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खड़ी फसल में आग लगी तो फसल बीमा लाभ नहीं
Sant Kabir Nagar
Updated Thu, 13 Apr 2017 11:51 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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अगलगी से अगर आपकी खड़ी फसल जल जाती है तो प्रधानमंत्री फसल बीमा का लाभ आपको नहीं मिलेगा। कारण कि यह घटना बीमा के दायरे में नहीं आती है। हां, मंडी परिषद से आपको मुआवजा अवश्य मिल सकता है। लेकिन जागरूकता के अभाव में किसान इसका लाभ नहीं ले पाते। हालांकि यह राशि भी बहुत कम है।
राष्ट्रीय कृषि फसल बीमा योजना अप्रैल 2016 से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हो गई थी। किसान क्रेडिट कार्ड पर फसली ऋण लेने वाले किसानों को बीमा लाभ देनेे के लिए बैंक ही प्रीमियम की कटौती करके संबंधित बीमा कंपनी को पैसा दे देता है। जो किसान फसली ऋण नहीं लेते है और वे बीमा योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो बैंक के माध्यम से प्रीमियम जमा करके बीमा करा सकते हैं। हालांकि जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की स्थिति बेहतर नहीं है। खरीफ फसली वर्ष 2016 में किसानों को बीमा का लाभ तो मिलना है, लेकिन बीमा कंपनी ने अभी तक लाभार्थियों की संख्या न तो बैंकों को दी है और न ही कृषि विभाग को। रबी 2015-16 में कुल 13072 किसान और क्षेत्रफल 11184.61 हेक्टेयर बीमित था, इसका भी आंकड़ा विभाग के पास नहीं है।
उप कृषि निदेशक शिवदत्त त्रिपाठी और जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र वर्मा बताते है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में दैवीय आपदा से हुए नुकसान का ही बीमा होता है। जैसे-सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, सामूहिक रूप से रोग लगने से फसल को नुकसान हो जाए, जल जमाव, भूस्खलन आदि से फसल को क्षति। कटी फसल का बोझ खेत अथवा खलिहान में हो और प्राकृतिक आपदा से क्षति पहुंचे तो भी बीमा का लाभ लेने के लिए घटना के 48 घंटे के अंदर व्यक्तिगत क्षति का किसान दावा कर सकता है और बीमा कंपनी को सूचना देना होगा।
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वह कृषि विभाग के माध्यम से अथवा सीधे बीमा कंपनी से क्लेम कर सकता है। खेत में खड़ी फसल में आग लगने से हुए नुकसान को बीमा योजना में शामिल नहीं है। डीएम रमाकांत पांडेय ने बताया कि आग से फसल को हुए क्षति का मुआवजा किसानों को मंडी परिषद से दिया जाता है।
पात्र पीड़ित किसान आवेदन करें और मुआवजा का लाभ दिलाया जाएगा।मंडी सचिव अमित गुप्ता और मंडी निरीक्षक ओमप्रकाश आर्य ने बताया कि आग से फसल को हुए नुकसान के लिए घटना के 15 दिन के भीतर किसानों को निर्धारित प्रोफार्मा पर आवेदन करना होता है। उसके बाद तहसील स्तर से जांच कराई जाती है और फिर खलीहान अग्निकांड दुघर्टना बीमा के तहत मुआवजा दिया जाता है। एक हेक्टेयर तक फसल का नुकसान होने पर 15000 रुपये, दो हेक्टेयर पर 20000 रुपये और फिर पांच हेक्टेयर तक 30000 रुपये मुआवजा मिलता है। पिछले वर्ष जिले के 600 किसानों में 20 लाख मुआवजा वितरित किया गया था।
