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Sant Kabir Nagar News: स्कूल बस में परिचर जरूरी, छात्राएं हों तो महिला परिचर की होगी तैनाती
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संतकबीरनगर। जनपद में स्कूल बस और ठेका वाहनों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर नियमों को सख्त किया गया है। अब चालक के अलावा वाहन में परिचर रखना अनिवार्य होगा। यदि बस में छात्राएं भी हैं तो महिला परिचर की व्यवस्था करनी होगी। इसके साथ ही ऐसे वाहनों में एक शिक्षक के यात्रा करने का भी प्रावधान किया गया है।
इसका उद्देश्य सफर के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराना है। स्कूल प्रबंधन को प्रत्येक वाहन में विद्यार्थियों से संबंधित आवश्यक विवरण भी उपलब्ध रखना होगा। इसमें विद्यार्थी का नाम, कक्षा, पता, मोबाइल नंबर, रक्त समूह और घर के नजदीकी स्थान की जानकारी शामिल होगी। विद्यार्थियों की यह सूची प्रधानाचार्य से प्रमाणित कराकर वाहन में रखनी होगी। आपात स्थिति में इससे विद्यार्थी की पहचान करने और उसके अभिभावकों से संपर्क करने में आसानी होगी।
स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल वाहन संचालक तक सीमित नहीं रहेगी। प्रत्येक जिले में जिला विद्यालय यान परिवहन सुरक्षा समिति गठित की गई है। इसमें जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, परिवहन विभाग के अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी समेत अन्य अधिकारी शामिल होते हैं।
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समिति की ओर से स्कूल वाहनों का कम से कम वर्ष में एक बार तकनीकी निरीक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं स्कूल स्तर पर गठित परिवहन सुरक्षा समिति प्रत्येक वाहन के पंजीकरण, फिटनेस, बीमा, परमिट और प्रदूषण प्रमाणपत्र की जांच करेगी।
वाहन चालक के ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता की जांच के साथ ही उसके पुलिस सत्यापन की भी पड़ताल की जाएगी। इससे अनफिट वाहन, वैध दस्तावेज नहीं रखने वाले संचालकों और नियमों का पालन नहीं करने वाले चालकों पर निगरानी रखी जा सकेगी।
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जिले में सभी स्कूल वाहन शासन के आदेशानुसार नियम के तहत संचालित किए जाएंगे। जांच के दौरान जो भी वाहन नियमानुकूल नहीं मिलेंगे, उनके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
-प्रियंवदा सिंह, एआरटीओ
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इसका उद्देश्य सफर के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराना है। स्कूल प्रबंधन को प्रत्येक वाहन में विद्यार्थियों से संबंधित आवश्यक विवरण भी उपलब्ध रखना होगा। इसमें विद्यार्थी का नाम, कक्षा, पता, मोबाइल नंबर, रक्त समूह और घर के नजदीकी स्थान की जानकारी शामिल होगी। विद्यार्थियों की यह सूची प्रधानाचार्य से प्रमाणित कराकर वाहन में रखनी होगी। आपात स्थिति में इससे विद्यार्थी की पहचान करने और उसके अभिभावकों से संपर्क करने में आसानी होगी।
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स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल वाहन संचालक तक सीमित नहीं रहेगी। प्रत्येक जिले में जिला विद्यालय यान परिवहन सुरक्षा समिति गठित की गई है। इसमें जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, परिवहन विभाग के अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी समेत अन्य अधिकारी शामिल होते हैं।
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समिति की ओर से स्कूल वाहनों का कम से कम वर्ष में एक बार तकनीकी निरीक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं स्कूल स्तर पर गठित परिवहन सुरक्षा समिति प्रत्येक वाहन के पंजीकरण, फिटनेस, बीमा, परमिट और प्रदूषण प्रमाणपत्र की जांच करेगी।
वाहन चालक के ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता की जांच के साथ ही उसके पुलिस सत्यापन की भी पड़ताल की जाएगी। इससे अनफिट वाहन, वैध दस्तावेज नहीं रखने वाले संचालकों और नियमों का पालन नहीं करने वाले चालकों पर निगरानी रखी जा सकेगी।
जिले में सभी स्कूल वाहन शासन के आदेशानुसार नियम के तहत संचालित किए जाएंगे। जांच के दौरान जो भी वाहन नियमानुकूल नहीं मिलेंगे, उनके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
-प्रियंवदा सिंह, एआरटीओ