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साढ़े तीन घंटे में तीन नवजात की मौत
अमर उजाला/ ब्यूरोसंभल
Updated Mon, 18 Jul 2016 01:20 AM IST
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संभल के जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स से भिड़ते नवजात शिशु के परिजन।
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जिला अस्पताल में रविवार को पल भर की किलकारी के बाद मौत का मातम छा गया। तीन नवजात शिशुओं की साढ़े तीन घंटे के भीतर मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल के कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि महिला चिकित्सक की तैनाती होती तो शायद नवजातों की जान बच जाती।
जिला अस्पताल में शकपुर सोत के निवासी मनोज की पत्नी सोनिका को बच्चे के प्रसव के लिए जिला अस्पताल में दोपहर दो बजे भरर्ती कराया गया। डिलीवरी के लिए कोई महिला डाक्टर नहीं थी इसके बावजूद अस्पताल के स्टाफ ने 3.30 बजे डिलीवरी कराई। बच्चे की श्वांस चल रही थी लेकिन कुछ ही पल में उसकी मौत हो गई।
इसके बाद हैबतपुर गांव निवासी शना पत्नी फरहान तथा आसमां पत्नी मोहम्मद रफी को 4.30 बजे डिलीवरी के लिए भर्ती कराया गया। सात से आठ बजे के बीच दोनों की डिलवरी हुई पर बच्चों की मौत हो गई। डिलीवरी के वक्त मौजूद शना के परिजनों का आरोप कि बच्चा जिंदा था, लेकिन डिलीवरी के वक्त दिक्कत होेने पर स्टाफ ने ध्यान नहीं दिया। इससे जिससे उसने दम तोड़ दिया। वहीं सोनिका के पति मनोज कुमार ने बताया कि बच्चा सुरक्षित था। पैदा होने के बाद उसे पंद्रह मिनट तक मशीन पर रखा गया। इसके बाद उसकी मौत हो गई। स्टाफ नर्स शकुंतला ने बताया कि दो बच्चे जिंदा पैदा हुए। हालत बिगड़ने पर उन्हें बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाने के लिए परिजनों से कहा। वे बच्चों को लेकर गए लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
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जिला अस्पताल में शकपुर सोत के निवासी मनोज की पत्नी सोनिका को बच्चे के प्रसव के लिए जिला अस्पताल में दोपहर दो बजे भरर्ती कराया गया। डिलीवरी के लिए कोई महिला डाक्टर नहीं थी इसके बावजूद अस्पताल के स्टाफ ने 3.30 बजे डिलीवरी कराई। बच्चे की श्वांस चल रही थी लेकिन कुछ ही पल में उसकी मौत हो गई।
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इसके बाद हैबतपुर गांव निवासी शना पत्नी फरहान तथा आसमां पत्नी मोहम्मद रफी को 4.30 बजे डिलीवरी के लिए भर्ती कराया गया। सात से आठ बजे के बीच दोनों की डिलवरी हुई पर बच्चों की मौत हो गई। डिलीवरी के वक्त मौजूद शना के परिजनों का आरोप कि बच्चा जिंदा था, लेकिन डिलीवरी के वक्त दिक्कत होेने पर स्टाफ ने ध्यान नहीं दिया। इससे जिससे उसने दम तोड़ दिया। वहीं सोनिका के पति मनोज कुमार ने बताया कि बच्चा सुरक्षित था। पैदा होने के बाद उसे पंद्रह मिनट तक मशीन पर रखा गया। इसके बाद उसकी मौत हो गई। स्टाफ नर्स शकुंतला ने बताया कि दो बच्चे जिंदा पैदा हुए। हालत बिगड़ने पर उन्हें बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाने के लिए परिजनों से कहा। वे बच्चों को लेकर गए लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
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