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Sant Kabir Nagar News: समितियों से खाद नदारद...विभाग का दावा- स्टाॅक भरपूर

Sun, 14 Jul 2024 10:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Sun, 14 Jul 2024 10:57 PM IST
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Fertilizer missing from committees...Department claims - stock is full
- 150 से 200 रुपये प्रति बोरा अधिक देकर निजी दुकानों से खरीदने को विवश किसान
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अंतिम चरण में है धान की रोपाई
- अधिकारियों का दावा- पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जनपद में धान की रोपाई अंतिम चरण में है, लेकिन समितियों से खाद नदारद हैं। किसान निजी दुकान से खाद खरीदकर धान की रोपाई करने को मजबूर हैं। अधिकारियों का दावा है कि स्टॉक भरपूर है, समितियों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है।
अधिकारियों के दावे पर भरोसा करें तो जिले में पर्याप्त मात्रा में डीएपी व यूरिया उपलब्ध है। जहां पर खाद भेजी जा रही है, वहां तुरंत समाप्त हो जा रही है। जिसके चलते किसान बाजार से ऊंचे दाम पर खाद खरीदने के लिए विवश हैं। विभागीय जानकारों के मुताबिक तो 83 समितियां कागजात में दर्ज हैं। जिनमें से वर्तमान में लगभग 76 ही संचालित हो रही हैं।
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इसके अलावा 60 अन्य एजेंसियां भी चल रही हैं, जहां से किसानों को हर सीजन में खाद मुहैया कराया जाता है। वर्तमान समय में धान की रोपाई अंतिम चरण में है। बावजूद इसके कुछ समितियों से खाद नदारद हैं, जबकि जिले में लगभग 1653 मीट्रिक टन का रैक आया था। जिसे समितियों व अन्य एजेंसियों को वितरित किया गया।
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इस खाद को लगभग 32 समितियों एवं अन्य एजेंसी कुल मिलाकर 75 से 80 सेंटरों पर वितरित किया गया। जहां से किसानों को आसानी से उनके समय पर खाद मिल सकें। समितियों पर खाद न मिलने से किसानों को अपने खेतों में खाद के लिए प्रति बोरा 150 से लेकर 200 रुपये अधिक देकर प्राइवेट दुकानों से खरीदना पड़ रहा है। किसान ज्ञानदास, शिव कुमार, सीता राम ने बताया कि केंद्र पर जाने पर खाद नहीं मिल पा रहा है। डीएपी के बारे में बताया जा रहा है कि कोई स्टॉक ही नहीं आया है। बाहर से प्राइवेट में खरीदारी करने को मजबूर हो रहे हैं।

लोन लेने से कतरा रहे सचिव
कई समितियों के सचिव लोन लेने से कतरा रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक सचिव ने बताया कि खाद उठान के लिए सहकारी बैंक से लोन लेना पड़ता है। जिसके बाद रुपये जमा करके खाद उठान कराया जाता है। समय से रुपये न मिलने और अन्य किसी तरह की विभागीय सब्सिडी न मिलने की वजह से समस्या उत्पन्न हो रही है।


वर्जन
अभी जिले में जल्द ही आए हैं, खाद के संबंध में समीक्षा की जाएगी। समितियों व अन्य एजेंसियों से बातचीत करके किसानों को खाद की किल्लत न हो इसका पूरा प्रबंध होगा।
- आनंद कुमार मिश्र, एआर, सहकारिता
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