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Sant Kabir Nagar News: सहकारी समितियों में डीएपी की किल्लत, भटक रहे किसान
Sat, 18 Nov 2023 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 18 Nov 2023 12:04 AM IST
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धनघटा। दावे के बावजूद साधन सहकारी समितियों में डीएपी की किल्लत बनी हुई है। कच्छप गति से पहुंच रही डीएपी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। उधर, फुटकर खाद विक्रेता डीएपी खाद बेचने में हाथ खड़ा कर दिए हैं। इससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
रबी की मुख्य फसल गेहूं की बुआई में तेजी आ गई है। जो किसान अब तक खेत का पलेवा नहीं किए हैं वे भी बगैर पलेवा बुआई में जुट गए हैं, नहीं तो पलेवा की जरूरत पड़ेगी और बुआई पिछड़ जाएगी। लेकिन, किसानों के तेजी पर डीएपी की कमी ब्रेक लगा रही है। दूसरी तरफ, फुटकर खाद के विक्रेता इस वर्ष डीएपी बेचने से हाथ खड़ा किए हुए हैं।
कुछ खाद विक्रेताओं ने बताया कि डीएपी के साथ नैनो यूरिया की बिक्री अनिवार्य कर है। नैनो यूरिया किसान खरीद नहीं रहे हैं। बगैर यूरिया के खाद देने में भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऊपर से किसानों से झिकझिक हो जाती है। इससे दुकानदारी पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इससे बढ़िया है कि डीएपी बेची ही न जाए। क्षेत्र की साधन सहकारी समिति बंडा बाजार, कोचरी, रजनौली, खाजो, शिवापार आदि साधन सहकारी समितियां घाटे के कारण बंद पड़ी हैं। साधन सहकारी समिति धनघटा, छपरा मगर्बी, चंद्रौटी, मुखलिसपुर, बारीडीहा पर सप्ताह में एक ट्रक डीएपी पहुंचती है तो किसानों कितना भीड़ लग जाती है कि उसे समाप्त होने में देर नहीं लगती है। किसान राम लौट, परशुराम चौधरी, रामवृक्ष यादव, जयप्रकाश गौड़, रामकेश आदि का कहना है कि डीएपी खाद न मिलने की वजह से बगैर सिंचाई किए खेत की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। इसी तरह एक सप्ताह डीएपी नहीं मिली तो खेत की नमी चली जाएगी। किसानों का कहना है कि प्राइवेट दुकानदारों के पास डीएपी तो है लेकिन वह मुंहमांगी कीमत पर बेच रहे हैं और उस खाद की शुद्धता की कोई गारंटी भी नहीं है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा का कहना है कि समितियों में डीएपी खाद भेजी जा रही है।
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रबी की मुख्य फसल गेहूं की बुआई में तेजी आ गई है। जो किसान अब तक खेत का पलेवा नहीं किए हैं वे भी बगैर पलेवा बुआई में जुट गए हैं, नहीं तो पलेवा की जरूरत पड़ेगी और बुआई पिछड़ जाएगी। लेकिन, किसानों के तेजी पर डीएपी की कमी ब्रेक लगा रही है। दूसरी तरफ, फुटकर खाद के विक्रेता इस वर्ष डीएपी बेचने से हाथ खड़ा किए हुए हैं।
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कुछ खाद विक्रेताओं ने बताया कि डीएपी के साथ नैनो यूरिया की बिक्री अनिवार्य कर है। नैनो यूरिया किसान खरीद नहीं रहे हैं। बगैर यूरिया के खाद देने में भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऊपर से किसानों से झिकझिक हो जाती है। इससे दुकानदारी पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इससे बढ़िया है कि डीएपी बेची ही न जाए। क्षेत्र की साधन सहकारी समिति बंडा बाजार, कोचरी, रजनौली, खाजो, शिवापार आदि साधन सहकारी समितियां घाटे के कारण बंद पड़ी हैं। साधन सहकारी समिति धनघटा, छपरा मगर्बी, चंद्रौटी, मुखलिसपुर, बारीडीहा पर सप्ताह में एक ट्रक डीएपी पहुंचती है तो किसानों कितना भीड़ लग जाती है कि उसे समाप्त होने में देर नहीं लगती है। किसान राम लौट, परशुराम चौधरी, रामवृक्ष यादव, जयप्रकाश गौड़, रामकेश आदि का कहना है कि डीएपी खाद न मिलने की वजह से बगैर सिंचाई किए खेत की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। इसी तरह एक सप्ताह डीएपी नहीं मिली तो खेत की नमी चली जाएगी। किसानों का कहना है कि प्राइवेट दुकानदारों के पास डीएपी तो है लेकिन वह मुंहमांगी कीमत पर बेच रहे हैं और उस खाद की शुद्धता की कोई गारंटी भी नहीं है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा का कहना है कि समितियों में डीएपी खाद भेजी जा रही है।
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