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पानी घटा, कम नहीं हुईं बाढ़ पीड़ितों की परेशानियां
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गायघाट दक्षिणी के खेतों में हुआ जलजमाव।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
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पानी घटा, कम नहीं हुईं बाढ़ पीड़ितों की परेशानियां
छप्पर वाले घर ढह गए हैं, हैंडपंपों के पानी से आ रही दुर्गंध, कई लोग बुखार-खांसी-जुकाम से पीड़ित
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। घाघरा नदी का पानी घटने के बाद भी तहसील क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित गांवों की समस्या कम नहीं हुई है। लगातार तीन महीने तक बाढ़ का दंश झेलने वाले 38 गांवों में स्वच्छ पेयजल, रहने का इंतजाम और संक्रामक बीमारियों का संकट बरकरार है।
तहसील क्षेत्र के गायघाट दक्षिणी, ढोलबजा, चकदहा, गुनवतिया, सुअरहा, दौलतपुर, सियर कला, सरैया समेत 38 गांव करीब तीन माह से घाघरा नदी की बाढ़ के चपेट में थे। पहले गांव के चारों तरफ पानी घिरने के बाद जब गांव में नदी का पानी पहुंचा तो तमाम परिवार घर से पलायन करके एमबीडी बांध पर रहने को विवश हो गए। इस बीच कई लोगों का छप्पर का मकान ढह गया। नदी की कटान से 22 परिवार बेघर हो गए और फसल भी नष्ट हो गई। अब बाढ़ का पानी कम हुआ तो लोग धीरे-धीरे करके अपने घरों को लौटने लगे, लेकिन इनके सामने समस्या बनी हुई है। रामसूरत, बलवंत, सीताराम, फेकई निषाद, दयाशंकर, लालमति, पुष्पा, सुराती देवी आदि बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि उनका छप्पर का मकान ढह गया है। उसमें रखा गया सामान भी नष्ट हो गया है। घर गिरने के कारण कहीं भी रहने का ठिकाना नहीं रह गया है। इस समय कहीं भी खरपतवार मिलने वाला नहीं है, जिससे छप्पर बनाया जा सके। हैंडपंप से निकल रहा पानी बदबू दे रहा है, जिससे पीने के पानी का संकट बना हुआ है। किसी तरह छानकर उसी पानी को पीने की मजबूरी है। इस समय सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, पेट दर्द से गांव के अधिकतर लोग पीड़ित है। स्वास्थ्य विभाग की टीम बाढ़ के दौरान यहां पर कैंप लगाकर दवा का वितरण जरूर किया था, लेकिन अब भी दिक्कत बनी हुई है। ग्राम प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू का कहना है कि पानी हटने के बाद लोगों की परेशानियां बढ़ी है। जिसके निदान के लिए जनप्रतिनिधियों और अफसरों से गुहार की जा रही है। अभी तक कोई सार्थक परिणाम नहीं आया। डीएम दिव्या मित्तल ने कहा कि बाढ़ प्रभावित गांवों में दवा आदि के वितरण का निर्देश दिए गए हैं। अन्य समस्याओं का निदान भी जल्द करा दिया जाएगा।
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छप्पर वाले घर ढह गए हैं, हैंडपंपों के पानी से आ रही दुर्गंध, कई लोग बुखार-खांसी-जुकाम से पीड़ित
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। घाघरा नदी का पानी घटने के बाद भी तहसील क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित गांवों की समस्या कम नहीं हुई है। लगातार तीन महीने तक बाढ़ का दंश झेलने वाले 38 गांवों में स्वच्छ पेयजल, रहने का इंतजाम और संक्रामक बीमारियों का संकट बरकरार है।
तहसील क्षेत्र के गायघाट दक्षिणी, ढोलबजा, चकदहा, गुनवतिया, सुअरहा, दौलतपुर, सियर कला, सरैया समेत 38 गांव करीब तीन माह से घाघरा नदी की बाढ़ के चपेट में थे। पहले गांव के चारों तरफ पानी घिरने के बाद जब गांव में नदी का पानी पहुंचा तो तमाम परिवार घर से पलायन करके एमबीडी बांध पर रहने को विवश हो गए। इस बीच कई लोगों का छप्पर का मकान ढह गया। नदी की कटान से 22 परिवार बेघर हो गए और फसल भी नष्ट हो गई। अब बाढ़ का पानी कम हुआ तो लोग धीरे-धीरे करके अपने घरों को लौटने लगे, लेकिन इनके सामने समस्या बनी हुई है। रामसूरत, बलवंत, सीताराम, फेकई निषाद, दयाशंकर, लालमति, पुष्पा, सुराती देवी आदि बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि उनका छप्पर का मकान ढह गया है। उसमें रखा गया सामान भी नष्ट हो गया है। घर गिरने के कारण कहीं भी रहने का ठिकाना नहीं रह गया है। इस समय कहीं भी खरपतवार मिलने वाला नहीं है, जिससे छप्पर बनाया जा सके। हैंडपंप से निकल रहा पानी बदबू दे रहा है, जिससे पीने के पानी का संकट बना हुआ है। किसी तरह छानकर उसी पानी को पीने की मजबूरी है। इस समय सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, पेट दर्द से गांव के अधिकतर लोग पीड़ित है। स्वास्थ्य विभाग की टीम बाढ़ के दौरान यहां पर कैंप लगाकर दवा का वितरण जरूर किया था, लेकिन अब भी दिक्कत बनी हुई है। ग्राम प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू का कहना है कि पानी हटने के बाद लोगों की परेशानियां बढ़ी है। जिसके निदान के लिए जनप्रतिनिधियों और अफसरों से गुहार की जा रही है। अभी तक कोई सार्थक परिणाम नहीं आया। डीएम दिव्या मित्तल ने कहा कि बाढ़ प्रभावित गांवों में दवा आदि के वितरण का निर्देश दिए गए हैं। अन्य समस्याओं का निदान भी जल्द करा दिया जाएगा।
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