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ओबरी में पेयजल की आपूर्ति के लिए शुरू हुई टेस्टिंग, जगह-जगह मिल रही लीकेज
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संभल/ओबरी। असमोली ब्लाक के ओबरी गांव के लोगों को ओवरहेड टैंक से शुद्घ पेयजल उपलब्ध कराने की अमर उजाला की मुहिम आखिरकार रंग ले आई है। शनिवार को गांव में पाइप लाइन की टेस्टिंग शुरू हुई। प्रधान के ऐतराज के बाद यह काम रुका हुआ था। जल निगम के सहायक अभियंता और जेई ने प्रधान से मिलकर टेस्टिंग कराने का आग्रह किया था। इसके बाद टेस्टिंग शुरू हुई है। फिलहाल अभी जगह-जगह लीकेज मिल रही है। दो जगह की लीकेज ठीक की गई है। जल्द ही लोगों को स्वच्छ पानी मिलने लगेगा।
असमोली विकासखंड की ग्राम पंचायत ओबरी की करीब दस हजार से अधिक आबादी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने को वर्ष-2013 में उत्तर प्रदेश जल निगम ने साढ़े चार लाख लीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक बनाया था। इसके निर्माण से ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मिलने की आस जगी लेकिन बजट के अभाव में कार्य पूरा नहीं हो सका। ग्रामीणों को दूषित पानी पीने को विवश होना पड़ा। अमर उजाला ने समय-समय पर पेयजल की समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसे तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने संज्ञान लिया। आखिरकार जिलाधिकारी की पैरवी पर शासन से धन जारी हुआ। जल निगम की कार्यदायी संस्था ने अधूरे काम को अक्तूबर-2021 में पूरा कराया। लेकिन टेस्टिंग के दौरान सड़कों की खराब होती हालत को लेकर ग्राम प्रधान हनीफा खातून ने एतराज जताया तो टेस्टिंग का काम नवंबर-2021 में बंद कर दिया गया था। करीब छह माह से पेयजल योजना की बंद पड़ी पाइपलाइन की टेस्टिंग के मुद्दे को अमर उजाला ने 12 मई के अंक में फिर से प्रमुखता से प्रकाशित किया। शुक्रवार को जल निगम के सहायक अभियंता केजी सिंह और जेई प्रदीप कुमार ओबरी गांव पहुंचे। ग्राम प्रधान हनीफा खातून से पेयजल योजना की पाइपलाइन की टेस्टिंग के बारे में बात की। इसके बाद शनिवार से टेस्टिंग शुरू हुई है।
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असमोली विकासखंड की ग्राम पंचायत ओबरी की करीब दस हजार से अधिक आबादी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने को वर्ष-2013 में उत्तर प्रदेश जल निगम ने साढ़े चार लाख लीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक बनाया था। इसके निर्माण से ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मिलने की आस जगी लेकिन बजट के अभाव में कार्य पूरा नहीं हो सका। ग्रामीणों को दूषित पानी पीने को विवश होना पड़ा। अमर उजाला ने समय-समय पर पेयजल की समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसे तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने संज्ञान लिया। आखिरकार जिलाधिकारी की पैरवी पर शासन से धन जारी हुआ। जल निगम की कार्यदायी संस्था ने अधूरे काम को अक्तूबर-2021 में पूरा कराया। लेकिन टेस्टिंग के दौरान सड़कों की खराब होती हालत को लेकर ग्राम प्रधान हनीफा खातून ने एतराज जताया तो टेस्टिंग का काम नवंबर-2021 में बंद कर दिया गया था। करीब छह माह से पेयजल योजना की बंद पड़ी पाइपलाइन की टेस्टिंग के मुद्दे को अमर उजाला ने 12 मई के अंक में फिर से प्रमुखता से प्रकाशित किया। शुक्रवार को जल निगम के सहायक अभियंता केजी सिंह और जेई प्रदीप कुमार ओबरी गांव पहुंचे। ग्राम प्रधान हनीफा खातून से पेयजल योजना की पाइपलाइन की टेस्टिंग के बारे में बात की। इसके बाद शनिवार से टेस्टिंग शुरू हुई है।
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