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संतकबीरनगर के लिए खुशखबरी: विकसित होगी बखिरा झील, बनेगा रोजगार का हब

Tue, 26 Sep 2023 03:40 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Tue, 26 Sep 2023 03:40 PM IST
सार

डीएफओ पीके पांडेय बताते हैं कि यहां पर पूरे वर्ष पानी भरा रहता है। झील में जलीय वनस्पतियां छोटे-छोटे कीड़े, घोंघे व सीप आदि प्रचुरता में हैं। नवंबर से यहां प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है। अधिक ठंडक पड़ने पर लालसर की आवक होती है।

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Bakhira lake will be developed, will become employment hub
बखिरा झील में बिचरण करती पक्षिया।संवाद

विस्तार

संतकबीरनगर जिले में बखिरा झील को विकसित करने की कार्य योजना तैयार हो रही है। झील को विकसित करके रोजगार का हब बनाया जाएगा। आर्गेनिंग फार्मिग, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, वाटर पार्क, सोलर पार्क, इको टूरिज्म के हिसाब से झील को विकसित करके पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया जाएगा। इसके लिए कार्य योजना बनाने से लेकर धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी डीएम ने विभागवार बांट दी है।

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डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने सोमवार को कलक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें पूर्व में बखिरा झील के लिए हुई कवायद की जानकारी हासिल की। सिंचाई विभाग ने झील के चारों तरफ करीब 30 किलोमीट लंबा बांध बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार किए जाने की बात बताई।
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प्रति किलोमीटर बांध बनाने में करीब आठ लाख का खर्च बताया। इसी तरह डीसी मनरेगा प्रभात द्विवेदी और बघौली की बीडीओ श्वेता वर्मा ने पूर्व में मनरेगा से झील की सफाई कार्य कराए जाने की जानकारी दी। डीएफओ पीके पांडेय ने झील में किसानों की जमीन होने का भी जिक्र किया। पूर्व विधायक राकेश सिंह बघेल ने भी झील के विकास को लेकर पूर्व में हुई कवायद की चर्चा की और झील के विकास के लिए सुझाव दिए।
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डीएम ने कहा कि झील के विकास के लिए जन आंदोलन बनाए जाने की जरूरत है। इसमें आम लोगों तक झील के विकास होने से फायदे बताए जाने की आवश्यकता है। इसमें सभी विभाग को अपनी- अपनी कार्य योजना पर काम करने की जरूरत है। जिले के विकास के लिए उपलब्ध बजट का 50 प्रतिशत भी यदि झील के विकास पर खर्च किया जाए तो यह धरातल पर दिखने लगेगा।

 

डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि स्पेशल डवलपमेंट एरिया के लिए विशेष कार्य योजना तैयार हो रही है। झील को विकसित करके इसे अंतरराष्ट्रीय फलक पर लाए जाने की कोशिश हो रही है। झील संतकबीरनगर और गोरखपुर दोनों जनपदों में फैली है।

पर्यटकों के लिए यहां बहुत सारे काम कराए जाने की योजना है। इसकी मार्केटिंग और ब्रांडिंग दोनों उच्चकोटि की होगी। जिससे झील के विकास के साथ-साथ यहां के लोगों को सुगमता से रोजगार मिल सकें। इसके लिए आर्किटेक्चर और जनपद स्तरीय टीम के साथ बैठकें की गई हैं।

प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा स्थल है झील
प्रवासी पक्षियों के लिए ठंड का महीना मुफीद होता है। खासकर बखिरा झील प्रवासी पक्षियों का पनाहगार बनती है। जैसे-जैसे ठंड बढ़ती है, प्रवासी पक्षियों के कलरव से झील गुलजार होती है। अक्तूबर की शुरुआत होते ही यूरोप, साइबेरिया, तिब्बत, चीन से पक्षियाें का आना शुरु हो जाता है।

बखिरा पक्षी विहार में दीवाली से लेकर होली तक प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों का कलरवयुक्त ध्वनि पर्यटकों को खूब लुभाती है। यहां पाए जाने वाले विदेशी पक्षियों में लालसर, हिवीसिल, पोचार्ड, सूरखाब, गोजू, सवल, पिंटेल और मूरहेन आदि हैं। जबकि स्थानीय पक्षी में कैमा, वाटरहेन, राईटर, कारमोंटेंट, विभिन्न प्रकार के बगूले और सारस आदि हैं।
 

जनपद मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर पर स्थित बखिरा

जनपद मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर उत्तर खलीलाबाद-मेंहदावल मार्ग पर स्थित बखिरा कस्बा है। वहीं से तीन किलोमीटर पूर्वी भाग में 29 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में बखिरा झील फैली हुई है। वैसे बखिरा झील को मोती झील के नाम से भी जाना जाता है।

इसके किनारे बसे गांवों के मछुवारा समुदाय की आजीविका ही इसी झील पर आश्रित है। नवंबर से फरवरी तक चार माह विशाल जलाशय प्रवासी पक्षियों के लिए पनाहगाह बन जाती है। इसी को देखते हुए वर्ष 1990 में केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी करते हुए इसे पक्षी विहार का दर्जा दिया, लेकिन तीन दशक बाद भी झील का विकास अभी तक तक नहीं हो पाया।

इस विस्तृत भूभाग में विचरते पक्षियों को देखने के लिए सैलानी यहां आ सकें,इसके लिए बखिरा से तीन किलोमीटर बखिरा-सहजनवां मार्ग पर जसवल भरवलिया के उत्तर ओर डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क बनी है। परिसर में वाच टॉवर के अलावा वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए आवास बना है।

डीएफओ पीके पांडेय बताते हैं कि यहां पर पूरे वर्ष पानी भरा रहता है। झील में जलीय वनस्पतियां छोटे-छोटे कीड़े, घोंघे व सीप आदि प्रचुरता में हैं। नवंबर से यहां प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है। अधिक ठंडक पड़ने पर लालसर की आवक होती है।
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