ने इसे प्रभावित करने के लिए स्कूल पुस्तकालयों के प्रभावी उपयोग, मॉर्निंग असेंबली में पठन-पाठन से जुड़े विचार, थॉट ऑफ द डे, ग्रुप डिस्कशन, लाइब्रेरी पीरियड और अभिभावक शिक्षक बैठक में इस अभियान को शामिल करने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का शिक्षक संगठनों ने स्वागत किया है।
राष्ट्रीय शैक्षिक संघ ब्लॉक अध्यक्ष अनूप कुमार सिंह और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष प्रेम प्रकाश दूबे ने कहा कि यह अभियान बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
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अभियान का उद्देश्य न केवल शैक्षिक सुधार है, बल्कि उन अभिभावकों की बढ़ती चिंता को भी कम करना है जो बच्चों की मोबाइल की लत से परेशान हैं। यह पहल विद्यार्थियों में एकाग्रता, अभिव्यक्ति और पठन संस्कृति को पुनर्जीवित करने के साथ उन्हें डिजिटल आकर्षण से बाहर निकालकर विचार, ज्ञान और संवेदना की वास्तविक दुनिया से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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बीईओ महेंद्रनाथ त्रिपाठी ने बताया कि अभियान को अमल में लाने के लिए माध्यमिक /बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी बेसिक शिक्षाधिकारियों को पत्र जारी कर दिशा निर्देश दिए हैं। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को पुस्तकों की ओर आकर्षित करना, मोबाइल और अन्य स्क्रीन पर निर्भरता कम करना है।
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विभाग ने शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे शिक्षण के साथ समाचार पत्रों, पुस्तकों और रचनात्मक गतिविधियों का नियमित उपयोग करें। समाचार पत्रों के माध्यम से सामान्य ज्ञान, करेंट अफेयर्स, शब्दावली और पाठ्यवस्तु की समझ विकसित कराई जाएगी। इसके अलावा समूह चर्चा, सुडोकू, क्रॉसवर्ड व अन्य बौद्धिक खेलों को भी पढ़ाई का हिस्सा बनाया जाएगा। आकस्मिक सीख (एक्सीडेंटल लर्निंग) को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विभाग ने इसे प्रभावित करने के लिए स्कूल पुस्तकालयों के प्रभावी उपयोग, मॉर्निंग असेंबली में पठन-पाठन से जुड़े विचार, थॉट ऑफ द डे, ग्रुप डिस्कशन, लाइब्रेरी पीरियड और अभिभावक शिक्षक बैठक में इस अभियान को शामिल करने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का शिक्षक संगठनों ने स्वागत किया है।
राष्ट्रीय शैक्षिक संघ ब्लॉक अध्यक्ष अनूप कुमार सिंह और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष प्रेम प्रकाश दूबे ने कहा कि यह अभियान बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।