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असमोली क्षेत्र में सोत नदी पर अवैध कब्जा कर फसल लगाने वाले लोग खुद ही हटा रहे हैं अब कब्जे
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असमोली। एक बार अवैध कब्जे हटने के बाद फिर से विलुप्त होने की ओर बढ़ी सोत नदी को पुनर्जीवित करने का कार्य तेजी से चल रहा है। विकासखंड के अधिकारियों की निगरानी में हर रोज मनरेगा के मजदूरों द्वारा सफाई का कार्य हो रहा है। शनिवार और रविवार को लॉकडाउन के चलते कार्य नहीं हो सका लेकिन जिन लोगों ने सोत नदी में अवैध कब्जे कर फसलें लगा ली थीं उन्होंने खुद ही फसलों को नष्ट कर लिया है। सोत नदी के पुनर्जीवित होने से किसानों को पानी मिलने की उम्मीद है। संबंधित ग्राम पंचायतों के मुखिया भी प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।
असमोली क्षेत्र में सोत नदी का एक बड़ा हिस्सा है। जिले की सीमा मातीपुर गांव से इसकी शुरूआत होती है। मातीपुर से लेकर फिरोजपुर पुल तक ही बड़े रकबे में लोगों ने अवैध कब्जे कर लिए थे। हालांकि जिला प्रशासन ने कुछ माह पहले इन कब्जों को हटवाकर सोत नदी को पुनर्जीवित करने का काम शुरू कराया था। काफी हद तक कब्जे हटे और सोत नदी दिखाई देने लगी। लेकिन फिर से इस पर कब्जे हो गए।
अलबत्ता प्रशासन अब फिर से सोत नदी पर हुए कब्जों को हटवाने में जुट गया है। असमोली क्षेत्र में अवैध कब्जे हटवाएं जा रहे हैं। सोमवार से मनरेगा के मजदूरों के माध्यम से जगह-जगह सफाई और खुदाई का कार्य चलेगा। विकास खंड के अधिकारी भी इसकी निगरानी में लगे हैं। वहीं संबंधित ग्राम पंचायतों के प्रधानों का सहयोग भी प्रशासन को मिल रहा है। हर किसी को सोत नदी के पुनर्जीवित होने से जलधारा बहने की उम्मीद है। अब उन लोगों में खलबली है जिन्होंने सोत नदी में फसलें लगा दी थीं। उन्होंने अब खुद ही अपनी फसलें काटनी शुरू कर दी हैं।
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असमोली क्षेत्र में सोत नदी का एक बड़ा हिस्सा है। जिले की सीमा मातीपुर गांव से इसकी शुरूआत होती है। मातीपुर से लेकर फिरोजपुर पुल तक ही बड़े रकबे में लोगों ने अवैध कब्जे कर लिए थे। हालांकि जिला प्रशासन ने कुछ माह पहले इन कब्जों को हटवाकर सोत नदी को पुनर्जीवित करने का काम शुरू कराया था। काफी हद तक कब्जे हटे और सोत नदी दिखाई देने लगी। लेकिन फिर से इस पर कब्जे हो गए।
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अलबत्ता प्रशासन अब फिर से सोत नदी पर हुए कब्जों को हटवाने में जुट गया है। असमोली क्षेत्र में अवैध कब्जे हटवाएं जा रहे हैं। सोमवार से मनरेगा के मजदूरों के माध्यम से जगह-जगह सफाई और खुदाई का कार्य चलेगा। विकास खंड के अधिकारी भी इसकी निगरानी में लगे हैं। वहीं संबंधित ग्राम पंचायतों के प्रधानों का सहयोग भी प्रशासन को मिल रहा है। हर किसी को सोत नदी के पुनर्जीवित होने से जलधारा बहने की उम्मीद है। अब उन लोगों में खलबली है जिन्होंने सोत नदी में फसलें लगा दी थीं। उन्होंने अब खुद ही अपनी फसलें काटनी शुरू कर दी हैं।
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