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विभाग गंभीर, अब नसबंदी शिविर में दो सर्जनों की रहेगी ड्यूटी
Thu, 10 Jan 2019 12:08 AM IST
राकेश पांडेय
संतकबीरनगर
संतकबीरनगर
Published by: राकेश पांडेय
Updated Thu, 10 Jan 2019 12:08 AM IST
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विभाग गंभीर, अब नसबंदी शिविर में दो सर्जनों की रहेगी ड्यूटी
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में मंगलवार को महिलाओं की नसबंदी के दौरान सर्जन की ओर से चीरा लगाकर छोड़ देने के मामले को स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लिया है। वरिष्ठ अफसरों ने इस मामले में किरकिरी के बाद अब नसबंदी शिविर में एक अतिरिक्त सर्जन उपलब्ध रहने की व्यवस्था कर रहा है। इससे आपात स्थिति से निबटने मेें मदद मिलेगी।
अब नसबंदी का ऑपरेशन काफी सरल व सुरक्षित हो गया है। फिर भी ऑपरेशन के नाम से लोग डर जाते हैं। जिला अस्पताल में हुई घटना ऐसे डर को और बढ़ा देती है। यह स्वास्थ्य विभाग के लिए भी सबक है। जिस वक्त आशा कार्यकर्ता व परिजन सीएमओ व सीएमएस से अपने घर की महिलाओं की नसबंदी प्रक्रिया पूर्ण कराकर टांका लगवाने की मांग कर रहे थे, उस वक्त जिला अस्पताल में कोई सर्जन मौजूद नहीं था। अगल-बगल के अस्पतालों में भी कोई नहीं था। लिहाजा बस्ती के एडी हेल्थ को सूचना देकर मदद मांगनी पड़ी थी। गनीमत यह रही कि बस्ती जिले में तैनात डॉ. एसआर कन्नौजिया उस वक्त खलीलाबाद में मौजूद थे और वरिष्ठ अफसरों के निर्देश पर जिला अस्पताल पहुंचकर नसबंदी की प्रक्रिया पूरी कराई। इससे महिलाओं की जान बची और परिजनों का गुस्सा कम हुआ। सीएमओ डॉ. हरगोविंद सिंह का कहना है कि अगले शिविरों में दो सर्जनों की व्यवस्था रहेगी। उध्रर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खलीलाबाद में बुधवार को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा दिवस मनाया गया। इस दौरान हाईरिस्क की श्रेणी की गर्भवती महिलाओं की चिकित्सकों ने जांच की। साथ ही उन्हें परामर्श के साथ ही दवा उपलब्ध कराया गया।
अब नसबंदी का ऑपरेशन काफी सरल व सुरक्षित हो गया है। फिर भी ऑपरेशन के नाम से लोग डर जाते हैं। जिला अस्पताल में हुई घटना ऐसे डर को और बढ़ा देती है। यह स्वास्थ्य विभाग के लिए भी सबक है। जिस वक्त आशा कार्यकर्ता व परिजन सीएमओ व सीएमएस से अपने घर की महिलाओं की नसबंदी प्रक्रिया पूर्ण कराकर टांका लगवाने की मांग कर रहे थे, उस वक्त जिला अस्पताल में कोई सर्जन मौजूद नहीं था। अगल-बगल के अस्पतालों में भी कोई नहीं था। लिहाजा बस्ती के एडी हेल्थ को सूचना देकर मदद मांगनी पड़ी थी। गनीमत यह रही कि बस्ती जिले में तैनात डॉ. एसआर कन्नौजिया उस वक्त खलीलाबाद में मौजूद थे और वरिष्ठ अफसरों के निर्देश पर जिला अस्पताल पहुंचकर नसबंदी की प्रक्रिया पूरी कराई। इससे महिलाओं की जान बची और परिजनों का गुस्सा कम हुआ। सीएमओ डॉ. हरगोविंद सिंह का कहना है कि अगले शिविरों में दो सर्जनों की व्यवस्था रहेगी। उध्रर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खलीलाबाद में बुधवार को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा दिवस मनाया गया। इस दौरान हाईरिस्क की श्रेणी की गर्भवती महिलाओं की चिकित्सकों ने जांच की। साथ ही उन्हें परामर्श के साथ ही दवा उपलब्ध कराया गया।
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