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दो साल में मलेरिया रोगियों में 90 फीसदी तक की कमी
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संभल। कोरोना संक्रमण काल में पिछले दो साल में मलेरिया व डेंगू नियंत्रण में दिखाई पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में मरीजों की संख्या में 90 फीसदी तक की कमी आई। विभाग के रिकार्ड में कोई डेंगू रोगी मिला ही नहीं है। कोरोना काल से पूर्व इस मौसम में डेंगू मलेरिया का खतरा बढ़ने लगता था। चिकित्सकों की मानें, तो कोरोना के दौरान लगातार जगह जगह हो रहे सैनिटाइजर का छिड़काव किया जा रहा है। मच्छर रोधी एंटी लारवा का भी छिड़काव हुआ है। साथ ही साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे मच्छरों का प्रकोप कम रहा है और बीमारी नियंत्रण में रही है।
कोरोना संक्रमण काल से पूर्व डेंगू और मलेरिया इस सीजन में घातक साबित हो रहा था। कोरोना के बाद से मलेरिया-डेंगू का रोगियों के बढ़ने का सिलसिला थम सा गया है। वर्ष 2019 में संभल जनपद में विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक 290 मलेरिया रोगी और तीन डेंगू रोगी मिले थे। वर्ष 2020 में कोरोना काल में मलेरिया रोगी घटकर मात्र 30 और डेंगू रोगी शून्य रह गए। कोरोना और मच्छर जनित बीमारियों के लक्षण एक जैसे होते हैं। ऐसे में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए विभाग की ओर से मलेरिया और डेंगू की रोकथाम के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सीएचसी चंदौसी के एमओआईसी डॉ. हरवेंद्र सिंह ने अनुसार कोरोना, मौसमी फ्लू, व मच्छरजनित बीमारियों में एक जैसे लक्षण होते हैं। सभी मरीजों को पूरी गंभीरता व सावधानी के साथ स्क्रीनिंग जरुरी है। जिससे समय पर रोगों का उपचार हो सके। बुखार आने पर जांच अवश्य कराएं, लापरवाही न बरतें।
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वर्ष डेंगू मलेरिया
2016 शून्य 309
2017 02 373
2018 08 208
2019 03 290
2020 शून्य 30
2021 शून्य 08
नोट: यह आंकड़े स्वास्थ्य विभाग से लिए गए हैं तथा वर्ष 2021 के आंकड़े माह जून तक के हैं।
ऐसे करें बचाव:
- घर के आवास पानी एकत्र न होने दें।
- गमलों, पुराने टायर व अन्य पात्रों का पानी बदलते रहें।
- कूलर का पानी सप्ताह में एक बार जरूर बदल दें।
- सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
- घर की खिड़कियों में जाली या स्क्रीन लगाकर रखे।
- शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें
यह समय सावधानी बरतने का है। कोरोना संक्रमण काल में मलेरिया, डेंगू का प्रकोप कम हुआ है। कोरोना काल मे लगातार सैनिटाइजर और कीटनाशक का छिड़काव हो रहा है। साफ सफाई पर जोर दिया जा रहा है। इस कारण मच्छरों का प्रकोप कम रहा है और बीमारी भी नियंत्रण में है। सरकारी अस्पताल में कोरोना के साथ ही डेंगू व मलेरिया जांच की भी निशुल्क व्यवस्था हैं। ऐसे में लापरवाही न बरते, जांच अवश्य कराएं।
डॉ. मनोज चौधरी, सर्विलांस अधिकारी संभल
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कोरोना संक्रमण काल से पूर्व डेंगू और मलेरिया इस सीजन में घातक साबित हो रहा था। कोरोना के बाद से मलेरिया-डेंगू का रोगियों के बढ़ने का सिलसिला थम सा गया है। वर्ष 2019 में संभल जनपद में विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक 290 मलेरिया रोगी और तीन डेंगू रोगी मिले थे। वर्ष 2020 में कोरोना काल में मलेरिया रोगी घटकर मात्र 30 और डेंगू रोगी शून्य रह गए। कोरोना और मच्छर जनित बीमारियों के लक्षण एक जैसे होते हैं। ऐसे में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए विभाग की ओर से मलेरिया और डेंगू की रोकथाम के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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सीएचसी चंदौसी के एमओआईसी डॉ. हरवेंद्र सिंह ने अनुसार कोरोना, मौसमी फ्लू, व मच्छरजनित बीमारियों में एक जैसे लक्षण होते हैं। सभी मरीजों को पूरी गंभीरता व सावधानी के साथ स्क्रीनिंग जरुरी है। जिससे समय पर रोगों का उपचार हो सके। बुखार आने पर जांच अवश्य कराएं, लापरवाही न बरतें।
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वर्ष डेंगू मलेरिया
2016 शून्य 309
2017 02 373
2018 08 208
2019 03 290
2020 शून्य 30
2021 शून्य 08
नोट: यह आंकड़े स्वास्थ्य विभाग से लिए गए हैं तथा वर्ष 2021 के आंकड़े माह जून तक के हैं।
ऐसे करें बचाव:
- घर के आवास पानी एकत्र न होने दें।
- गमलों, पुराने टायर व अन्य पात्रों का पानी बदलते रहें।
- कूलर का पानी सप्ताह में एक बार जरूर बदल दें।
- सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
- घर की खिड़कियों में जाली या स्क्रीन लगाकर रखे।
- शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें
यह समय सावधानी बरतने का है। कोरोना संक्रमण काल में मलेरिया, डेंगू का प्रकोप कम हुआ है। कोरोना काल मे लगातार सैनिटाइजर और कीटनाशक का छिड़काव हो रहा है। साफ सफाई पर जोर दिया जा रहा है। इस कारण मच्छरों का प्रकोप कम रहा है और बीमारी भी नियंत्रण में है। सरकारी अस्पताल में कोरोना के साथ ही डेंगू व मलेरिया जांच की भी निशुल्क व्यवस्था हैं। ऐसे में लापरवाही न बरते, जांच अवश्य कराएं।
डॉ. मनोज चौधरी, सर्विलांस अधिकारी संभल