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Sant Kabir Nagar News: मोहर्रम की तैयारियां तेज, कर्बला की सफाई शुरू
Fri, 21 Jul 2023 01:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 21 Jul 2023 01:00 AM IST
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बाघनगर में मोहर्रम पर्व को लेकर ताजिया बनाते कारीगर।
- मोहर्रम का महीना इस्लामिक कैलेंडर का पहना महीना होता है
संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। मोहर्रम का महीना इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है। यह महीना इस्लाम धर्म में शिया और सुन्नी मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम इस साल 20 जुलाई से शुरू हो गया है। मोहर्रम की 10वीं तारीख यौम-ए-आशूरा के नाम से जानी जाती है। ये इस्लाम धर्म का प्रमुख दिन होता है।
मोर्हरम की दसवीं तारीख( यौम ए आशूरा) 29 जुलाई को पड़ेगी। मोहर्रम पर्व की तैयारियों शुरू हो गई है। इस वजह से मोहर्रम की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। करतब दिखाने के लिए युवाओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। कहा जाता है कि मोहर्रम के महीने में हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी।
मौलाना कुमैल अशरफ ने बताया कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र में बलिदान का त्योहार मोहर्रम की तैयारी जोरों पर है। इसके लिए कमेटी गठित कर लोग कर्बला की साफ-सफाई में जुटे हुए हैं। सेमरियावां इलाके के सिसवादाखिली, परसाशेख, सालेहपुर में कर्बला पर मेला लगाया जाता। इलाके के सुघरा, बत्सी बत्सा, भरवलिया बूधन, टेकंसा आदि जगहों से मोहर्रम की दसवीं तारीख को कमेटियों के जरिए भव्य जुलूस निकाला जाएगा। मोहर्रम के दिन के लिए लोग बाजारों में लाठी, तलवार, ढोल व ताशे की खरीदारी करते हैं।
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पैगाम ए हक का देता है संदेश मोहर्रम
मौलाना कुमैल अशरफ ने बताया कि सिर्फ मुस्लिम समाज ही नहीं बल्कि सभी धर्मों के लिए प्रेरणादायी है। मोहर्रम से पैगाम-ए-हक का संदेश मिलता है। इंसानियत की आवाज बुलंद करने व दिलों में मोहब्बत करना सिखाता है।
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जुलूस व ताजिया निकालने की रवायत
इस्लाम धर्म की मान्यताओं के अनुसार करीब 1400 साल पहले आशूरा के दिन कर्बला की लड़ाई में इमाम हुसैन का सिर कलम कर दिया गया था। तभी से उनकी याद में इस दिन जुलूस और ताजिया निकालने की रवायत है। अशूरा के दिन तैमूरी रिवायत को मानने वाले मुसलमान रोजा-नमाज के साथ इस दिन ताजियों-अखाड़ों को दफन या ठंडा कर शोक मनाते हैं। आशूरा के दिन शिया समुदाय के लोग ताजिया निकालते हैं और मातम मनाते हैं। इराक में हजरत इमाम हुसैन का मकबरा है, उसी मकबरे की तरह का ताजिया बनाया जाता है और जुलूस निकाला जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। मोहर्रम का महीना इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है। यह महीना इस्लाम धर्म में शिया और सुन्नी मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम इस साल 20 जुलाई से शुरू हो गया है। मोहर्रम की 10वीं तारीख यौम-ए-आशूरा के नाम से जानी जाती है। ये इस्लाम धर्म का प्रमुख दिन होता है।
मोर्हरम की दसवीं तारीख( यौम ए आशूरा) 29 जुलाई को पड़ेगी। मोहर्रम पर्व की तैयारियों शुरू हो गई है। इस वजह से मोहर्रम की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। करतब दिखाने के लिए युवाओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। कहा जाता है कि मोहर्रम के महीने में हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी।
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मौलाना कुमैल अशरफ ने बताया कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र में बलिदान का त्योहार मोहर्रम की तैयारी जोरों पर है। इसके लिए कमेटी गठित कर लोग कर्बला की साफ-सफाई में जुटे हुए हैं। सेमरियावां इलाके के सिसवादाखिली, परसाशेख, सालेहपुर में कर्बला पर मेला लगाया जाता। इलाके के सुघरा, बत्सी बत्सा, भरवलिया बूधन, टेकंसा आदि जगहों से मोहर्रम की दसवीं तारीख को कमेटियों के जरिए भव्य जुलूस निकाला जाएगा। मोहर्रम के दिन के लिए लोग बाजारों में लाठी, तलवार, ढोल व ताशे की खरीदारी करते हैं।
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पैगाम ए हक का देता है संदेश मोहर्रम
मौलाना कुमैल अशरफ ने बताया कि सिर्फ मुस्लिम समाज ही नहीं बल्कि सभी धर्मों के लिए प्रेरणादायी है। मोहर्रम से पैगाम-ए-हक का संदेश मिलता है। इंसानियत की आवाज बुलंद करने व दिलों में मोहब्बत करना सिखाता है।
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जुलूस व ताजिया निकालने की रवायत
इस्लाम धर्म की मान्यताओं के अनुसार करीब 1400 साल पहले आशूरा के दिन कर्बला की लड़ाई में इमाम हुसैन का सिर कलम कर दिया गया था। तभी से उनकी याद में इस दिन जुलूस और ताजिया निकालने की रवायत है। अशूरा के दिन तैमूरी रिवायत को मानने वाले मुसलमान रोजा-नमाज के साथ इस दिन ताजियों-अखाड़ों को दफन या ठंडा कर शोक मनाते हैं। आशूरा के दिन शिया समुदाय के लोग ताजिया निकालते हैं और मातम मनाते हैं। इराक में हजरत इमाम हुसैन का मकबरा है, उसी मकबरे की तरह का ताजिया बनाया जाता है और जुलूस निकाला जाता है।