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Sant Kabir Nagar News: मौसम के उतार-चढ़ाव से तकलीफ बढ़ी, वायरल फीवर, चर्म रोग और एलर्जी के बढ़े मरीज
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जिला अस्पताल के पंजीकरण काउंटर पर खड़े मरीज व तीमारदार। संवाद
संतकबीरनगर। बारिश के बाद उमस, फिर तेज धूप और तापमान में बदलाव का असर लोगों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 2245 मरीज पहुंचे। इनमें सर्दी-जुकाम, बुखार, वायरल संक्रमण, शरीर में दर्द और कमजोरी के साथ चर्म रोग, एलर्जी, बीपी और शुगर से संबंधित मरीज भी शामिल रहे। चिकित्सकों का कहना है कि बदलते मौसम में एक साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं, इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच और उपचार जरूरी है।
अस्पताल में सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर से पीड़ित मरीज पहुंचे। कई मरीजों में गले में खराश, खांसी, सिरदर्द और शरीर में दर्द की शिकायत देखी गई। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. फराज अहमद ने बताया कि मौसम परिवर्तन के कारण सर्दी-जुकाम और बुखार के मरीज अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं। कई मरीजों को स्वस्थ होने में एक सप्ताह से 10 दिन तक लग रहा है। उन्होंने पर्याप्त पानी पीने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार लेने की सलाह दी।
बारिश के बाद जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ सकता है। ऐसे में डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। चिकित्सकों ने लोगों को घर और आसपास पानी जमा न होने देने, कूलर का पानी नियमित रूप से बदलने तथा साफ-सफाई रखने की सलाह दी है।
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बारिश के बाद बढ़ी उमस और पसीने के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एसबी गौतम ने बताया कि सोमवार को करीब 200 नए और 50 पुराने चर्म रोगी उपचार के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस मौसम में पसीना, नमी और गीले कपड़ों के कारण त्वचा पर संक्रमण, खुजली, लाल चकत्ते और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
उन्होंने सलाह दी कि बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े तत्काल बदलें, शरीर को अच्छी तरह सुखाएं और साफ-सुथरे कपड़ों का इस्तेमाल करें। त्वचा पर लगातार खुजली या संक्रमण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लें।
मौसम में बदलाव का असर बीपी और शुगर के मरीजों पर भी पड़ रहा है। कुछ मरीजों में बीपी कम होने तो कुछ में बढ़ने की शिकायत सामने आ रही है। ऐसे मरीजों को नियमित रूप से दवा लेने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार बीपी व शुगर की जांच कराते रहने की सलाह दी गई है।
मनोचिकित्सक डॉ. उमाशंकर ने बताया कि तापमान और स्वास्थ्य में बदलाव के साथ कुछ लोगों में बेचैनी, चिड़चिड़ापन और गुस्से जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं। लगातार ऐसी परेशानी रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
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अस्पताल में सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर से पीड़ित मरीज पहुंचे। कई मरीजों में गले में खराश, खांसी, सिरदर्द और शरीर में दर्द की शिकायत देखी गई। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. फराज अहमद ने बताया कि मौसम परिवर्तन के कारण सर्दी-जुकाम और बुखार के मरीज अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं। कई मरीजों को स्वस्थ होने में एक सप्ताह से 10 दिन तक लग रहा है। उन्होंने पर्याप्त पानी पीने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार लेने की सलाह दी।
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बारिश के बाद जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ सकता है। ऐसे में डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। चिकित्सकों ने लोगों को घर और आसपास पानी जमा न होने देने, कूलर का पानी नियमित रूप से बदलने तथा साफ-सफाई रखने की सलाह दी है।
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बारिश के बाद बढ़ी उमस और पसीने के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एसबी गौतम ने बताया कि सोमवार को करीब 200 नए और 50 पुराने चर्म रोगी उपचार के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस मौसम में पसीना, नमी और गीले कपड़ों के कारण त्वचा पर संक्रमण, खुजली, लाल चकत्ते और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
उन्होंने सलाह दी कि बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े तत्काल बदलें, शरीर को अच्छी तरह सुखाएं और साफ-सुथरे कपड़ों का इस्तेमाल करें। त्वचा पर लगातार खुजली या संक्रमण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लें।
मौसम में बदलाव का असर बीपी और शुगर के मरीजों पर भी पड़ रहा है। कुछ मरीजों में बीपी कम होने तो कुछ में बढ़ने की शिकायत सामने आ रही है। ऐसे मरीजों को नियमित रूप से दवा लेने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार बीपी व शुगर की जांच कराते रहने की सलाह दी गई है।
मनोचिकित्सक डॉ. उमाशंकर ने बताया कि तापमान और स्वास्थ्य में बदलाव के साथ कुछ लोगों में बेचैनी, चिड़चिड़ापन और गुस्से जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं। लगातार ऐसी परेशानी रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।