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स्वयं सहायता समूह की महिलाएं तैयार करेंगी गन्ने की नर्सरी, किसान खरीदेंगे
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संभल। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गन्ने की पौध तैयार करके किसानों के बेचेंगी। इस तरह उन्हें एक पौध पर डेढ़ रुपये सरकार से मिलेंगे। इतने ही रुपये उस किसान से मिलेंगे जो पौध खरीदेगा। इस तरह से एक महिला 40 दिन में करीब 7500 हजार रुपये कमा सकेगी।
गन्ना विभाग ने महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाए हैं। समूह में शामिल महिलाएं अपने गांव में गन्ने की नर्सरी तैयार करके अपने क्षेत्र के किसानों को उपलब्ध कराएंगी। महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए यह पहल की गई है। चंदौसी, रजपुरा और असमोली क्षेत्र की सहकारी गन्ना परिषद ने पांच-पांच समूह गठित कराए हैं। इसमें 150 महिलाएं हैं। महिलाओं ने सिंगल बड चिप सीडलिंग से नर्सरी तैयार की है। एक समूह में दस महिलाएं हैं।
गन्ना परिषद रजपुरा की पर्यवेक्षक डा. ममता भारती ने बताया कि एक समूह एक बार में कम से कम 25,000 पौध तैयार कर लेगा। इसका प्रयोग करके देखा जा चुका है। इसलिए अब दूसरे समूहों को प्रेरित किया गया है। एक पौध के बदले में समूह को तीन रुपये मिलते हैं। इसमें आधा सरकार देती है और आधा किसान के भुगतान से मिलता है। दस महिलाओं को 25,000 पौध पर 75,000 रुपये घर बैठे मिल जाते हैं। पौध तैयार करने में कोई लागत इसलिए नहीं आएगी क्योंकि महिलाओं ने अपने खेत से ही गन्ने लेती हैं। जिनके पास खेत नहीं हैं उन महिलाओं को गन्ना विभाग ने गन्ना उपलब्ध कराएगा। पौध तैयार करने के लिए सीड ट्रे और शीड कटर निशुल्क उपलब्ध कराया गया है।
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ऐसे तैयार होती है नर्सरी
बड चिप के लिए नौ माह की स्वस्थ एवं कीट रहित गन्ने का चयन किया जाता है। रोग मुक्त गन्ने से बड चिप निकालते हुए पोर ट्रे में बुआई से पहले गन्ने को उपचारित भी किया गया। एक पोर ट्रे के 50 खानों में बालू व मिट्टी के
साथ सही अनुपात में कार्बनिक खाद मिलाकर नर्सरी तैयार की जाती है।
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गन्ना विभाग ने महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाए हैं। समूह में शामिल महिलाएं अपने गांव में गन्ने की नर्सरी तैयार करके अपने क्षेत्र के किसानों को उपलब्ध कराएंगी। महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए यह पहल की गई है। चंदौसी, रजपुरा और असमोली क्षेत्र की सहकारी गन्ना परिषद ने पांच-पांच समूह गठित कराए हैं। इसमें 150 महिलाएं हैं। महिलाओं ने सिंगल बड चिप सीडलिंग से नर्सरी तैयार की है। एक समूह में दस महिलाएं हैं।
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गन्ना परिषद रजपुरा की पर्यवेक्षक डा. ममता भारती ने बताया कि एक समूह एक बार में कम से कम 25,000 पौध तैयार कर लेगा। इसका प्रयोग करके देखा जा चुका है। इसलिए अब दूसरे समूहों को प्रेरित किया गया है। एक पौध के बदले में समूह को तीन रुपये मिलते हैं। इसमें आधा सरकार देती है और आधा किसान के भुगतान से मिलता है। दस महिलाओं को 25,000 पौध पर 75,000 रुपये घर बैठे मिल जाते हैं। पौध तैयार करने में कोई लागत इसलिए नहीं आएगी क्योंकि महिलाओं ने अपने खेत से ही गन्ने लेती हैं। जिनके पास खेत नहीं हैं उन महिलाओं को गन्ना विभाग ने गन्ना उपलब्ध कराएगा। पौध तैयार करने के लिए सीड ट्रे और शीड कटर निशुल्क उपलब्ध कराया गया है।
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ऐसे तैयार होती है नर्सरी
बड चिप के लिए नौ माह की स्वस्थ एवं कीट रहित गन्ने का चयन किया जाता है। रोग मुक्त गन्ने से बड चिप निकालते हुए पोर ट्रे में बुआई से पहले गन्ने को उपचारित भी किया गया। एक पोर ट्रे के 50 खानों में बालू व मिट्टी के
साथ सही अनुपात में कार्बनिक खाद मिलाकर नर्सरी तैयार की जाती है।