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टीसीएल टेकओवर-सुविधाएं छिनने की आशंका से युवा बेचैन
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Fri, 12 Aug 2016 01:45 AM IST
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जिन्हें टीसीएल की ओर से ननिशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं कुछ ग्राम प्रधानों ने तो सुविधाओं को बंद किए जाने पर आंदोलन की धमकी तक दे डाली है। हालांकि जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया ह ैकि ग्रामीणों व कर्मचारियों को देय सुविधाओं में किसी तरह की कोई कटौती नहीं की जाएगी।
टीसीएल बबराला के ही एक संस्था टीसीएसआरडी, कंपनी के विलेज हाउस में ही बालिकाओं के लिए सिलाई कढ़ाई बुनाई, ब्यूटीशियन आदि के लिए निशु्ल्क प्रशिक्षण दिलाती है। इसके साथ ही युवाओं को कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग आदि की तकनीकि शिक्षा भी दिलाती है। विद्यालय भी संचालित कर रही हैं।
सबसे अहम बात यह है कि कंपनी ने निकटस्थ पांच गांव मेहुआ हसनगंज, कैल, नूरपुर, पंवारी व बाघऊ के विद्यार्थियों को निशुल्क कोचिंग की भी व्यवस्था करती है, ताकि क्षेतर्र के बच्चे पढ़ लिखकर कुछ बन सकें।
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हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जब कंपनी ने स्थानीय किसानों से जमीन ली थी तो बीस किमी वर्ग क्षेत्र में सड़कें, लाइट आदि कई प्रकार से विकास करने की बात कही थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। टीसीएल के कर्मचारियों में प्रबंधन बदलाव से खौफ तो है, क्योंकि यारा इंटरनेशनल नार्वे की जानी मानी उर्वरक उत्पादक कंपनी है, जाहिर है कि उच्चस्तरीय प्रबंधन में बदलाव तो होगा ही। कर्मचारी आशंकित है कि विदेशी कंपनी किस तरह से काम करेगी, यह तो समय ही बताएगा।
लेकिन इतना तो तय है कि वर्कर कहीं विदेश से तो आएंगे नहीं। इसलिए कर्मचारी तो यहीं रहेंगे। लेकिन अभी कुछ कहना गलत होगा। कर्मचारियों ने कार्रवाई की आशंका के तहत कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।
टीसीएल बबराला के ही एक संस्था टीसीएसआरडी, कंपनी के विलेज हाउस में ही बालिकाओं के लिए सिलाई कढ़ाई बुनाई, ब्यूटीशियन आदि के लिए निशु्ल्क प्रशिक्षण दिलाती है। इसके साथ ही युवाओं को कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग आदि की तकनीकि शिक्षा भी दिलाती है। विद्यालय भी संचालित कर रही हैं।
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सबसे अहम बात यह है कि कंपनी ने निकटस्थ पांच गांव मेहुआ हसनगंज, कैल, नूरपुर, पंवारी व बाघऊ के विद्यार्थियों को निशुल्क कोचिंग की भी व्यवस्था करती है, ताकि क्षेतर्र के बच्चे पढ़ लिखकर कुछ बन सकें।
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हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जब कंपनी ने स्थानीय किसानों से जमीन ली थी तो बीस किमी वर्ग क्षेत्र में सड़कें, लाइट आदि कई प्रकार से विकास करने की बात कही थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। टीसीएल के कर्मचारियों में प्रबंधन बदलाव से खौफ तो है, क्योंकि यारा इंटरनेशनल नार्वे की जानी मानी उर्वरक उत्पादक कंपनी है, जाहिर है कि उच्चस्तरीय प्रबंधन में बदलाव तो होगा ही। कर्मचारी आशंकित है कि विदेशी कंपनी किस तरह से काम करेगी, यह तो समय ही बताएगा।
लेकिन इतना तो तय है कि वर्कर कहीं विदेश से तो आएंगे नहीं। इसलिए कर्मचारी तो यहीं रहेंगे। लेकिन अभी कुछ कहना गलत होगा। कर्मचारियों ने कार्रवाई की आशंका के तहत कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।