जबकि इस वर्ष अब तक धनघटा क्षेत्र के 50 से अधिक किसान मुआवजे के लिए आवेदन कर चुके ंहै। वैसे जहां आग लगती है, वहां मंडी परिषद के कर्मचारी भेेजे जाते हैं और वह किसानों को फार्म वितरित करते है। विधायक जय चौबे ने कहा कि आग से फसल को हुए नुकसान का मुआवजा मंडी परिषद से मिलता है, लेकिन यदि इससे बेहतर बीमा योजना में किसानों को लाभ मिल सकता है तो उसके लिए यथासंभव प्रयास किया जाएगा।
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राष्ट्रीय कृषि फसल बीमा योजना अप्रैल 2016 से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हो गई थी। किसान क्रेडिट कार्ड पर फसली ऋण लेने वाले किसानों को बीमा लाभ देनेे के लिए बैंक ही प्रीमियम की कटौती करके संबंधित बीमा कंपनी को पैसा दे देता है। जो किसान फसली ऋण नहीं लेते है और वे बीमा योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो बैंक के माध्यम से प्रीमियम जमा करके बीमा करा सकते हैं। हालांकि जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की स्थिति बेहतर नहीं है। खरीफ फसली वर्ष 2016 में किसानों को बीमा का लाभ तो मिलना है, लेकिन बीमा कंपनी ने अभी तक लाभार्थियों की संख्या न तो बैंकों को दी है और न ही कृषि विभाग को। रबी 2015-16 में कुल 13072 किसान और क्षेत्रफल 11184.61 हेक्टेयर बीमित था, इसका भी आंकड़ा विभाग के पास नहीं है।
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उप कृषि निदेशक शिवदत्त त्रिपाठी और जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र वर्मा बताते है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में दैवीय आपदा से हुए नुकसान का ही बीमा होता है। जैसे-सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, सामूहिक रूप से रोग लगने से फसल को नुकसान हो जाए, जल जमाव, भूस्खलन आदि से फसल को क्षति। कटी फसल का बोझ खेत अथवा खलिहान में हो और प्राकृतिक आपदा से क्षति पहुंचे तो भी बीमा का लाभ लेने के लिए घटना के 48 घंटे के अंदर व्यक्तिगत क्षति का किसान दावा कर सकता है और बीमा कंपनी को सूचना देना होगा।
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वह कृषि विभाग के माध्यम से अथवा सीधे बीमा कंपनी से क्लेम कर सकता है। खेत में खड़ी फसल में आग लगने से हुए नुकसान को बीमा योजना में शामिल नहीं है। डीएम रमाकांत पांडेय ने बताया कि आग से फसल को हुए क्षति का मुआवजा किसानों को मंडी परिषद से दिया जाता है।
पात्र पीड़ित किसान आवेदन करें और मुआवजा का लाभ दिलाया जाएगा।मंडी सचिव अमित गुप्ता और मंडी निरीक्षक ओमप्रकाश आर्य ने बताया कि आग से फसल को हुए नुकसान के लिए घटना के 15 दिन के भीतर किसानों को निर्धारित प्रोफार्मा पर आवेदन करना होता है। उसके बाद तहसील स्तर से जांच कराई जाती है और फिर खलीहान अग्निकांड दुघर्टना बीमा के तहत मुआवजा दिया जाता है। एक हेक्टेयर तक फसल का नुकसान होने पर 15000 रुपये, दो हेक्टेयर पर 20000 रुपये और फिर पांच हेक्टेयर तक 30000 रुपये मुआवजा मिलता है। पिछले वर्ष जिले के 600 किसानों में 20 लाख मुआवजा वितरित किया गया था।
जबकि इस वर्ष अब तक धनघटा क्षेत्र के 50 से अधिक किसान मुआवजे के लिए आवेदन कर चुके ंहै। वैसे जहां आग लगती है, वहां मंडी परिषद के कर्मचारी भेेजे जाते हैं और वह किसानों को फार्म वितरित करते है। विधायक जय चौबे ने कहा कि आग से फसल को हुए नुकसान का मुआवजा मंडी परिषद से मिलता है, लेकिन यदि इससे बेहतर बीमा योजना में किसानों को लाभ मिल सकता है तो उसके लिए यथासंभव प्रयास किया जाएगा।