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श्रीमद् भागवत पुस्तक नहीं, भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप है : हेमेंद्र
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सरायतरीन। गांव विक्रमपुर ताहरपुर में श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कन्याओं ने हवन में आहुति देकर धर्म रक्षा और गौ माता की सेवा करने का संकल्प लिया। कथाव्यास ने बताया कि मनुष्य को जीवन में श्रीमद्भागवत कथा स्मरण जरूर करना चाहिए। ताकि मोक्ष की प्राप्ति का द्वार खुल सके।कथाव्यास हेमेंद्र शास्त्री ने बताया कि कलयुग में भागवत महापुराण कल्पवृक्ष से भी बढ़कर है। कथा भक्ति और मुक्ति प्रदान कर जीव को परम पद प्राप्त कराती है। श्रीमद भागवत पुस्तक नहीं, बल्कि साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप है। इसके एक-एक अक्षर में भगवान समाए हुए हैं। इस कथा को सुनना दान, व्रत और तीर्थ से भी बढ़कर है। उन्होंने बताया कि इस कथा के ध्यानपूर्वक श्रवण और इससे प्राप्त ज्ञान को आत्मसात करने मात्र से ही धुंधकारी जैसे महापापी प्रेतात्मा का उद्धार हो जाता है।
बताया कि मनुष्य से गलती होना बड़ी बात नहीं है लेकिन गलती को समय रहते सुधार न करना बड़ी बात है। यह पाप की श्रेणी में आता है। भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता, पर हर किसी में बसता है। इस दौरान महंत धर्म भारती महाराज, पूर्व प्रधान वीरभान सिंह यादव, वीरेश यादव, रविंद्र यादव, धर्मवीर यादव, प्रदीप यादव, देव पाल आदि रहे।
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बताया कि मनुष्य से गलती होना बड़ी बात नहीं है लेकिन गलती को समय रहते सुधार न करना बड़ी बात है। यह पाप की श्रेणी में आता है। भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता, पर हर किसी में बसता है। इस दौरान महंत धर्म भारती महाराज, पूर्व प्रधान वीरभान सिंह यादव, वीरेश यादव, रविंद्र यादव, धर्मवीर यादव, प्रदीप यादव, देव पाल आदि रहे।
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