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Sant Kabir Nagar News: अगरबत्ती और मोमबत्ती से बदली तकदीर
Tue, 28 Jul 2026 11:38 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 28 Jul 2026 11:38 PM IST
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रोसयाबाजार। विकासखंड पौली के खेवशियां गांव की बौद्ध महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अगरबत्ती, मोमबत्ती समेत अन्य घरेलू उत्पाद तैयार कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। समूह से जुड़कर महिलाओं ने न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत की है।
समूह की अध्यक्ष जानकी देवी ने बताया कि वर्ष 2021 में स्वयं सहायता समूह का गठन हुआ था। शुरुआत में समूह के माध्यम से जरूरत के अनुसार ऋण लेकर छोटे-मोटे कार्य किए जाते थे। बाद में सरकारी योजनाओं और अधिकारियों की प्रेरणा से महिलाओं ने अगरबत्ती और मोमबत्ती निर्माण का कार्य शुरू किया। तैयार उत्पादों को क्षेत्र में लगने वाली प्रदर्शनियों में प्रदर्शित कर बिक्री की गई, जिससे लोगों को काफी लाभ मिला। इसके बाद स्थानीय दुकानदारों से संपर्क कर नियमित रूप से उत्पादों की बिक्री शुरू हुई और आमदनी बढ़ने लगी।
जानकी देवी ने बताया कि समूह की अन्य सदस्य मीरा, किस्मती, सीमा, निर्मला, सरस्वती, फूलमती और बिंदु ने भी अपनी रुचि के अनुसार अलग-अलग उत्पाद बनाना शुरू किया। कोई अदौरी तैयार करती है तो कोई सीनरी, गुलदस्ता और अचार बनाती हैं। जिस उत्पाद की बाजार में अधिक मांग रहती है, उसी के अनुसार उत्पादन तैयार किया जाता है। मांग बढ़ने पर सभी सदस्य मिलकर एक-दूसरे का सहयोग करते हुए समय पर ऑर्डर पूरा करती हैं।
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महिलाओं का कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ी है। अब वे परिवार की आय में योगदान देने के साथ ही अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं की यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण बन रही है।
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समूह की अध्यक्ष जानकी देवी ने बताया कि वर्ष 2021 में स्वयं सहायता समूह का गठन हुआ था। शुरुआत में समूह के माध्यम से जरूरत के अनुसार ऋण लेकर छोटे-मोटे कार्य किए जाते थे। बाद में सरकारी योजनाओं और अधिकारियों की प्रेरणा से महिलाओं ने अगरबत्ती और मोमबत्ती निर्माण का कार्य शुरू किया। तैयार उत्पादों को क्षेत्र में लगने वाली प्रदर्शनियों में प्रदर्शित कर बिक्री की गई, जिससे लोगों को काफी लाभ मिला। इसके बाद स्थानीय दुकानदारों से संपर्क कर नियमित रूप से उत्पादों की बिक्री शुरू हुई और आमदनी बढ़ने लगी।
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जानकी देवी ने बताया कि समूह की अन्य सदस्य मीरा, किस्मती, सीमा, निर्मला, सरस्वती, फूलमती और बिंदु ने भी अपनी रुचि के अनुसार अलग-अलग उत्पाद बनाना शुरू किया। कोई अदौरी तैयार करती है तो कोई सीनरी, गुलदस्ता और अचार बनाती हैं। जिस उत्पाद की बाजार में अधिक मांग रहती है, उसी के अनुसार उत्पादन तैयार किया जाता है। मांग बढ़ने पर सभी सदस्य मिलकर एक-दूसरे का सहयोग करते हुए समय पर ऑर्डर पूरा करती हैं।
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महिलाओं का कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ी है। अब वे परिवार की आय में योगदान देने के साथ ही अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं की यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण बन रही है।