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गलैंडर्स से ग्रसित घोड़े को डॉक्टरों की निगरानी में मारा गया
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ग्लैंडर्स से ग्रसित घोड़े को डॉक्टरों की निगरानी में मारा गया
मलौली के एक ईंट-भट्ठे पर दो घोड़े थे इस रोग से ग्रसित
एक घोड़े की 10 दिन पहले हो चुकी है मौत
अमर उजाला ब्यूरो
हैंसर/लोहरैया (संतकबीरनगर)। मलौली स्थित यादव ईंट-भट्ठे पर दो घोड़े ग्लैंडर्स फारसी जैसी जानलेवा और संक्रामक बीमारी से ग्रसित थे। एक घोड़े की 10 दिन पहले मौत हो चुकी थी, जबकि राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान हिसार (हरियाणा) की रिपोर्ट के आधार पर बुधवार को डॉक्टरों की टीम ने दूसरे घोड़े को जहर का इंजेक्शन देकर मार दिया।
हैंसर बाजार के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके निगम ने बताया कि मलौली में स्थित यादव ईंट-भट्ठे पर सात घोड़ों के खून की जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान सिरसा रोड हिसार हरियाणा भेजा गया था। दो घोड़ों के अंदर इस खतरनाक बीमारी की पुष्टि हुई थी। जांच रिपोर्ट आने से पहले ही इसमें से एक घोड़े की मौत हो चुकी थी। मामले की जानकारी डीएम को दी गई। उनके आदेश पर बीमार एक घोड़े को बुधवार दोपहर में जहर का इंजेक्शन लगाया गया। इससे उसकी मृत्यु हो गई। पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि ग्लैंडर्स फारसी नाम की यह संक्रामक बीमारी जानवरों से इंसानों में फैल जाती है। यह अश्व वंशीय पशुओं के साथ-साथ मनुष्यों के लिए घातक और लाइलाज है। इसीलिए समय-समय पर घोड़ों के रक्त के नमूनों की जांच होती रहती है। डॉ. आरके निगम के अनुसार अन्य घोड़े स्वस्थ हैं। अब इस रोग से किसी अन्य के प्रभावित होने का खतरा नहीं है।
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ग्लैंडर्स से ग्रसित घोड़े को डॉक्टरों की निगरानी में मारा गया
मलौली के एक ईंट-भट्ठे पर दो घोड़े थे इस रोग से ग्रसित
एक घोड़े की 10 दिन पहले हो चुकी है मौत
अमर उजाला ब्यूरो
हैंसर/लोहरैया (संतकबीरनगर)। मलौली स्थित यादव ईंट-भट्ठे पर दो घोड़े ग्लैंडर्स फारसी जैसी जानलेवा और संक्रामक बीमारी से ग्रसित थे। एक घोड़े की 10 दिन पहले मौत हो चुकी थी, जबकि राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान हिसार (हरियाणा) की रिपोर्ट के आधार पर बुधवार को डॉक्टरों की टीम ने दूसरे घोड़े को जहर का इंजेक्शन देकर मार दिया।
हैंसर बाजार के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके निगम ने बताया कि मलौली में स्थित यादव ईंट-भट्ठे पर सात घोड़ों के खून की जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान सिरसा रोड हिसार हरियाणा भेजा गया था। दो घोड़ों के अंदर इस खतरनाक बीमारी की पुष्टि हुई थी। जांच रिपोर्ट आने से पहले ही इसमें से एक घोड़े की मौत हो चुकी थी। मामले की जानकारी डीएम को दी गई। उनके आदेश पर बीमार एक घोड़े को बुधवार दोपहर में जहर का इंजेक्शन लगाया गया। इससे उसकी मृत्यु हो गई। पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि ग्लैंडर्स फारसी नाम की यह संक्रामक बीमारी जानवरों से इंसानों में फैल जाती है। यह अश्व वंशीय पशुओं के साथ-साथ मनुष्यों के लिए घातक और लाइलाज है। इसीलिए समय-समय पर घोड़ों के रक्त के नमूनों की जांच होती रहती है। डॉ. आरके निगम के अनुसार अन्य घोड़े स्वस्थ हैं। अब इस रोग से किसी अन्य के प्रभावित होने का खतरा नहीं है।
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